लोक सेवा गारंटी में बदलाव: समय पर काम नहीं तो अफसरों पर लगेगी 5000 तक पेनल्टी
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश सरकार ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम में संशोधन किया है।
- संशोधन 9 जुलाई से लागू हो गया है।
- समयसीमा गुजरने के 16वें दिन अपील अधिकारी खुद संज्ञान लेंगे।
- देरी करने वाले अधिकारियों पर 500 से 5000 रुपए तक पेनल्टी लगेगी।
- अभी 32 विभागों की 665 सेवाएं इस कानून के दायरे में हैं।
क्या हुआ बड़ा बदलाव
मध्य प्रदेश सरकार ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम में बड़ा बदलाव किया है। अब तय समयसीमा में सेवा नहीं देने वाले अधिकारियों की नकेल कसी जाएगी। सरकार ने इसके लिए कानून में संशोधन किया है। यह संशोधन गजट नोटिफिकेशन के जरिए किया गया है। नया नियम 09 जुलाई से पूरे प्रदेश में लागू हो गया है। इससे लोक सेवा गारंटी से जुड़े मामलों में लापरवाही पर सीधी कार्रवाई होगी।
कैसे होगी कार्रवाई
अब तक नागरिकों को खुद अपील करनी पड़ती थी। सेवा न मिलने पर आवेदक को अलग से शिकायत दर्ज करानी होती थी। नए नियम में यह प्रक्रिया अपने आप शुरू हो जाएगी। समयसीमा गुजरने के बाद 16वें दिन कार्रवाई शुरू होगी। प्रथम और द्वितीय अपील अधिकारी हर लंबित मामले पर नजर रखेंगे। वे खुद संज्ञान लेकर जरूरी आदेश पारित करेंगे। इसके लिए आवेदक की अपील का इंतजार नहीं किया जाएगा। सरकार पोर्टल में भी इस कार्रवाई के लिए जरूरी बदलाव कर रही है। पोर्टल पर अपील आए या न आए, हर देरी वाले मामले की समीक्षा होगी।
अपील की पूरी प्रक्रिया
नागरिकों के लिए अपील की प्रक्रिया भी तय है। यदि किसी को समयसीमा में सेवा नहीं मिलती तो वह अपील कर सकता है। आवेदन नामंजूर होने पर भी यही अधिकार मिलता है। इसके लिए 30 दिन के भीतर प्रथम अपील अधिकारी के पास जाना होता है।
प्रथम अपील अधिकारी के आदेश से असंतुष्ट होने पर आगे भी रास्ता है। इसमें 60 दिन के भीतर द्वितीय अपील प्राधिकारी के सामने अपील की जा सकती है। इन दोनों अपील अधिकारियों को सिविल न्यायालय जैसी शक्तियां दी गई हैं। इससे मामलों में निष्पक्ष और तेज सुनवाई हो सकेगी।
कितनी लगेगी पेनल्टी
मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम में पेनल्टी का प्रावधान भी साफ किया गया है। अगर अधिकारी बिना पर्याप्त कारण सेवा देने में असफल रहता है तो जुर्माना लगेगा। यह एकमुश्त पेनल्टी 500 रुपए से कम नहीं होगी। अधिकतम पेनल्टी की सीमा पांच हजार रुपए तय की गई है।
यदि अधिकारी बिना कारण सिर्फ देरी करता है तो अलग नियम लागू होगा। ऐसे मामलों में 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से पेनल्टी लगेगी। यह पेनल्टी भी अधिकतम पांच हजार रुपए तक ही सीमित रहेगी। हालांकि पेनल्टी लगाने से पहले अधिकारी को सुनवाई का मौका जरूर मिलेगा। यह प्रक्रिया नियमों के मुताबिक पूरी पारदर्शिता से चलाई जाएगी।
अभी कौन सी सेवाएं शामिल
मध्य प्रदेश ने साल 2010 में यह कानून सबसे पहले लागू किया था। यह देश का पहला सेवा का अधिकार कानून माना जाता है। इसके तहत नागरिकों को तय समय में सार्वजनिक सेवाएं मिलने की गारंटी है। अभी इस कानून के दायरे में 32 सरकारी विभाग आते हैं।
