न जन्म हुआ, न उम्र हुई; फिर भी हो गया रिश्ता और सगाई! तोड़ने पर ढाई लाख का जुर्माना; दांव पर MP के 38 हजार बच्चों का बचपन
हैरानी की बात यह है कि रिश्ता टूटने या कोई अनहोनी होने पर भी जुर्माने की मांग की जाती है।
पांच जिलों में कितने बच्चे
पुनर्जागरण एजुकेशन वेलफेयर सोसायटी के सचिव ईश्वर सिंह के मुताबिक मध्यप्रदेश के पांच जिलों में आज भी बचपन में सगाई करने की परंपरा चल रही है। उनकी संस्था ने इस पर एक रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को सौंपी है। रिपोर्ट के मुताबिक पांच जिलों के 666 गांवों में करीब 38 हजार 844 बच्चे इस परंपरा से जुड़े हैं।
इनमें सबसे ज्यादा बच्चे नीमच जिले में हैं। यहां 206 गांवों के करीब 19 हजार 700 बच्चे इस परंपरा से जुड़े हैं। मंदसौर के 160 गांवों में 12 हजार 644 बच्चे हैं। गुना के 100 गांवों में तीन हजार बच्चे हैं। राजगढ़ के 100 गांवों में दो हजार बच्चे हैं। वहीं आगर-मालवा के 100 गांवों में करीब 1500 बच्चे हैं।
गर्भ में रिश्ता और पंचायत का जुर्माना
रिपोर्ट के मुताबिक कई समाजों में बच्चे के जन्म से पहले ही उसका रिश्ता तय कर दिया जाता है। इसके बाद यदि परिवार रिश्ता तोड़ना चाहे तो मामला जाति पंचायत तक पहुंच जाता है। इनमें बंजारा समेत कई समाजों की पंचायतों का जिक्र किया गया है।
ऐसा ही एक मामला नीमच के मोरवन इलाके से सामने आया है। यहां एक बच्ची की सगाई महज दो साल की उम्र में कर दी गई थी। तीन साल पहले उसके मंगेतर की मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार ने बच्ची का रिश्ता दूसरी जगह तय करना चाहा। इस पर मंगेतर के परिवार ने पांच लाख रुपए का हर्जाना मांगा था।
मामला जाति पंचायत तक पहुंचा था। वहां ढाई लाख रुपए में समझौता हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद ही परिवार को एनओसी यानी अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया गया था।
स्कूल में बच्चों ने हाथ उठाए
रिपोर्ट में नीमच जिले की मनासा तहसील के कुछ सरकारी प्राथमिक स्कूलों का भी जिक्र किया गया है। जूना मालाहेड़ा, किरिपुरिया और छोटा किरिपुरिया गांवों के स्कूलों में जांच की गई। यहां बच्चों से उनकी सगाई को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर करीब 90 फीसदी बच्चों ने हाथ उठाकर बताया कि उनकी सगाई हो चुकी है।
आसपास के ज्यादातर स्कूलों में भी ऐसे ही हालात हैं। हालांकि 90 फीसदी का यह आंकड़ा सिर्फ इन कुछ स्कूलों का है।
खुलेआम लगती हैं पंचायतें
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मंदसौर जिले के गरोठ में 16 सितंबर को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के पास खाप पंचायत बैठी थी। बंजारा समाज की यह पंचायत एक्सप्रेस-वे के पुल के नीचे चल रही थी। यहां एनओसी देने और हर्जाना वसूलने के नाम पर सौदेबाजी चल रही थी।
मामला ढाबा और तराबली गांव के दो युवकों से जुड़ा था। बाल विवाह का रिश्ता टूटने के बाद एनओसी और पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद था। इसे पंचायत में सुलझाने की कोशिश की जा रही थी। इस दौरान पुलिस की गाड़ी तीन बार वहां से गुजरी। इसके बाद भी पंचायत चलती रही।
वहीं, पंचायत में 12 जातियों के मुखिया शामिल थे। सुनवाई शुरू करने से पहले 500-500 रुपए जमा कराए जाते हैं। इस विवाद को लेकर आठवीं बार पंचायत बुलाई गई थी। इसके बाद भी कोई फैसला नहीं हो सका।
