इंदौर में फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह के खिलाफ बार एसोसिएशन का प्रदर्शन

Sanjay Gupta | Oct 12, 2026, 18:07 IST
इंदौर फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह के खिलाफ वकीलों ने प्रदर्शन किया है।
Indore. इंदौर में फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह की कार्यशैली को लेकर बार एसोसिएशन मैदान में उतर गई है। सोमवार को वकीलों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। वहींअधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राकेश पाल ने कहा कि नई कार्यकारिणी के चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद से ही प्रधान न्यायाधीश के व्यवहार को लेकर वकीलों और पक्षकारों की ढेरों शिकायतें मिल रही थीं।

वकीलों का फैमिली कोर्ट में उग्र प्रदर्शन

इंदौर फैमिली कोर्ट (Indore Family Court) के प्रधान न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह पर अनुचित व्यवहार के आरोप लगाते हुए बार एसोसिएशन ने प्रदर्शन किया। जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय के वकील नाराज हैं। इसी के विरोध में दोनों बार एसोसिएशन के बैनर तले वकीलों ने फैमिली कोर्ट में उग्र प्रदर्शन किया और अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।



यह बोले बार एसोसिएशन के पदाधिकारी

इस मामले को लेकर इंदौर अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राकेश पाल ने जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि नई कार्यकारिणी के गठन से शिकायतें मिल रही थीं। ये शिकायतें प्रधान न्यायाधीश के व्यवहार से जुड़ी थीं। वकीलों और पक्षकारों ने उनके व्यवहार पर आपत्ति जताई थीवकीलों का आरोप है कि न्यायाधीश का वकीलों से बात करने का लहजा और आचरण उचित नहीं है। इस गंभीर विषय पर पहले भी उच्च न्यायालय में दो बार लिखित शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं।



एक बार फिर की गई शिकायत

सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट और जिला न्यायालय के दोनों अधिवक्ता संघों के प्रतिनिधिमंडल ने मिलकर प्रशासनिक न्यायाधीश से मुलाकात की। वकीलों का कहना है कि बार और बेंच न्यायपालिका के दो अहम पहलू हैं। यदि वकीलों और पक्षकारों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाएगा, तो आम जनता न्याय की क्या उम्मीद रख सकती है?



जिला कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पाल और सचिव धर्मेंद्र गुर्जर ने कहा कि न्यायाधीश को अपने व्यवहार में सुधार लाने के लिए अंतिम बार कहा गया है। यदि इसके बावजूद व्यवहार में बदलाव नहीं आया, तो वकील उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।



अब आगे अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

बार एसोसिएशन (Bar Association) के पदाधिकारियों ने कहा कि व्यवहार में सुधार नहीं होने पर आगे कार्य का बहिष्कार किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल या कार्य बहिष्कार का निर्णय भी लिया जाएगा। पदाधिकारियों ने बताया कि माननीय न्यायाधीश ने भविष्य में अपने व्यवहार पर ध्यान देने का आश्वासन दिया है। आगे की ठोस रणनीति दोनों बार एसोसिएशन के सभी सम्मानित सदस्यों के साथ बैठक कर तय की जाएगी।



जज के व्यवहार की शिकायत करने के क्या है नियम?

न्यायिक अधिकारियों के आचरण से जुड़ी शिकायतों के लिए प्रशासनिक व्यवस्था मौजूद है। अधीनस्थ न्यायालयों पर संबंधित उच्च न्यायालय (High Court ) का प्रशासनिक नियंत्रण होता है। संविधान के अनुच्छेद 235 में यह व्यवस्था दी गई है। वकील या अन्य शिकायतकर्ता संबंधित उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी शिकायत रख सकते हैं।



शिकायत के तथ्यों और उपलब्ध सामग्री के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होती है। केवल शिकायत दर्ज होने से किसी न्यायिक अधिकारी पर आरोप साबित नहीं हो जाते। किसी भी कार्रवाई से पहले संबंधित प्रक्रिया और नियमों का पालन जरूरी होता है।



अब आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल दोनों बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने आगे की रणनीति सामूहिक बैठक में तय करने की बात कही है। वकीलों की मुख्य मांग प्रधान न्यायाधीश के व्यवहार में सुधार की है। पदाधिकारियों के अनुसार न्यायाधीश की ओर से इस संबंध में आश्वासन भी दिया गया है। अब यह देखना होगा कि इस आश्वासन के बाद विवाद समाप्त होता है या वकील आंदोलन आगे बढ़ाते हैं। मामले में प्रधान न्यायाधीश का स्वतंत्र पक्ष उपलब्ध नहीं है। उनका पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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