एमपी का वॉटर मॉडल विदेश में होगा लागू, 6 देशों ने की जल गंगा संवर्धन अभियान की तारीफ

Aman Vaishnav | Jun 08, 2026, 10:56 IST
जल गंगा संवर्धन अभियान
मध्यप्रदेश के जल गंगा संवर्धन अभियान की अंतर्राष्ट्रीय सराहना हुई है। भोपाल में 6 देशों के राजनयिकों ने MP के जल संरक्षण मॉडल को अपने देश में लागू करने की इच्छा जताई है। अब तक दो लाख 12 हजार जल संरचनाएं बन चुकी हैं।

मध्यप्रदेश का जल गंगा संवर्धन अभियान अब अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचाना जा रहा है। भोपाल में आयोजित एक सदानीरा समागम में 6 देशों के राजनयिक शामिल हुए। उन्होंने प्रदेश के जल संरक्षण मॉडल को सराहा और अपने देशों में लागू करने की बात कही।



बता दें कि अब तक अभियान के तहत दो लाख 12 हजार से ज्यादा जल संरचनाओं का निर्माण हो चुका है। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को तीन लाख 66 हजार तक पहुंचाना है।



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दुनिया ने देखा एमपी का जल मॉडल

हाल ही में भोपाल में एक खास कार्यक्रम हुआ था। इस कार्यक्रम में साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद और टोबैगो तथा इक्वाडोर के प्रतिनिधि आए थे। सभी ने मध्यप्रदेश के जल संरक्षण के प्रयासों को अनुकरणीय बताया।



साथ ही विदेशी प्रतिनिधियों ने माना कि जल संरक्षण में जनभागीदारी पर आधारित यह मॉडल दूसरे देशों के लिए भी उपयोगी है। उन्होंने कहा कि जल संकट के समाधान के लिए जन-जागरूकता बेहद जरूरी है। यह कार्यक्रम उसी दिशा में एक मजबूत कदम है।



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2.12 लाख संरचनाएं, बड़ा लक्ष्य

मध्यप्रदेश सरकार के मुताबिक जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत अब तक दो लाख 12 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण या पुनर्जीवन हो चुका है।



तालाब, कुएं, बावड़ियां और चेक डैम जैसी संरचनाएं इसमें शामिल हैं। सरकार ने इस संख्या को तीन लाख 66 हजार तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।



यह अभियान सिर्फ सरकारी नहीं है। इसमें गांव-गांव के लोग हिस्सा ले रहे हैं। जनभागीदारी ही इस मॉडल की असली ताकत है।



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साइप्रस और फिजी ने क्या कहा

साइप्रस के उपायुक्त इवागोरस वराईओनाइडेस ने कहा कि यह अभियान जल संरक्षण को वैश्विक चुनौती मानते हुए आगे बढ़ रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश में जनभागीदारी के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों को अनुकरणीय बताया।



वहीं फिजी के उपायुक्त जगन्नाथ सामी ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने भी इस अभियान की सराहना की।



मेक्सिको ने जोड़ा सांस्कृतिक रिश्ता

मेक्सिको दूतावास की संस्कृति प्रमुख वनेसा एंड्रियन ने जल संरक्षण को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की पहल को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की यह पहल प्रेरणादायक है। मेक्सिको में भी ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश होगी।



त्रिनिदाद-इक्वाडोर ने की तारीफ

त्रिनिदाद एवं टोबैगो के उपायुक्त चंद्रदत्त सिंह ने कहा कि सांस्कृतिक माध्यमों से पर्यावरण संरक्षण की बात करना बेहद प्रभावी है। इक्वाडोर के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन जॉर्ज विनिशियो अनरेंगो ने एक घोषणा की है। विनिशियो अनरेंगो ने कहा कि वे मध्यप्रदेश से प्रेरणा लेकर अपने देश में भी जल संरक्षण केंद्रित सदानीरा संगम जैसा आयोजन करेंगे।



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नेपाल ने भी थामा हाथ

नेपाल दूतावास के प्रथम सचिव दीपक पोरिखरे ने इसे प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने वाला आयोजन बताया। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल दोनों देशों के लिए जल संकट एक साझा चुनौती है। मध्यप्रदेश का यह प्रयास आशा की किरण है।



क्यों अलग है यह मॉडल

इस जल गंगा संवर्धन अभियान_MPकी खासियत यह है कि यह ऊपर से थोपा गया कार्यक्रम नहीं है। इसमें आम लोग, किसान, पंचायतें और स्कूली बच्चे सब मिलकर काम कर रहे हैं। पुराने तालाबों की सफाई से लेकर नई संरचनाएं बनाने तक, सब कुछ सामूहिक प्रयास से हो रहा है।



विदेशी प्रतिनिधियों ने इसी जनभागीदारी वाले ढांचे को सबसे ज्यादा सराहा। उन्होंने माना कि सिर्फ सरकारी बजट से जल संकट हल नहीं होगा। समाज को भी आगे आना होगा।



FAQ

  1. जल गंगा संवर्धन अभियान क्या है?
    यह मध्यप्रदेश सरकार का जल संरक्षण अभियान है। इसके तहत तालाब, कुएं और अन्य जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया जा रहा है। अभियान में जनभागीदारी मुख्य आधार है।
  2. जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत अब तक कितनी जल संरचनाएं बन चुकी हैं?
    अब तक 2.12 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण या पुनर्जीवन हो चुका है। सरकार का लक्ष्य यह संख्या 3.66 लाख तक पहुंचाना है। यह काम अभी जारी है।
  3. कौन से देश एमपी का जल संरक्षण मॉडल अपनाना चाहते हैं?
    साइप्रस, फिजी, मेक्सिको, नेपाल, त्रिनिदाद-टोबैगो और इक्वाडोर के प्रतिनिधियों ने इस मॉडल को अपनाने की इच्छा जताई है। भोपाल में हुए सदानीरा समागम में यह बात सामने आई।

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