60 लाख में अपराध निपटाने का दावा
रिपोर्ट में एक और गंभीर दावा सामने आया है। मंदसौर के झारड़ा गांव में कुछ पंचों ने कथित तौर पर बताया कि यह परंपरा 500 साल पुरानी है। उन्होंने यहां तक दावा किया कि हत्या और दुष्कर्म जैसे मामलों को भी पंचायत में निपटा दिया जाता है। इसके लिए 40 से 60 लाख रुपए तक लिए जाते हैं।
बाल विवाह का कानून क्या कहता है
भारत में बाल विवाह रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू है। इस कानून के मुताबिक लड़की की शादी की उम्र कम से कम 18 साल और लड़के की 21 साल होनी चाहिए। इससे कम उम्र में शादी कराना अपराध है। ऐसा करने पर दो साल तक की जेल और एक लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है।
हालांकि सगाई करना अपने आप में शादी नहीं माना जाता। फिर भी बचपन में रिश्ता तय करने से आगे चलकर बाल विवाह का खतरा बढ़ सकता है। कानून में बाल विवाह को बढ़ावा देने या इसमें मदद करने वालों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। इनमें सरपंच और पंच भी शामिल हो सकते हैं।
आयोग और बोर्ड अध्यक्ष क्या बोले
रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश बाल आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने इस मामले में सख्त कदम उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि सभी पांच जिलों से जानकारी मंगाई जाएगी। इसके बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट में विमुक्त एवं अर्ध घुमक्कड़ जाति विकास बोर्ड के अध्यक्ष बाबूलाल बंजारा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि इस मामले में वोट बैंक का डर भी है। उनके मुताबिक सरकार वोट बैंक बिगड़ने के डर से ऐसी पंचायतों पर कार्रवाई नहीं करती। बाबूलाल बंजारा ने यह भी कहा कि वे खुद ऐसी दो से तीन पंचायतों में शामिल हो चुके हैं।
अब आगे क्या होगा
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन पंचायतों पर कार्रवाई कब होगी? सबसे पहले जिला प्रशासन को बच्चों की सगाई और ऐसी पंचायतों की जांच करनी होगी। इसमें बाल विवाह रोकथाम अधिकारी, पुलिस और बाल कल्याण समिति की अहम भूमिका होगी। हर्जाने के नाम पर पैसे वसूलने वाली पंचायतों पर क्या कार्रवाई होगी, यह भी देखना होगा।
सबसे जरूरी है कि बच्चों का बचपन सुरक्षित रहे। उन्हें पढ़ने-लिखने और आगे बढ़ने का पूरा मौका मिले। इसके लिए लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है। पुरानी परंपरा के नाम पर बच्चों का भविष्य दांव पर नहीं लगाया जा सकता।
यदि किसी गांव में बाल विवाह की तैयारी चल रही है तो कोई भी व्यक्ति इसकी शिकायत कर सकता है। इसके लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 या पुलिस हेल्पलाइन 112 पर सूचना दी जा सकती है। शिकायत करने वाला व्यक्ति अपनी पहचान गोपनीय रखने की मांग भी कर सकता है।
FAQs
- मध्यप्रदेश के पांच जिलों में कितने बच्चे बचपन में सगाई के परंपरा से जुड़े हुए हैं?
मध्यप्रदेश के पांच जिलों में करीब 38,844 बच्चे बचपन में सगाई के परंपरा से जुड़े हुए हैं। - बाल विवाह रोकने के लिए भारत में क्या कानून हैं?
भारत में बाल विवाह रोकने के लिए 2006 में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत लड़की की शादी की उम्र कम से कम 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष होनी चाहिए। इससे कम उम्र में शादी कराना अपराध है।