एमपी के 55 जिलों को जोड़ेंगे छह नए कॉरिडोर, 36 हजार करोड़ होंगे खर्च

Sanjay Dhiman | Jun 16, 2026, 18:07 IST
Photograph: (the sootr)
एमपी के 55 जिलों की बदलेगी तस्वीर क्योंकि सूबे में 6 नए कॉरिडोर बन रहे हैं। जानिए कैसे इस भारी निवेश से हर जिले का भाग्य पूरी तरह चमक जाएगा।

मध्यप्रदेश में 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर बनाए जाएंगे। ये करीब 3,300 किलोमीटर लंबे होंगे। इन पर 36,483 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सभी 55 जिलों को इनसे फायदा मिलेगा। 2028 तक इनका निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है।



मध्यप्रदेश को मिलेगी नई रफ्तार

मध्यप्रदेश की सड़कों पर एक बड़ा बदलाव होने वाला है। राज्य सरकार एक ऐसी महापरियोजना पर काम कर रही है जो पूरे सूबे की तस्वीर बदल देगी। 6 नए इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी आर्थिक गलियारे बनाए जाएंगे। ये कॉरिडोर करीब 3,300 किलोमीटर लंबे होंगे।



इस परियोजना पर लगभग 36,483 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। निर्माण का काम साल 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इससे प्रदेश के सभी 55 जिलों को सीधा फायदा होगा।



6 कॉरिडोर कौन से हैं

1. मालवा-निमाड़ विकासपथ

यह कॉरिडोर 450 किलोमीटर लंबा होगा। इस पर 7,972 करोड़ रुपये खर्च होंगे। गरोठ से उज्जैन के बीच 136 किमी और इंदौर से बुरहानपुर के बीच 215 किमी का रूट इसमें शामिल है। 2027 तक पूरा होने वाला यह मार्ग मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खंडवा और बुरहानपुर को जोड़ेगा।



2. विंध्य एक्सप्रेस-वे

यह कॉरिडोर 676 किलोमीटर लंबा होगा। इस पर 3,809 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह राजधानी भोपाल से शुरू होकर 10 जिलों से गुजरेगा। सागर, दमोह, कटनी और रीवा जैसे शहर इससे जुड़ेंगे। भोपाल से रीवा और सिंगरौली का सफर बेहद आसान हो जाएगा।



3. बुंदेलखंड विकासपथ

यह कॉरिडोर 330 किलोमीटर लंबा होगा। इस पर 3,357 करोड़ रुपये खर्च होंगे। भोपाल, रायसेन, विदिशा, सागर और छतरपुर आपस में जुड़ेंगे। पिछड़े बुंदेलखंड क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार दोनों को रफ्तार मिलेगी।



4. अटल प्रगतिपथ

यह कॉरिडोर 299 किलोमीटर लंबा होगा। यह दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से शुरू होकर बुंदेलखंड कॉरिडोर से मिलेगा। श्योपुर, मुरैना और भिंड जैसे चंबल के जिलों को इससे सीधा फायदा होगा। यहां नए उद्योग लगाने के रास्ते खुलेंगे।



5. नर्मदा प्रगतिपथ

यह इस पूरी योजना का सबसे लंबा कॉरिडोर है। इसकी लंबाई 867 किलोमीटर होगी। झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर और डिंडौरी इससे जुड़ेंगे। यह कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर को मध्यप्रदेश के रास्ते सीधे गुजरात की सीमा से जोड़ेगा।



6. मध्यभारत विकासपथ

यह कॉरिडोर 746 किलोमीटर लंबा होगा। यह प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सामने लाने के लिए बनाया गया है। भीमबैठका, भोजपुर, सांची, उदयगिरी, चंदेरी, ओरछा और दतिया जैसे पर्यटन स्थल इससे जुड़ेंगे। मुरैना से बैतुल तक सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।



क्या होगा फायदा

इन कॉरिडोर से माल ढुलाई सस्ती और तेज होगी। किसानों की उपज बाजार तक जल्दी पहुंचेगी। पर्यटन स्थलों तक जाना आसान होगा। नए उद्योग लगेंगे और रोजगार बढ़ेगा। विंध्य, बुंदेलखंड, मालवा-निमाड़ और नर्मदा अंचल जैसे पिछड़े इलाकों को खास फायदा मिलेगा।



2028 तक पूरा होगा काम

सरकार का लक्ष्य है कि 2028 तक इन सभी कॉरिडोर का निर्माण पूरा कर लिया जाए। मालवा-निमाड़ विकासपथ का काम 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। बाकी कॉरिडोर पर भी तेजी से काम चल रहा है।



कुल मिलाकर यह परियोजना मध्यप्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर को एक नई पहचान देगी। प्रदेश के कोने-कोने को जोड़ने वाले इन एक्सप्रेस-वे से हर जिले के लोगों की जिंदगी आसान होगी।



यह खबरें भी पढ़ें..



इंदौर मेट्रो का नया रूट: 21 जून से रेडिसन चौराहे तक शुरू होगा सुपर कॉरिडोर–2



एमपी में नए मेगा हाईवे प्रोजेक्ट: सिंहस्थ और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर सरकार का बड़ा दांव



इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को झटका, मुआवजा नहीं लेने वाले किसान की जमीन लेने पर लगी रोक



भोपाल-नागपुर हाईवे के चौड़ीकरण का फैसला अटका, टाइगर कॉरिडोर की शर्तों में फंसा NH-46



Tags:
  • बुंदेलखंड
  • राजधानी भोपाल
  • पर्यटन
  • राज्य सरकार
  • इकोनॉमिक कॉरिडोर