एमपी में नया नियम: बोरवेल खुला छोड़ा तो होगी अब सीधी जेल और भारी जुर्माना

Sanjay Dhiman | Jun 18, 2026, 23:09 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश सरकार ने खुले बोरवेल पर सख्त कानून बनाया है। अब लापरवाही पर जेल, 25 हजार रुपए तक जुर्माना और रेस्क्यू का पूरा खर्च बोरवेल मालिक से वसूला जाएगा।

मध्यप्रदेश सरकार ने बोरवेल हादसों पर रोक के लिए नई नीति लागू की है। खुले या सूखे बोरवेल को 90 दिन में बंद करना जरूरी होगा। पहली बार लापरवाही पर 10 हजार और दूसरी बार 25 हजार रुपए जुर्माना लगेगा। हादसे पर जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी पर FIR दर्ज होगी। रेस्क्यू ऑपरेशन का पूरा खर्च दोषी से वसूला जाएगा।



खुला बोरवेल अब सीधे जेल की राह

मध्यप्रदेश में बोरवेल हादसे अब जमीन मालिक को भारी पड़ेंगे। सरकार ने नई बोरवेल नीति और एसओपी (SOP) लागू कर दी है। अब तक ऐसे मामलों में सिर्फ मामूली धाराएं लगती थीं। नए नियमों के बाद कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। नया बोरवेल खोदने से पहले रजिस्ट्रेशन और अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति खुदाई पर सीधे कार्रवाई की जाएगी। यह नीति ग्रामीण इलाकों में पेयजल सुविधा सुधारने के लिए भी बनाई गई है।



90 दिन की मोहलत, फिर नहीं बचेगा बहाना

अगर बोरवेल में पानी नहीं निकला तो जमीन मालिक को 90 दिन में उसे मिट्टी या कंक्रीट से बंद करना होगा। बंद करने के बाद पोर्टल पर फोटो अपलोड करनी होगी। यह प्रमाण देना जरूरी है, बिना फोटो के काम नहीं चलेगा। पहली बार पकड़े जाने पर 10,000 रुपए जुर्माना लगेगा। दूसरी बार लापरवाही पर 25,000 रुपए जुर्माने के साथ जेल भी होगी। खुले बोरवेल से हादसा होने पर जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी पर सीधे FIR दर्ज होगी।



रेस्क्यू का लाखों का खर्च भी वसूलेगी सरकार

अब तक रेस्क्यू ऑपरेशन का खर्च सरकार उठाती थी। नई नीति में यह खर्च जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी से वसूला जाएगा। बोरवेल रेस्क्यू पर लाखों रुपए खर्च होते हैं। यह प्रावधान लापरवाही पर सबसे बड़ी आर्थिक चोट करेगा।



'परख एप' से करें शिकायत, होगी कार्रवाई

नागरिक अपने आसपास के खुले बोरवेल की फोटो खींचकर परख एप (PARAKH) पर शिकायत कर सकते हैं। सरकारी जमीन पर लापरवाही मिलने पर अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। यह एप आम लोगों को निगरानी का हथियार देती है।



अफसरों के लिए भी तय हुई टाइम लिमिट

हैंडपंप लगाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। हर स्तर पर समयसीमा तय कर दी गई है। आवेदन मिलते ही कार्यपालन यंत्री को तीन कार्यदिवस में फाइल सहायक यंत्री को भेजनी होगी। उपयंत्री (Sub-Engineer) तीन दिन में गांव जाकर गूगल मैप और 'घन' पोर्टल की मदद से जगह की मार्किंग करेंगे।



सारी रिपोर्ट मिलने के एक सप्ताह के भीतर कार्यपालन यंत्री को कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति के सामने प्रस्ताव रखना होगा। तय समय में फाइल नहीं भेजी तो संबंधित अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी।



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