मध्य प्रदेश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी ने बढ़ाया टेंशन, गैस की कालाबाजारी रोकने सरकार सख्त
BHOPAL. मध्यप्रदेश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी ने सरकार का टेंशन बढ़ा दिया है। खाघ विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए है कि जहां भी शिकायत मिले जमाखोरों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
मिडिल ईस्ट (अमेरिका- इजराइल, ईरान) में चल रहे युद्ध के कारण, LPG की कमी अब हमारे किचन तक पहुंच गई है। पिछले तीन दिन से प्रदेश में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से बंद हो गई है। घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी में भी अब 5 से 7 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है।
ऑयल कंपनियों का कहना है कि एमपी में फिलहाल सिर्फ 15% गैस उपलब्ध है। ये सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं और घरों के लिए ही इस्तेमाल की जा सकेगी। ऐसे में गुरुवार 12 मार्च से पूरे प्रदेश में गैस की भारी किल्लत हो सकती है।
हालांकि, सरकार का दावा है कि मध्य प्रदेश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति अभी पूरी तरह से सामान्य है। राज्य में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी का वितरण भी बिना किसी रुकावट के हो रहा है। राज्य सरकार लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि इन सभी गैसों की पर्याप्त मात्रा मौजूद रहे ताकि किसी भी तरह की कमी का सामना न करना पड़े।
शैक्षणिक और चिकित्सकीय संस्थानों को मिली छूट
खाद्य आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने बताया कि शैक्षिक और चिकित्सकीय संस्थानों को एलपीजी के वाणिज्यिक उपयोग में छूट दी गई है। यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि इन संस्थानों में शैक्षिक गतिविधियों और चिकित्सकीय सुविधाओं में कोई रुकावट न आए। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और मरीजों का इलाज निर्बाध रूप से चलता रहेगा।
जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त कदम
एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे इस मुद्दे पर सख्त कार्रवाई करें और एलपीजी की अनावश्यक जमाखोरी को पूरी तरह से रोका जाए। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गैस की कीमतों में कोई अनावश्यक वृद्धि न हो और आम लोगों को उचित दर पर गैस मिले।
एलपीजी के वैकल्पिक साधनों पर जोर
प्रदेश सरकार ने एलपीजी के वैकल्पिक साधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके तहत ऐसी गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिनमें एलपीजी का अत्यधिक उपयोग होता है। सरकार की कोशिश है कि लोग एलपीजी का विकल्प चुनें और इसके अधिक इस्तेमाल को नियंत्रित किया जाए, ताकि संकट की स्थिति में लोगों को समस्या न हो।
भोपाल- इंदौर मेट्रो को कमर्शियल सिलेंडर नहीं
अब ऑयल कंपनियां कमर्शियल सिलेंडर सिर्फ अस्पतालों, सेना-पुलिस की कैंटीन, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट की कैंटीन, और बस स्टैंड के भोजनालयों को ही देंगी। हालांकि खाद्य विभाग को इन कंपनियों को जरूरत के हिसाब से लिस्ट भेजनी होगी।
वहीं होटल, मैरिज गार्डन और सराफा कारीगरों को साथ ही भोपाल और इंदौर मेट्रो को कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलेंगे। इन दोनों शहरों में मेट्रो का काम चल रहा है। इसमें वेल्डिंग के लिए एलपीजी का इस्तेमाल किया जाता है।
48 घंटे ही काम चल सकता है: भोपाल होटल एसोसिएशन
भोपाल होटल एसोसिएशन के तेजकुल पाल सिंह पाली ने कहा कि राजधानी में डेढ़ हजार से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट हैं। यहां रोज 2 से 2.5 हजार सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं।
जिन होटल और रेस्टोरेंट में स्टॉक है वहां 48 घंटे तक काम चल सकता है। इसके बाद ये होटल और रेस्टोरेंट बंद हो जाएंगे। उन्होंने सरकार से अपील की है कि होटल, रेस्टोरेंट और रेहड़ी वालों को कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई दी जाए। वहीं सरकार ने सिर्फ इमरजेंसी सेवाओं के लिए गैस देने की बात कही है।
ये खबरें भी पढ़िए...
गैस सिलेंडर को लेकर सरकार के मैसेज नही आ रहे काम, सिलेंडर के लिए सड़क पर शोर, सर्वर क्रैश
एमपी न्यूज: इंदौर में घरेलू गैस सिलेंडर की दस गुना अधिक बुकिंग, प्रशासन के छापे में 105 सिलेंडर जब्त
ईरान-इजराइल जंग का 12वां दिन: टेक कंपनियां, तेल सप्लाई और पानी पर खतरा, भारत क्यों चिंतित?
खाड़ी युद्ध का असर जबलपुर तक, गैस सप्लाई बंद, होटल-रेस्टोरेंट पर संकट