चौसठ योगिनी मंदिर में टीवी सीरियल लक्ष्मी निवास की शूटिंग पर विवाद, धार्मिक भावनाएं आहत होने पर कोर्ट सख्त
News in short
- चौसठ योगिनी मंदिर और ग्वारीघाट पर फिल्माए गए दृश्य विवादों में आ गए हैं।
- अधिवक्ता विवेक तिवारी ने कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है।
- मंदिर परिसर में छेड़छाड़ जैसे सीन दिखाने का आरोप है।
- थाना गोरखपुर से न्यायालय ने विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।
- 9 अप्रैल 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
News in detail
जबलपुर के विश्व प्रसिद्ध चौसठ योगिनी मंदिर और नर्मदा तट स्थित ग्वारीघाट जैसे धार्मिक स्थलों पर टीवी धारावाहिक लक्ष्मी निवास के कुछ दृश्य फिल्माए गए हैं। ये दृश्य अब विवाद का कारण बन गए हैं।
यहां पर मंदिर परिसर में महिला एक्ट्रेस से छेड़छाड़ से सीन फिल्माए गए हैं। इन दृश्यों को लेकर आरोप लगाया गया है कि पवित्र स्थलों की गरिमा के विपरीत सामग्री फिल्माई और प्रसारित की गई है। इससे आमजन की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
अधिवक्ता ने उठाया कानूनी कदम
मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट के अधिवक्ता विवेक तिवारी ने जिला न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया है। परिवाद में आरोप लगाया गया है कि, मंदिर परिसर के भीतर छेड़छाड़ जैसे दृश्य दिखाए गए है। ये दृश्य न केवल अशोभनीय हैं बल्कि धार्मिक आस्थाओं के साथ खिलवाड़ भी है। परिवादी ने यह भी बताया कि इस संबंध में पहले पुलिस अधिकारियों को शिकायत दी गई थी। कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के बाद न्यायालय की शरण लेनी पड़ी है।
कोर्ट का सख्त रुख, पुलिस से जवाब तलब
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी गोरखपुर को निर्देशित किया है। कहा है कि वे पूरे प्रकरण की जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्यवाही तय की जाएगी। इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल, बढ़ा जनआक्रोश
बताया जा रहा है कि धारावाहिक के विवादित दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इसके बाद आमजन में आक्रोश की स्थिति बन गई है। लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर इस तरह के दृश्य फिल्माना आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ है। इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
निर्माता-निर्देशक भी घेरे में
इस परिवाद में धारावाहिक के निर्माता, निर्देशक और संबंधित चैनल के अधिकारियों को भी अनावेदक बनाया गया है। भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध का संज्ञान लेने की मांग की गई है। अब सभी की नजर 9 अप्रैल को आने वाली पुलिस जांच रिपोर्ट पर टिकी है। इससे यह तय होगा कि मामला किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
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