मध्यप्रदेश की अनोखी दिवाली परंपरा, कहीं होता है दो महीने का जश्न, कहीं होती है श्मशान की पूजा
Aman Vaishnav | Oct 15, 2025, 18:14 IST
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पैसों से सजा महालक्ष्मी मंदिर रतलामImage credit : Aman Vaishnav
रतलाम महालक्ष्मी मंदिर Diwali पर करोड़ों के नोटों और गहनों से सजाया जाता है, फूलों की जगह यहां धन की देवी का श्रृंगार पैसे से होता है।
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एक दिन पहले दिवालीImage credit : Aman Vaishnav
मंडला जिले के कई गांवों में लोग एक दिन पहले दिवाली मना लेते हैं, ये गांव अपनी सदियों पुरानी ग्राम देवता की आज्ञा वाली इस परंपरा को नहीं तोड़ते,वे मानते हैं कि अगर ये रस्म तोड़ी गई, तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।
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श्मशान घाट की पूजाImage credit : Aman Vaishnav
रतलाम में दिवाली से एक दिन पहले, यानी नरक चतुर्दशी पर, लोग घरों की जगह सीधे श्मशान घाट पर जाते हैं, (रतलाम दिवाली परंपरा ) वहां दीपक जलाकर खुशियां मनाई जाती हैं।
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गोमाता के नीचे लेटनाImage credit : Aman Vaishnav
झाबुआ और मालवा में दिवाली के बाद एक अनोखी रस्म होती है। मन्नतें पूरी होने पर लोग गोमाता के झुंड के ठीक नीचे जमीन पर लेट जाते हैं।
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दो महीने तक दिवालीImage credit : Aman Vaishnav
धार जिले के डही इलाके के करीब 62 गांव में दिवाली का त्योहार दो महीने तक चलता है, जिसे वे दीवा कहते हैं,
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दिवाली नहीं शोकImage credit : Aman Vaishnav
छिंदवाड़ा के रावनवाड़ा गांव में दिवाली पर कोई दीया या जश्न नहीं होता, बल्कि लोग सवा महीने तक शोक मनाते हैं, यहां के आदिवासी रावण को अपना पूर्वज मानते हैं और उनकी मृत्यु का गम मनाते हैं।
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गौतमपुरा का हिंगोट युद्धImage credit : Aman Vaishnav
इंदौर के पास गौतमपुरा में दिवाली के अगले दिन एक अनोखी लड़ाई होती है, इसमें दो टीमें 'हिंगोट' (एक तरह का छोटा बम) एक-दूसरे पर फेंकती हैं।