लोधी शौर्य यात्रा में समानता की लड़ाई पर गरजीं उमा भारती, कहा- आरक्षण कोई नहीं छीन सकता
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल के जंबूरी मैदान में 28 अप्रैल को लोधी समाज की शौर्य यात्रा हुई।
- उमा भारती ने कहा, आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता।
- CM मोहन यादव ने राजा हिरदे शाह का जीवन पाठ्यक्रम में शामिल करने का वादा किया।
- विधायक प्रीतम लोधी ने भारत में कम से कम एक लोधी CM की मांग उठाई।
- इस बयान की तुलना 2016 के शिवराज के उसी बयान से हो रही है, जो विवादास्पद रहा था।
लोधी शौर्य यात्रा: भोपाल में जुटा समाज
28 अप्रैल का दिन भोपाल में इतिहास और राजनीति दोनों का साक्षी बना। राजधानी के जंबूरी मैदान में लोधी समाज की बड़ी शौर्य यात्रा हुई। यह दिन क्रांतिवीर राजा हिरदे शाह लोधी का बलिदान दिवस है। 28 अप्रैल 1858 को अंग्रेजों ने उन्हें फांसी दी थी।
कार्यक्रम में सीएम मोहन यादव मुख्य अतिथि रहे। पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी मंच पर मौजूद रहीं। प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग जंबूरी मैदान पहुंचे।
उमा का आरक्षण पर बड़ा बयान
कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उमा भारती के बयान की रही। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि जब तक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस (Chief Justice) के परिवार के लोग सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज लंबे समय तक जातिगत आधार पर बंटा रहा। आर्थिक असमानताएं गहरी रहीं। ऐसे में आरक्षण उस विषमता को कम करने का बड़ा प्रयास है। बराबरी सिर्फ कानून से नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव से आएगी। उमा ने यह भी कहा कि लोधी समाज की संख्या काफी अधिक है। उनकी भागीदारी से सरकारें बनती हैं। यह समाज सरकार बनाने की ताकत रखता है।
उमा भारती के इस बयान की तुलना तुरंत एक पुराने बयान से होने लगी। 12 जून 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में एक सम्मेलन में कहा था कि हमारे रहते हुए कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता। उस बयान के बाद सवर्ण समाज नाराज हो गया था। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा (Bharatiya Janata Party) को हार का सामना करना पड़ा।
आजादी की तीसरी लड़ाई का आह्वान
उमा भारती ने शौर्य यात्रा में आजादी की तीसरी लड़ाई का जिक्र किया। उनके मुताबिक पहली लड़ाई अंग्रेजों से आजादी के लिए थी। दूसरी लड़ाई के बारे में उन्होंने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक अमेरिकी अखबार के संपादक ने लिखा था कि अंग्रेज तो चले गए, लेकिन कुछ 'काले अंग्रेज' छोड़ गए।
उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति ने राम मंदिर के लिए अपनी कुर्सी छोड़ी और दूसरे ने तिरंगे के लिए कुर्सी छोड़ी। इसके बाद यह भ्रम टूटा कि भाजपा पिछड़ा विरोधी पार्टी है। अब आजादी की तीसरी लड़ाई समानता के अधिकार के लिए लड़ी जानी चाहिए।
CM मोहन यादव का बड़ा वादा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच से राजा हिरदे शाह के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि राजा हिरदे शाह ने बुंदेला-गोंड समाज को एकजुट कर अपनी अलग पहचान बनाई और अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी।
CM ने एक बड़ा वादा भी किया। उन्होंने कहा कि राजा हिरदे शाह के जीवन पर शोध कराया जाएगा। शिक्षा विभाग के माध्यम से उनके संघर्षमय जीवन को पाठ्यक्रम में शामिल करने की दिशा में काम किया जाएगा। यह घोषणा समाज के लिए बड़ी मानी जा रही है।
प्रीतम की मांग: एक लोधी CM जरूर बने
पिछोर विधायक प्रीतम लोधी ने मंच से एक सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब हेमा मालिनी के धर्मेंद्र को भारत रत्न मिल सकता है, तो लोधी समाज के कल्याण सिंह को क्यों नहीं मिल सकता।
