रिश्वत कांड के बाद एमपी लोकायुक्त में बड़ा एक्शन, दो डीएसपी नपे

Aman Vaishnav | Jun 05, 2026, 10:16 IST
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भोपाल में लोकायुक्त संगठन में घूसखोरी के मामले में दो डीएसपी मंजू सिंह और बीएम द्विवेदी को हटा दिया गया है। साथ ही इनके सस्पेंशन की अनुशंसा भी की गई है।

डीएसपी तक पहुंची घूसखोरी की आंच

भोपाल में लोकायुक्त संगठन के भ्रष्टाचार का मामला अब डीएसपी स्तर तक पहुंच गया है। गुरुवार, 04 जून को लोकायुक्त के डीजीओ जगेश देशमुख ने डीएसपी मंजू सिंह और डीएसपी बीएम द्विवेदी को निलंबित करने का प्रस्ताव डीजीपी कैलाश मकवाना को भेजा। साथ ही इन दोनों डीएसपी को लोकायुक्त से हटाकर पीएचक्यू भेज दिया है।



स्टिंग में क्या हुआ खुलासा

एक मीडिया हाउस ने लोकायुक्त संगठन में चल रहे घूस के खेल का स्टिंग ऑपरेशन किया था। इस दौरान रिपोर्टर आरोपियों के रिश्तेदार के रूप में पहचान बनाकर सामने आए।



करीब डेढ़ महीने तक लोकायुक्त के कर्मचारियों और अफसरों से संपर्क किया गया। इसमें सामने आया कि ट्रैप मामलों में फंसे सरकारी कर्मचारियों की मदद के नाम पर पैसे वसूले जा रहे थे।



क्लीन चिट और वॉयस सैंपल के नाम पर वसूली

स्टिंग में यह उजागर हुआ है कि आरोपी कर्मचारी तीन तरह के काम के नाम पर रकम मांगते थे।



  • पहला केस की क्लीन चिट।
  • दूसरा खात्मा रिपोर्ट।
  • तीसरा वॉइस सैंपल (आवाज के नमूने) की प्रक्रिया को प्रभावित करना।

एक मामले में तीन लाख रुपए में क्लीन चिट और पांच लाख रुपए में वॉइस सैंपल मैनेज करने की बात सामने आई थी। यानी कुल आठ लाख रुपए की यह डील स्टिंग में रिकॉर्ड हो गई।



पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

इसी मामले में इससे पहले तीन कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका था। बुधवार, 03 जून को सफाई कर्मी रामलाल कुर्मी, दरोगा वैद्यनाथ ठाकुर और कॉन्स्टेबल गौरव साहू को निलंबित किया गया था।



इसके अलावा कार्यालय बंटू बिहारी पांडेय और वाहन चालक अमित विश्वकर्मा पर भी कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा जा चुका है।



लोकायुक्त और उसका काम

बता दें कि लोकायुक्त मध्यप्रदेश में सरकारी भ्रष्टाचार की जांच करने वाली स्वतंत्र संस्था है। यह सरकारी कर्मचारियों पर घूसखोरी के मामलों में ट्रैप (जाल बिछाकर पकड़ना) की कार्रवाई करती है।



वहीं इस मामले में खुद लोकायुक्त के कर्मचारी और अफसर ही भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए। यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि जो संस्था भ्रष्टाचार रोकने के लिए है,उसी में घूस का खेल चल रहा था।



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