10 मेडिकल कॉलेज पर 45 हजार करोड़ खर्च, फिर भी जरूरी दवा नहीं: रिपोर्ट

Raj Singh | Dec 19, 2024, 13:12 IST
HEALTH
मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर समस्याओं को उजागर किया है।

मध्य प्रदेश विधानसभा में बुधवार को पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर समस्याओं को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 10 मेडिकल कॉलेजों में 34 हजार 643 मरीजों को आईसीयू में भर्ती किया गया, जिनमें से 48.64% मरीज श्वास और हृदय रोगों से संबंधित थे। इनमें से 3 हजार 25 मरीजों की मौत हुई।



5 सालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर 45 हजार 324 करोड़ रुपए खर्च

201 मशीनें खराब

रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया कि 14 स्वास्थ्य संस्थाओं के सीएमएचओ स्टोर में 1 करोड़ 20 लाख रुपए कीमत की 201 मशीनें खराब पाई गईं, जिन्हें 9 से 8 महीने तक किसी भी वार्ड में इस्तेमाल नहीं किया गया। इसके अलावा, 263 टेंडर में से 30 टेंडर में 6 महीने से 1 साल तक की देरी देखने को मिली।



कैग की रिपोर्ट में कोरोना काल (2017-2022) का भी जिक्र है, जिसमें दवाओं की खरीदारी योजना में 13 महीने की देरी से जानकारी दी गई।



FAQ

  1. कैग की रिपोर्ट में स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्या गंभीर समस्याएं सामने आईं?
    कैग की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर समस्याएं उजागर हुईं, जैसे कि 10 मेडिकल कॉलेजों में 34,643 आईसीयू मरीजों में से 48.64% श्वास और हृदय रोग से संबंधित थे, जिनमें से 3,025 मरीजों की मौत हुई।
  2. पिछले पांच सालों में स्वास्थ्य पर कितनी राशि खर्च हुई थी और दवाओं की कमी का क्या कारण था?
    रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच सालों में स्वास्थ्य पर 45,324 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन श्वास और हृदय रोगों के इलाज के लिए जरूरी 16 दवाओं में से 11 मरीजों को नहीं मिलीं। इसके अलावा, कार्डियोवैस्कुलर रोगों के इलाज के लिए 26 अहम दवाएं भी उपलब्ध नहीं थीं।
  3. किस प्रकार की दवाओं की कमी पाई गई और क्या इसका प्रभाव हुआ?
    रिपोर्ट में बताया गया कि 448 महत्वपूर्ण दवाओं का स्टॉक नहीं था, और कई अस्पतालों में 1.11 करोड़ रुपये की 263 दवाएं एक्सपायर हो गईं, जिससे मरीजों को जरूरी इलाज नहीं मिल सका।
  4. कैग की रिपोर्ट में अन्य किन मुद्दों का जिक्र किया गया?
    रिपोर्ट में 14 स्वास्थ्य संस्थाओं में 1 करोड़ 20 लाख रुपये की 201 खराब मशीनों का जिक्र किया गया, जो 8 से 9 महीने तक किसी भी वार्ड में उपयोग नहीं की गईं। साथ ही, 263 टेंडरों में से 30 में 6 महीने से 1 साल तक की देरी पाई गई।

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