जनविश्वास अभियान के बाद भी अफसरों से नाराज जनता, तीन महीने में कई शिकायतों में भारी बढ़ोतरी

Jyoti Mahender Bhardwaj | Nov 06, 2026, 14:48 IST
मध्यप्रदेश में सरकारी कामकाज से लोग असंतुष्ट
मध्यप्रदेश में विभागीय प्रदर्शन पर सवाल
मध्यप्रदेश में अधिकारियों के जनता के बीच पहुंचने और जनविश्वास अभियान चलाने के बावजूद सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों की शिकायतें कम नहीं हो रही हैं। राजस्व, कृषि, नगरीय विकास और आबकारी जैसे विभागों में कई श्रेणियों की शिकायतों में तेजी से इजाफा हुआ है। तीन महीने के आंकड़े बताते हैं कि फसल सर्वे, खाद की उपलब्धता, जमीन पर कब्जा और पेयजल जैसी समस्याएं अब भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई हैं।

जनविश्वास अभियान के दौरान शिकायतों में बढ़ोतरी

जनविश्वास अभियान को लेकर तैयार रिपोर्ट में 1 अगस्त से 2 नवंबर तक की शिकायतों का विश्लेषण किया गया है। अभियान 31 जनवरी 2027 तक चलना है। इसमें सीएम हेल्पलाइन समेत केंद्र और राज्य के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर दर्ज शिकायतों को शामिल किया गया है।



रिपोर्ट के अनुसार, कुछ विभागों में शिकायतों में कमी आने के बजाय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे सरकारी सेवाओं और जमीनी स्तर पर अधिकारियों के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं।



खाद नहीं मिलने की शिकायतों में 110% वृद्धि

कृषि विभाग से जुड़ी खाद की उपलब्धता की शिकायतों में 110 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने की समस्या सामने आई है।



वहीं राजस्व विभाग में फसल सर्वे में गड़बड़ी को लेकर शिकायतें बढ़ी हैं। तीन महीने में 3,400 से अधिक लोगों ने फसल सर्वे में गलत जानकारी दर्ज होने की शिकायत की।



जमीन और पट्टे से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ीं

राजस्व विभाग के खिलाफ जमीन पर कब्जा और पट्टा नहीं मिलने से जुड़ी शिकायतें भी सामने आई हैं। करीब 3,100 लोगों ने इस तरह की समस्याओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई। इसके अलावा राहत राशि भुगतान, अविवादित नामांतरण और रिकॉर्ड सुधार जैसे मामलों में भी लोगों की परेशानी सामने आई है।



पेयजल और अवैध शराब की शिकायतों में इजाफा

पेयजल की उपलब्धता और पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पानी नहीं मिलने और उसकी गुणवत्ता खराब होने जैसी समस्याओं में रिपोर्ट के अनुसार 88 प्रतिशत तक वृद्धि हुई।



अवैध शराब की बिक्री और अधिक कीमतों से जुड़ी शिकायतों में भी लगभग 31 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इससे आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।



कुछ विभागों में शिकायतें हुईं कम

रिपोर्ट में कुछ श्रेणियों में शिकायतों में गिरावट भी दर्ज की गई है। राजस्व विभाग के अविवादित नामांतरण और रिकॉर्ड सुधार से जुड़े मामलों में कमी आई है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग और किसान कल्याण एवं कृषि विभाग की कुछ श्रेणियों में भी शिकायतें कम हुई हैं।



जनविश्वास अभियान के बाद इन जिलों में कमी

रिपोर्ट में कुछ जिलों में शिकायतों में कमी दर्ज होने की बात भी सामने आई है। अशोकनगर, छतरपुर, गुना, झाबुआ और आलीराजपुर जैसे जिलों के आंकड़े इस संदर्भ में दिए गए हैं। हालांकि, सभी जिलों में शिकायतों की स्थिति एक जैसी नहीं रही है।



यह खबर क्यों जरूरी है

सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचना प्रशासन की जिम्मेदारी है। शिकायतों में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि कई समस्याओं का समाधान अभी भी जमीनी स्तर पर नहीं हो पा रहा है। इससे जनविश्वास अभियान की प्रभावशीलता और विभागीय जवाबदेही का आकलन करना जरूरी हो जाता है।



आगे क्या?

जनविश्वास अभियान 31 जनवरी 2027 तक जारी रहेगा। आने वाले समय में शिकायतों के निपटारे, विभागीय कार्रवाई और जिलों के प्रदर्शन के आधार पर अभियान की वास्तविक सफलता का आकलन किया जा सकेगा। अब निगरानी इस बात पर होगी कि बढ़ती शिकायतों का समाधान कितनी तेजी से होता है और जनता का भरोसा कितना मजबूत बनता है।



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