इंदौर के बिल्डर्स और सूखदारों पर फिर मंडराया खतरा, लॉरेंस गैंग से जुड़े 5 आरोपियों को मिली जमानत
इंदौर के बिल्डर विवेक दम्मानी के साथ ही रंजन मित्तल, चेतन सिंह, कुंवर सिंह से करोड़ों की वसूली के लिए लॉरेंस विश्नोई गैंग ने तैयारी की थी। इसमें खरगोन के दिलीप सिंह राठौड़ के यहां मार्च 2026 में यह गैंग पहले भी फायरिंग कर चुकी थी। फरवरी से अप्रैल माह तक इस गैंग का इंदौर और मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में काफी खौफ रहा है। साथ ही धमकी भरे फोन आए हैं। इसके बाद क्राइम ब्रांच इंदौर ने एक के बाद एक कई लोगों को पकड़ा। लेकिन अब इसमें पांच आरोपियों को जमानत मिल गई है। हालांकि राहत की बात ये है कि इनमें से कई आरोपी अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेंगें। क्योंकि इन पर और भी एफआईआर दर्ज है जिसमें जमानत मिलना बाकी है।
इन सभी को मिली जमानत
इसमें नाना उर्फ रोहित वर्रा को अभी जिला कोर्ट से 50 हजार की गारंटी पर जमानत मिली है। इस पर आरोप है कि इसने फायरिंग कराने के लिए लॉरेंस गैंग को लड़के उपलब्ध कराए थे। इसके साथ ही राहुल सिंह और कुलदीप सिंह चौहान को हाईकोर्ट से 50-50 हजार की शर्त पर जमानत की मंजूरी देने का आदेश 14 अगस्त को पारित हुआ है। वहीं सचिन उर्फ वेदप्रकाश को भी 17 अगस्त को जमानत मंजूर हो गई। इसके साथ ही सोनू उर्फ रितेश खंगार की भी जमानत हो गई है।
कौन आरोपी क्या कर रहा था
पुलिस की जांच में सामने आया था कि, राजपाल चंद्रावत, सचिन शर्मा और कुलदीप सिंह चौहान मिलकर रसूखदारों को धमकाने के काम में लगे थे। राजपाल ने खुद को लॉरेंस गैंग का बताया था। वहीं यह इनके यहां फायरिंग की प्लानिंग करवाता था। इस गैंग में सभी अलग-अलग काम कर रहे थे। नाना उर्फ रोहित वर्रा विदेशी नंबर उपलब्ध कराता था। इसी से वसूली के लिए फोन होते थे। बाकी आरोपी रसूखदारों की डिटेल निकालने, फोटो-वीडियो उपलब्ध कराने का काम करते थे। इसके बाद धमकी भरे फोन जाते थे जिसमें पांच से दस करोड़ तक की मांग होती थी।
बिल्डर दम्मानी ने कराई थी एफआईआर
इस मामले में बड़ी हिम्मत बिल्डर विवेक दम्मानी ने दिखाई थी। जब उन्हें धमकी भरा फोन आया और पांच करोड़ मांगे गए। ऐसा नहीं करने पर बेटे को गोली मारने की धमकी दी गई। इस पर 14 अप्रैल को एफआईआर हुई। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने केस संभाला और डीसीपी राजेश त्रिपाठी ने टीम बनाकर एक के बाद एक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद इंदौर में धमकी का मामला ठंडा हुआ। वहीं अब आरोपियों को एक-एक कर जमानत मिलने से संकट फिर गहरा रहा है।
इस आधार पर मिल रही जमानत
जमानत का मूल आधार इस बात पर है कि चालान पेश हो गया है और ट्रायल लंबा चलेगा। इसलिए इतने दिन जेल में रखना मुनासिब नहीं है। विविध शर्तों के साथ और 50 हजार के मुचलके पर जमानत दी गई है।
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