लेंसकार्ट के तिलक-मंगलसूत्र विवाद पर भड़के धीरेंद्र शास्त्री, पीयूष बंसल को दे दी चेतावनी
News In Short
- लेंसकार्ट कंपनी पर तिलक, मंगलसूत्र और सिंदूर पर पाबंदी का आरोप लगा है।
- सोशल मीडिया पर एक कथित ड्रेस कोड डॉक्यूमेंट वायरल हो रहा है।
- बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने प्रयागराज में कंपनी को कड़ी चेतावनी दी है।
- कंपनी के सीईओ पीयूष बंसल ने सफाई दी और सभी धर्मों के सम्मान की बात कही है।
News In Detail
प्रयागराज में गरजे धीरेंद्र शास्त्री
यूपी के प्रयागराज में 21 से 23 अप्रैल तक चल रही हनुमंत कथा के पहले दिन बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने लेंसकार्ट कंपनी को सीधी चुनौती दी। उन्होंने मंच से कहा कि जिस कंपनी ने अपने कर्मचारियों को तिलक, मंगलसूत्र और सिंदूर पर रोक लगाई है, उसे भारत में कारोबार करने का कोई हक नहीं है।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि नक्कटा! तू अपनी कंपनी लाहौर में खोल ले, भारत में काहे को मर रहा है? उन्होंने आगे कहा कि हमारे तो बाप का भारत है। जिन्हें तिलक, चंदन, राम, हनुमान और बाबा बागेश्वर से दिक्कत हो, वो लाहौर खिसक लें।
शास्त्री ने कंपनी को चेतावनी देते हुए कहा कि बेटा! गड़बड़ हो गए हो तुम। अभी भी मौका है सुधर जाओ, वरना भारत का कानून सुधार भी देता है। उन्होंने यूपी पुलिस का जिक्र करते हुए कहा कि यहां गाड़ी पलट भी जाती है।
सनातन पर खतरे की चेतावनी
धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदुओं को एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आज मंगलसूत्र पर उंगली उठाई जा रही है, कल बिरादरी पर उठेगी, परसों सनातन धर्म पर उठेगी। उन्होंने कहा कि यदि हम एकजुट नहीं हुए तो गीता और रामायण पर भी उंगलियां उठेंगी।
उन्होंने संगम का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे तीन नदियां मिलकर महासंगम बनाती हैं, वैसे ही सभी जातियों को छोड़कर हिंदू एकता दिखाई जाए।
विवाद कहां से शुरू हुआ?
यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से शुरू हुआ। इस डॉक्यूमेंट में दावा था कि लेंसकार्ट के कर्मचारी बिंदी, तिलक और कलावा नहीं पहन सकते। वहीं, हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इसी कथित भेदभाव को लेकर विवाद तेज हुआ।
एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इस डॉक्यूमेंट का स्क्रीनशॉट साझा किया। उन्होंने कंपनी से पूछा कि जब हिजाब को अनुमति है तो बिंदी और कलावा पर रोक क्यों? इसके बाद सोशल मीडिया पर कंपनी के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
ग्रूमिंग गाइड ने बढ़ाई आग
विवाद यहीं नहीं रुका। एक अलग ग्रूमिंग गाइड भी वायरल हुई। इसमें दावा था कि महिला कर्मचारी बिंदी और क्लचर नहीं लगा सकती हैं। कलावा या रिस्ट बैंड पर भी रोक बताई गई। जबकि हिजाब और पगड़ी के लिए शर्तें रखी गई थीं।
इस कथित गाइड ने विवाद को और गहरा कर दिया। विरोध में कुछ जगहों पर लेंसकार्ट शोरूम के बाहर कर्मचारियों ने तिलक लगाकर और मंत्रोच्चार के साथ कलावा बांधकर प्रतीकात्मक विरोध किया।
सीईओ (CEO) ने दी सफाई
विवाद के बढ़ने पर लेंसकार्ट सीईओ पीयूष बंसल ने सामने आकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि कंपनी सभी धर्मों का सम्मान करती है। कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी आजादी है। हालांकि विरोध कर रहे संगठन इस सफाई से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं।
FAQ
- लेंसकार्ट तिलक-मंगलसूत्र विवाद क्या है?
सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट का एक कथित ड्रेस कोड दस्तावेज वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि कंपनी के कर्मचारी तिलक, मंगलसूत्र, सिंदूर, बिंदी और कलावा नहीं पहन सकते। वहीं हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई बताई गई। इस कथित भेदभाव पर सोशल मीडिया और धार्मिक संगठनों ने तीखा विरोध किया। बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने भी कंपनी को सार्वजनिक चेतावनी दी।
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