मध्य प्रदेश ने बचत में बनाया नया रिकॉर्ड, बैंकों में जमा हुए 8.17 लाख करोड़, बचत के मामले में देश से आगे निकला प्रदेश

Kaushiki | Nov 06, 2026, 11:39 IST
एमपी में बैंक जमा राशि का रिकॉर्ड, बचत में छोटे जिले भी चमके
MP bank deposits reached a record Rs 8.17 lakh crore in June 2026. Savings in Madhya Pradesh grew 13.80% annually, beating the national average.
मध्य प्रदेश के लोगों ने बचत के मामले में नया रिकॉर्ड बना दिया है। प्रदेश के बैंकों में जमा पैसा पहली बार आठ लाख करोड़ रुपए पार पहुंचा है। जून 2026 तक यह रकम 8.17 लाख करोड़ रुपए हो गई। खास बात यह है कि बचत की रफ्तार देश से तेज रही। मध्य प्रदेश में बैंक जमा राशि एक साल में 13.80% बढ़ी।

वहीं, पूरे देश में यह बढ़ोतरी 11.35% दर्ज की गई। यह बदलाव केवल भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। ग्वालियर सहित कई छोटे जिलों में भी बैंक जमा राशि बढ़ रही है। इन जिलों के लोग भी बचत में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।



बैंकों ने बनाया नया रिकॉर्ड

सबसे दिलचस्प बात एक साल में जमा हुई अतिरिक्त रकम है। प्रदेश के बैंकों में 99 हजार 99 करोड़ रुपए और जमा हुए। इससे बैंकों में रखे कुल पैसों ने नया रिकॉर्ड बनाया। तीन साल के आंकड़े भी यही बदलाव दिखाते हैं।



  • जून 2024 में बैंकों की कुल जमा राशि 6.59 लाख करोड़ रुपए थी।
  • जून 2025 तक यह बढ़कर 7.18 लाख करोड़ रुपए पहुंची।
  • अब जून 2026 में आंकड़ा 8.17 लाख करोड़ रुपए पार कर गया।

इस बीच प्रदेश में बैंक शाखाओं की संख्या जरूर कम हुई है। एटीएम भी पहले के मुकाबले घटे हैं। इसके बावजूद बैंक जमा राशि लगातार बढ़ रही है। ये आंकड़े 199वीं State Level Bankers Committee की रिपोर्ट में सामने आए हैं।



ये रिपोर्ट प्रदेश की बचत और बैंकिंग की बदलती तस्वीर दिखाती है। साथ ही छोटे जिलों की बढ़ती हिस्सेदारी भी सामने लाती है। अब सवाल है कि प्रदेश में बचत कितनी तेजी से बढ़ी? राष्ट्रीय औसत के मुकाबले मध्य प्रदेश कहां खड़ा है और बैंक शाखाएं घटने के बावजूद जमा राशि कैसे बढ़ रही है?



एमपी में कितना पैसा जमा है?

रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के बैंकों में जमा राशि लगातार नए स्तर पर पहुंच रही है। जून 2026 तक कुल जमा राशि 8 लाख 17 हजार 367 करोड़ रुपए दर्ज हुई। एक साल पहले यह रकम 7 लाख 18 हजार 268 करोड़ रुपए थी। यानी बैंकों में एक साल के भीतर 99 हजार 99 करोड़ रुपए और जमा हुए।



यह रकम लोगों, कारोबारियों और अलग-अलग संस्थाओं के बैंक खातों में मौजूद है। इसमें केवल घरों की बचत शामिल नहीं है। कंपनियों और दूसरे संगठनों की जमा रकम भी इसका हिस्सा है। इसीलिए इसे केवल घरेलू बचत का आंकड़ा नहीं कहा जा सकता। हालांकि, बढ़ती जमा राशि प्रदेश की मजबूत बैंकिंग स्थिति दिखाती है।



तीन साल में कितना पैसा बढ़ा?

