धार डकैती केस: जांच में पुलिस की किरकिरी, कोर्ट बोला- विभाग पर कलंक है ऐसी कार्रवाई
समझें क्या है पूरा मामला
- 16 दिसंबर 2017 की रात टवलाई गांव में व्यापारी के घर डकैती पड़ी।
- 10-12 डकैतों ने घर पर धावा बोला और पैसे और ज्वेलरी लूट ले गए।
- पुलिस ने जांच में इस वारदात को सिर्फ 4 आरोपियों तक सीमित कर दिया।
- क्लोजर रिपोर्ट 31 मार्च 2018 को बनी, पर 26 अप्रैल 2025 को पेश हुई।
- कोर्ट ने जांच में कई खामियां पाईं और कार्रवाई के निर्देश दिए।
टवलाई गांव में व्यापारी के घर डकैती
धार डकैती केस धरमपुरी थाना क्षेत्र के टवलाई गांव में हुई थी। बता दें डकैतों ने एक व्यापारी शंकरलाल जायसवाल का घर को निशाना बनाया था। कोर्ट के मुताबिक, रात में 10-12 डकैत घर में घुसे। वे नकदी और जेवरात लूटकर ले गए। यह कोई छोटी वारदात नहीं थी।
क्लोजर रिपोर्ट में 10-12 की जगह 4 आरोपी पेश
मामले की जांच तत्कालीन थाना प्रभारी कुशलसिंह रावत के पास थी। जांच अधिकारी एएसआई प्रकाश सरोदे थे। खबर के मुताबिक, दोनों ने वारदात को महज 4 आरोपियों तक समेट दिया।सवाल यह है कि 10-12 लोगों की वारदात चार लोगों की कैसे रह गई? यह एमपी डकैती केस अब पुलिस की जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है।
एसपी धार को एक महीने में रिपोर्ट देनी होगी
धरमपुरी के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विवेक जैन की कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने लिखा कि जांच किसी कानूनी प्रावधान से नहीं चली है। यह जांच पीएसपीसी और केआरपीसी के तहत चलाई गई प्रतीत होती है।
वहीं, कोर्ट ने एसपी धार को पत्र लिखा है। एक महीने के भीतर दोनों पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी गई है।
कोर्ट ने साफ किया है कि कार्रवाई न हुई, तो कोर्ट खुद कदम उठाएगी। कोर्ट एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। साथ ही नए विवेचक की नियुक्ति के निर्देश हैं। नया विवेचक हर 30 दिन में प्रोग्रेस रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगा।
मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस मामले ने मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की लापरवाही की बातें कोर्ट की टिप्पणी और खबर के मुताबिक हैं। दोनों पुलिसकर्मियों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
7 साल तक थाने में क्यों पड़ी रही रिपोर्ट?
पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट 31 मार्च 2018 को ही बना ली थी। यह केस बंद करने की रिपोर्ट थी। लेकिन इसे कोर्ट में पेश नहीं किया गया। रिपोर्ट थाने में ही पड़ी रही। पूरे 7 साल बाद, 26 अप्रैल 2025 को इसे कोर्ट में पेश किया गया।
खबरों के मुताबिक, डकैती का शिकार हुआ परिवार इतने साल इंसाफ का इंतजार करता रहा। लेकिन केस की रिपोर्ट थाने में ही पड़ी रही। सात साल बहुत लंबा वक्त होता है। इतने साल तक रिपोर्ट क्यों नहीं पेश हुई? यह सवाल उठना लाजिमी है। वहीं, इसकी गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने एक्शन लिया है।
केस डायरी में मिलीं ये खामियां
सुनवाई में खुलासा हुआ कि जांच अधिकारी ने एफआईआर की भाषा हूबहू लिख दी। यह भाषा केस डायरी में दर्ज हुई। केस डायरी यानी जांच का रोजाना रिकॉर्ड। मारपीट की शिकार व्यापारी की पत्नी के बयान तक दर्ज नहीं हुए। डॉक्टर ने एक्स-रे की सलाह दी थी। इस सलाह को भी नजरअंदाज कर दिया गया।
FAQs
- टवलाई गांव में डकैती कब और किसके घर हुई थी?
16 दिसंबर 2017 की रात टवलाई गांव में व्यापारी शंकरलाल जायसवाल के घर डकैती हुई थी। - इस डकैती मामले में कितने आरोपियों की पहचान की गई थी?
इस डकैती मामले में केवल 4 आरोपियों की पहचान की गई थी, जबकि घटना में 10-12 डकैत शामिल थे। - कोर्ट ने मामले के इंसाफ में क्या कदम उठाए हैं?
कोर्ट ने पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, नए विवेचक की नियुक्ति के साथ ही हर 30 दिन में प्रोग्रेस रिपोर्ट अदालत में पेश करने के आदेश दिए हैं।