एमपी में आयुष्मान कार्ड फर्जीवाड़ा, पैसे देकर कोई भी बन रहा पात्र, एक ही आईडी पर 54 लोग दर्ज

Aman Vaishnav | Apr 29, 2026, 08:37 IST
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मध्यप्रदेश में आयुष्मान कार्ड बनाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। एजेंट 10-15 हजार रुपए लेकर अपात्र लोगों को भी पात्र बना रहे हैं। एक ही आईडी पर दर्जनों अनजान लोगों को जोड़ा जा रहा है।

गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना PMJAY में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। मध्य प्रदेश में सक्रिय एजेंटों ने सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर इसे अवैध कमाई का जरिया बना लिया है।



चौंकाने वाली बात यह है कि जो लोग इस योजना के लिए अपात्र हैं, उनके भी फर्जी तरीके से आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके लिए सरकारी समग्र आईडी में हेरफेर की जा रही है।



यह काम एजेंट बड़े आराम से कर रहे हैं। वे 15-20 हजार रुपए लेकर एक घंटे के अंदर यह कार्ड तैयार कर देते हैं। और ये कार्ड सिर्फ मध्य प्रदेश में नहीं बल्कि किसी भी राज्य के रहने वाले के लिए बन सकते हैं।



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इंदौर में 54 लोगों का बना कार्ड

इंदौर में एक समग्र आईडी पर 54 लोगों को जोड़ने का मामला सामने आया है। यह आईडी सरकारी योजनाओं में पात्रता तय करती है। इसमें ही हेरफेर कर लोगों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।



बस एक फोटो दो कार्ड बनवाओ

भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार भोपाल में काम करने वाले एक एजेंट से 57 हजार रुपए देकर 8 आयुष्मान कार्ड बनवाए। इनमें एक ऐसा परिवार भी था जो आयुष्मान योजना के लिए अपात्र था उसमें 5 सदस्य थे।



इसके अलावा यूपी का भी एक व्यक्ति शामिल था। इस पूरे काम में ओटीपी जैसी सुरक्षा प्रणाली को भी नजरअंदाज कर दिया गया।



हैरानी की बात है कि भोपाल के ही एक एजेंट ने दावा किया कि सिस्टम हमारे हाथ में है। बस एक फोटो और आधार दो, बाकी सब हम बदल देते हैं। चाहे उम्र हो, पता हो या फिर पात्रता।



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एक ही परीवार में 54 लोग, खान मिश्रा एक साथ

इंदौर के वार्ड-1, जोन-16 की समग्र परिवार आईडी में एक हैरान करने वाली गड़बड़ी सामने आई है। इस आईडी में एक ही परिवार के 54 लोग दर्ज हैं। इनकी उम्र 4 से 87 साल तक है।



इनमें जैन, खान, मिश्रा, पाटीदार, इब्राहिम, पांडे, राठौर और कुर्मी जैसे अलग-अलग सरनेम शामिल हैं। मतलब एक ही आईडी में अलग-अलग धर्म और समुदाय के लोग जोड़ दिए गए हैं।



इस आईडी में नाम जोड़ने के लिए धार के कुक्षी, छतरपुर के लौंडी और इंदौर के ऑपरेटरों ने अलग-अलग समय पर लॉग-इन किया गया। इस आईडी में जो पता 45-सी, कालानीनगर दिया गया है, असल में वहां कोई ऐसा मकान ही नहीं पाया गया।



45 नंबर के मकान पर रहने वाले पूरणमल झगरावत ने बताया कि वे 1983 से वहां रह रहे हैं। इस पते पर कभी प्रदीप कुमार जायसवाल या उनके जैसे कोई लोग नहीं रहे।



उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कई सालों से पोस्टमैन और कोरियर वाले अलग-अलग नामों के साथ इसी पते की जांच करने आते रहते हैं।



एक घंटे में बनाए पांच फर्जी आयुष्मान कार्ड

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक अपात्र परिवार की समग्र आईडी पर पूरी प्रक्रिया करवाई गई। एजेंट ने परिवार का समग्र कार्ड, आधार और फोटो लेकर काम शुरू किया। पहले 2019 की समग्र आईडी को बदलकर 2014 की दिखाया गया, ताकि उसे पात्रता की श्रेणी में लाया जा सके।



इसके बाद शिवपुरी की इस आईडी को सागर नगर निगम से अप्रूव करवा लिया गया। यह सब काम सतना के एक नेटवर्क के जरिए हुआ था।



महज एक घंटे में परिवार के पांचों सदस्यों के आयुष्मान कार्ड तैयार कर दिए गए थे। शुरुआत में तीन हजार रुपए एडवांस लिए गए और कुल 18 हजार रुपए में यह सौदा पूरा हुआ।



जांच में यह भी पता चला कि एजेंट सुरेश ने यह सब काम राजेश नाम के एक व्यक्ति से करवाया था। राजेश नाम का एक एमपी ऑनलाइन सेंटर संचालक पोर्टल पर लॉगिन करके कार्ड डाउनलोड कर रहा था। ओटीपी दोनों यानी परिवार और ऑपरेटर के पास पहुंच रहा था।



ऐसे चलता है पूरा सिस्टम

नगर निगम, एजेंट और आयुष्मान मित्रों की मिलीभगत से यह पूरी प्रक्रिया हो रही है। पहले तो ओटीपी डाइवर्जन किया जाता है। यानी ब्राउजर एक्सटेंशन और खास स्क्रिप्ट के जरिए ओटीपी हितग्राही के बजाय एजेंट के सिस्टम पर भेजा जाता है। इससे एजेंट सीधे पोर्टल तक पहुंच सकते हैं।



इसके बाद फर्जी डेटा अपलोड होने के बाद जिला और नगर निगम में समग्र पोर्टल देखने वाले कर्मचारी मंजूरी दे देते हैं। यानी पूरा नेटवर्क इसमें शामिल होता है। फिर अस्पतालों में सेटिंग के जरिए अपात्र लोगों के भी आयुष्मान कार्ड जल्दी बनवाकर उनका इलाज शुरू कर दिया जाता है।



इसमें आयुष्मान मित्रों की मदद ली जाती है। आखिर में यदि आयुष्मान कार्ड की पांच लाख रुपए की सीमा पूरी हो जाती है, तो कमीशन लेकर अतिरिक्त राशि जारी करने का भी दावा किया जाता है।



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