इन विभागों की कुल 665 प्रमुख सेवाएं इसमें शामिल हैं। इनमें जाति, जन्म, विवाह और मूल निवासी प्रमाण पत्र जैसी सेवाएं आती हैं। पीने के पानी का कनेक्शन भी इसी दायरे में आता है। राशन कार्ड और भूमि रिकॉर्ड की प्रतियां देना भी इसमें शामिल है। ये सभी सेवाएं फिलहाल ऑनलाइन भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
एआई से मिलेगी मदद
अब इन सेवाओं को और बेहतर बनाने की तैयारी भी चल रही है। सरकार इसके लिए एआई (Artificial Intelligence) की मदद लेने पर काम कर रही है। इससे सेवाओं में देरी की पहचान जल्दी हो सकेगी। साथ ही निगरानी व्यवस्था भी पहले से ज्यादा मजबूत होगी।
अधिकारियों का कहना है कि इससे आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकारी दफ्तरों में लंबित मामलों की संख्या भी घटने की उम्मीद है। कुल मिलाकर यह बदलाव नागरिकों के हक में बड़ा कदम माना जा रहा है।
नागरिकों को कैसे मिलेगा फायदा
अब तक की व्यवस्था में एक बड़ी कमी सामने आती रही थी। कई बार आवेदक को पता ही नहीं चलता था कि अपील कैसे करें। जानकारी और समय की कमी से लोग शिकायत तक नहीं कर पाते थे। इस वजह से कई मामले बिना कार्रवाई के लंबित रह जाते थे।
नए नियम में यह जिम्मेदारी अब सीधे अपील अधिकारियों पर आ गई है। उन्हें हर लंबित मामले पर खुद नजर रखनी होगी। इससे उन नागरिकों को भी फायदा मिलेगा जो शिकायत नहीं कर पाते थे। खासकर ग्रामीण इलाकों के लोगों को इसका ज्यादा लाभ मिल सकता है। वहां जानकारी और संसाधनों की कमी अक्सर बड़ी बाधा बनती है।
बढ़ेगी अधिकारियों की जवाबदेही
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इससे कामकाज में जवाबदेही बढ़ेगी। पहले देरी होने पर सीधा जुर्माने का डर नहीं होता था। अब हर देरी की कीमत अधिकारी को खुद चुकानी पड़ सकती है। इससे फाइलें जल्दी निपटाने का दबाव भी बढ़ेगा। सरकार का मानना है कि यह कदम पारदर्शिता को बढ़ावा देगा। आने वाले महीनों में इसका असर सरकारी दफ्तरों में दिखने लगेगा।
नागरिकों के लिए यह जानना जरूरी है कि शिकायत का रास्ता अब आसान होगा। पोर्टल पर हर मामले की जानकारी दर्ज रहेगी। इससे देरी का रिकॉर्ड भी आसानी से देखा जा सकेगा। जानकारों का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था से भरोसा भी बढ़ेगा। सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को समय पर सेवा मिले।
FAQ
- मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम में क्या नया संशोधन हुआ है?
अब समयसीमा गुजरने के 16वें दिन प्रथम और द्वितीय अपील अधिकारी खुद संज्ञान लेंगे। वे नागरिक की अपील का इंतजार किए बिना हर लंबित मामले पर कार्रवाई करेंगे। यह संशोधन 9 जुलाई से पूरे मध्य प्रदेश में लागू हो गया है। - अभी लोक सेवा गारंटी अधिनियम में कौन सी सेवाएं शामिल हैं?
फिलहाल इस कानून के दायरे में 32 सरकारी विभागों की 665 सेवाएं शामिल हैं। इनमें जाति, जन्म, विवाह, मूल निवासी प्रमाण पत्र, पानी का कनेक्शन, राशन कार्ड और भूमि रिकॉर्ड जैसी सेवाएं आती हैं। - समय पर सेवा न देने वाले अधिकारी पर कितना जुर्माना लगेगा?
बिना पर्याप्त कारण सेवा देने में असफल रहने पर 500 से 5000 रुपए तक एकमुश्त पेनल्टी लगेगी। सिर्फ देरी करने पर 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगेगा, जो अधिकतम 5 हजार रुपए तक होगा।
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