जून 2024 में प्रदेश के बैंकों में 6 लाख 59 हजार 215 करोड़ रुपए जमा थे। अगले साल यह रकम बढ़कर 7 लाख 18 हजार 268 करोड़ रुपए हो गई। जून 2026 में जमा राशि 8 लाख 17 हजार 367 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।



इस तरह दो साल के अंतर में एक लाख 58 हजार 152 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई। ये आंकड़े बताते हैं कि बैंक खातों में जमा रकम लगातार बढ़ी है। हालांकि, इससे हर परिवार की व्यक्तिगत बचत बढ़ने का निष्कर्ष नहीं निकलता।



देश से आगे कैसे निकला एमपी?

मध्य प्रदेश की बैंक जमा राशि की बढ़ोतरी राष्ट्रीय औसत से तेज रही। रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 तक प्रदेश की सालाना वृद्धि 13.80% थी। इसी अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर बैंक जमा राशि 11.35% बढ़ी।



इस तरह मध्य प्रदेश की बढ़ोतरी राष्ट्रीय औसत से 2.45 प्रतिशत अंक अधिक रही। पिछले साल प्रदेश में सालाना वृद्धि केवल 8.96% थी। इस बार इसमें 4.84 प्रतिशत अंकों का सुधार दर्ज हुआ।



इससे साफ है कि प्रदेश में बैंक जमा राशि बढ़ने की रफ्तार तेज हुई। यह प्रदेश के बैंकिंग क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, यह तुलना जमा राशि की Growth rate को लेकर है। इसका मतलब कुल बैंक जमा राशि में मध्य प्रदेश का देश में पहला स्थान नहीं है।



छोटे जिलों में भी बचत बढ़ी

बैंक जमा राशि बढ़ने की कहानी केवल बड़े शहरों की नहीं है। रिपोर्ट में छोटे जिलों की बढ़ती हिस्सेदारी भी सामने आई है। भोपाल और इंदौर में पहले से बड़ी मात्रा में बैंक जमा राशि है। अब ग्वालियर, जबलपुर, सागर और रीवा जैसे शहर भी आगे बढ़ रहे हैं।



उज्जैन और सिंगरौली में भी जमा राशि बढ़ने की बात सामने आई है। यह बदलाव प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक फैला हुआ है। रिपोर्ट में महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की बढ़ती हिस्सेदारी का भी जिक्र है।



छोटे कारोबारी और नौकरीपेशा लोग भी इस बढ़ोतरी का हिस्सा हैं। हालांकि, इन जिलों और समूहों के अलग-अलग आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसलिए किस जिले में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई, यह कहना संभव नहीं है।



ग्वालियर में कर्ज की क्या स्थिति?

ग्वालियर जिले का बैंकिंग आंकड़ा एक अलग तस्वीर दिखाता है। यहां बैंकों का कर्ज-जमा अनुपात 69.26% दर्ज किया गया है। बैंक में हर 100 रुपए जमा होने पर कर्ज का अनुपात 69.26 रुपए है।



यह आंकड़ा बैंक की जमा राशि और दिए गए कर्ज की तुलना दिखाता है। बैंकिंग की भाषा में इसे Credit-Deposit Ratio कहा जाता है। यह स्थानीय दुकानों, छोटे कारोबार और नए व्यवसायों से जुड़ा महत्वपूर्ण आंकड़ा है।



स्टार्टअप, किसानों और परिवारों की कर्ज जरूरतें भी बैंक पूरी करते हैं। हालांकि, इस अनुपात से कर्ज की क्वालिटी का पता नहीं चलता। इसके लिए समय पर भुगतान और फंसे हुए कर्ज की जानकारी चाहिए।



शाखाएं और एटीएम क्यों घटे?

