बिल्डर्स को धमकाने वाले लारेंस विश्नोई गैंग के राजपाल और योगेश भाटी को जमानत नहीं
इंदौर में फरवरी-मार्च के दौरान कई बिल्डर्स और रसूखदारों को अवैध वसूली के लिए फोन आए थे। यह फोन लॉरेंस विश्नोई गैंग और हैरी बाक्सर के नाम से आए थे। इसमें क्राइम ब्रांच इंदौर ने स्पेशल टीम बनाकर जांच की थी। इसके बाद कई आरोपी पकड़े गए थे। इसमें नागदा उज्जैन का राजपाल चंद्रावत और योगेश भाटी भी थे।
यह कहकर मांगी थी जमानत
चंद्रावत और भाटी ने इंदौर जिला कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन लगाया था। इसमें तर्क दिए गए थे कि आरोप झूठे हैं। साथ ही सह आरोपी रोहित व सचिन को हाईकोर्ट से जमानत मिलने की भी बात कही गई थी। यह भी कहा गया कि अपराध में उनकी भूमिका नहीं थी।
जिला कोर्ट ने कहा लारेंस गैंग के साथ आरोपी
वहीं, जिला कोर्ट ने पुलिस के प्रतिवेदन और शासन के पक्ष के आधार पर कहा कि सह आरोपी और चंद्रावत व भाटी का मामला अलग है। गंभीर संगठित अपराध में समानता के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती है। जब दोनों दिल्ली जेल में बंद थे तब लॉरेंस गैंग के साथ संपर्क किया और उनके साथ काम करने की मंशा जाहिर की। यह तथ्य अन्य सहआरोपियों से अलग है और मामला गंभीर है। समाज में इस तरह के संगठित अपराध देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है।
कौन है चंद्रावत और भाटी
दोनों पर ही पहले भी कई गंभीर अपराध दर्ज हैं। दोनों पर एनआईए ने भी साल 2023 में जांच की थी। यह संगठित अपराधों से जुड़े रहे हैं। दोनों ने वसूली के लिए खरगोन के दिलीप सिंह राठौर को भी धमकाया था और गोलियां भी चलवाई थीं। इस मामले में राजपाल जेल में बंद था, जहां से अप्रैल में इंदौर पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया था। वहीं भाटी भी राजपाल के साथ जुड़ा हुआ था।
इंदौर में इन सभी को दी गई थी धमकी
इंदौर में बिल्डर विवेक दम्मानी को पांच करोड़ की वसूली की धमकी मिल चुकी है। जिसमें उन्होंने केस दर्ज कराया। जिसके बाद पुलिस ने सुरक्षा दी है। इसमें बेटे को भी गोली मारने की धमकी दी गई थी। प्रॉपर्टी कारोबारी चेतन पंवार व उनके पार्टनर कुवंर सिंह भूरिया को दस करोड़ की वसूली की धमकी दी गई। कॉलेज संचालक रंजन मित्तल को धमकी दी गई। इसके साथ ही कारोबारी संजय मोगरा (जैन) से 15 करोड़ मांगे, मेवाड़ अस्पताल संचालक विक्रम मेवड़ा से पांच करोड़ मांगे।