प्रीतम ने युवाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज की जवानी ताश के पत्तों और शराब की दुकानों में मिलती है। जब वे जवान थे, तब उनके समाज के दो-दो मुख्यमंत्री थे। आज वह संख्या शून्य है। भारत में कम से कम एक लोधी मुख्यमंत्री जरूर होना चाहिए।
राजा हिरदेशाह की कहानी
1842 में, यानी 1857 की क्रांति से 15 साल पहले ही इस धरती पर विद्रोह की आग जल चुकी थी। हिरापुर के राजा हिरदे शाह लोधी ने बुंदेला विद्रोह की अगुवाई की। अंग्रेजों ने उनकी गिरफ्तारी पर दस हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। दिसंबर 1843 में शाहगढ़ के बखतबली बुंदेला ने धोखे से उन्हें पकड़वा दिया। नौ महीने चुनार जेल में रखा गया। 1857 के विद्रोह में उनके पुत्र और भाई को फांसी दी गई। और अंततः 28 अप्रैल 1858 को राजा हिरदे शाह खुद भी शहीद हो गए।
सियासी संदेश भी था इस मंच में
यह आयोजन सिर्फ इतिहास को याद करने का मंच नहीं रहा। मध्यप्रदेश की करीब 25 विधानसभा सीटों पर लोधी समाज का प्रभाव माना जाता है। ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र में यह समाज चुनावी नतीजे बदलने की ताकत रखता है। उमा भारती और प्रहलाद पटेल का एक साथ मंच साझा करना राजनीतिक नजरिए से भी खास माना गया।
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह खबर कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। पहला, राजा हिरदे शाह लोधी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों को इतिहास में उचित स्थान दिलाने की मांग संवैधानिक भावना के अनुरूप है। भारतीय संविधान की धारा 51-क में नागरिकों को अपनी साझा विरासत का सम्मान करने का कर्तव्य दिया गया है। दूसरा, उमा भारती का आरक्षण पर बयान सामाजिक न्याय की बहस को एक बार फिर केंद्र में लाता है, जो लोकतांत्रिक विमर्श का जरूरी हिस्सा है। तीसरा, CM का पाठ्यक्रम में हिरदे शाह को शामिल करने का वादा शैक्षणिक नीति को प्रभावित कर सकता है, जो समाज के हर तबके के लिए प्रासंगिक है। सामाजिक और डिजिटल नैतिकता के लिहाज से यह जरूरी है कि हाशिए पर रहे समुदायों की आवाज और उनके इतिहास को ईमानदारी से सामने लाया जाए। यह खबर उसी दिशा में एक कदम है।
3 जरूरी FAQ
सवाल 1: उमा भारती ने लोधी शौर्य यात्रा में आरक्षण पर क्या कहा?
जवाब: भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित लोधी शौर्य यात्रा में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि जब तक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और चीफ जस्टिस के परिवार के लोग सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में जातिगत और आर्थिक असमानता गहरी रही है और आरक्षण उस विषमता को कम करने का जरूरी उपाय है। उन्होंने यह भी कहा कि असली बराबरी सिर्फ कानून से नहीं, व्यवहार में बदलाव से आएगी।
सवाल 2: CM मोहन यादव ने राजा हिरदे शाह लोधी को लेकर क्या घोषणा की?
जवाब: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शौर्य यात्रा के मंच से घोषणा की कि राजा हिरदे शाह के जीवन पर शोध कराया जाएगा। इसके साथ ही शिक्षा विभाग के माध्यम से उनके संघर्षमय जीवन को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की दिशा में काम किया जाएगा। CM ने कहा कि राजा हिरदे शाह ने बुंदेला-गोंड समाज को एकजुट कर अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी और उनका योगदान नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
सवाल 3: शिवराज के 2016 के आरक्षण बयान से उमा भारती के बयान की तुलना क्यों हो रही है?
जवाब: 12 जून 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में कहा था कि उनके रहते कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता। उस बयान के बाद सवर्ण समाज नाराज हो गया था, सपाक्स संघ बना और करणी सेना ने आंदोलन छेड़ा। भाजपा के जानकारों ने माना था कि 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार में उस बयान की भी भूमिका रही। अब उमा भारती ने लगभग उसी भाव में बयान दिया है, इसलिए राजनीतिक गलियारों में इस पर चर्चा शुरू हो गई है।
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