प्रदेश में बैंक जमा राशि बढ़ी, लेकिन शाखाओं की संख्या कम हुई। बैंकर्स कमेटी की रिपोर्ट में यह जानकारी भी सामने आई है। प्रदेश में बैंक शाखाओं की संख्या पहले 8,785 थी। अब यह घटकर 8,707 रह गई है। यानी कुल 78 शाखाएं कम हुई हैं।



इसी तरह एटीएम की संख्या भी 305 कम हुई है। रिपोर्ट में एटीएम की मौजूदा कुल संख्या नहीं बताई गई है। इस बदलाव के बावजूद प्रदेश के बैंकों में जमा पैसा बढ़ता रहा। रिपोर्ट में डिजिटल बैंकिंग का भी जिक्र किया गया है।



अब कई लोग मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई का उपयोग करते हैं। रोजमर्रा के कई भुगतान फोन से ही पूरे हो जाते हैं। हालांकि, शाखाएं घटने की असली वजह केवल डिजिटल बैंकिंग नहीं मानी जा सकती। इसके लिए बैंकों के अलग-अलग फैसलों की जानकारी भी जरूरी है।



बचत के आंकड़े क्या बताते हैं?

मध्य प्रदेश की बैंक जमा राशि में लगातार बढ़ोतरी हुई है। सबसे बड़ा बदलाव सालाना वृद्धि की रफ्तार में दिखाई देता है। जून 2025 में यह बढ़ोतरी 8.96% थी। जून 2026 तक यही दर बढ़कर 13.80% पहुंच गई।



राष्ट्रीय स्तर पर जमा राशि 11.35% बढ़ी। इस मुकाबले मध्य प्रदेश की रफ्तार ज्यादा रही। छोटे जिलों की बढ़ती हिस्सेदारी भी ध्यान खींचती है। दूसरी तरफ शाखाओं और एटीएम की घटती संख्या सवाल खड़े करती है।



बैंकों के सामने अब पहुंच और सुविधा बनाए रखने की चुनौती भी है। खासकर उन इलाकों में, जहां लोग शाखाओं पर अधिक निर्भर रहते हैं। प्रदेश की बैंकिंग के लिए यह रिकॉर्ड एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आगे की तस्वीर नए आंकड़ों और बैंकिंग सेवाओं की स्थिति से साफ होगी।



बचत बढ़ने से क्या होगा फायदा?

बैंकों में जमा राशि बढ़ना प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। इससे बैंकों के पास ज्यादा पैसा उपलब्ध होता है। बैंक इस रकम के आधार पर व्यापार, खेती और अन्य जरूरतों के लिए कर्ज दे सकते हैं। हालांकि, रोजगार बढ़ना कारोबार और निवेश पर भी निर्भर करता है।



ग्वालियर की लीड बैंक अधिकारी के मुताबिक, लोगों में बचत की आदत बढ़ रही है। खासकर युवा, महिलाएं और छोटे कारोबारी अब पैसे बचाने पर ध्यान दे रहे हैं। उनका कहना है कि छोटी-छोटी बचत भी भविष्य में बड़ी आर्थिक मदद बन सकती है।



FAQs:



  1. मध्य प्रदेश में बैंक जमा राशि में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
    मध्य प्रदेश में बैंक जमा राशि में जून 2026 तक 8 लाख 17 हजार 367 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है, जो जून 2025 में 7 लाख 18 हजार 268 करोड़ रुपए थी।
  2. मध्य प्रदेश की बैंक जमा राशि की बढ़ोतरी राष्ट्रीय औसत से कैसे तुलना की जा सकती है?
    मध्य प्रदेश की सालाना बैंक जमा राशि की बढ़ोतरी 13.80% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 11.35% है, जिससे यह स्पष्ट है कि प्रदेश की वृद्धि राष्ट्रीय औसत से 2.45 प्रतिशत अंक अधिक है।
  3. छोटे जिलों में बैंक जमा राशि में बढ़ोतरी का क्या स्थिति है?
    रिपोर्ट में कहा गया है कि छोटे जिलों जैसे ग्वालियर, जबलपुर, सागर और रीवा में भी बैंक जमा राशि बढ़ रही है और इसमें महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है।
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