मध्य प्रदेश की मोहन सरकार फिर लेगी 5 हजार करोड़ का कर्ज, जानें अभी कितनी कर्जदार है गवर्नमेंट
एमपी की डॉक्टर मोहन यादव की सरकार ( Madhya Pradesh Government ) 5000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त कर्ज ( Loan ) लेने की तैयारी बना रही है। बताया जा रहा है कि प्रदेश सरकार ये कर्ज दो चरणों में लेगी। वर्तमान में सरकार के ऊपर 3.75 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। पहला कर्ज ढाई हजार करोड़ रुपए का 11 साल के लिए लिया जाएगा, जबकि, ढाई हजार करोड़ रुपए का ही दूसरा कर्ज 21 साल के लिए लिया जाएगा।
कर्ज लेने के लिए क्या कहते हैं नियम ?
राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के प्रावधान के अनुसार, सरकार राज्य सकल घरेलू उत्पाद का तीन प्रतिशत तक ऋण ले सकती है। सरकार नियमों के अनुसार कर्ज लेने जा रही है। वर्ष 2024-25 में, सरकार 65 हजार करोड़ रुपए तक कर्ज ले सकती है। पिछले वर्ष 2023-24 में मध्य प्रदेश सरकार ने 55 हजार 708 रुपए का कर्ज लिया था।
कर्ज को लेकर क्या है संवैधानिक प्रावधान ?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 293 के अनुसार, केंद्र अगर किसी राज्य को कर्जा देता है और राज्य सरकार के पास उस ऋण का कुछ हिस्सा अभी भी बकाया है, तो वह राज्य, भारत सरकार की सहमति के बिना कोई ऋण नहीं ले सकता। पिछले साल नवंबर में विधानसभा चुनाव के बाद बनी नई सरकार को विरासत में 3.5 लाख करोड़ रुपए का कर्ज मिला है और उसने नवंबर से मार्च के बीच 17,500 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया है।
कितनी हो सकती है शुद्ध उधार सीमा ?
पिछले वित्तीय वर्ष में एमपी सरकार ने 42,500 करोड़ रुपए उधार लिए थे। अधिकारियों ने बताया कि राज्य की शुद्ध उधार सीमा नहीं बढ़ने का कारण मप्र का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) है। जीएसडीपी काफी हद तक वही बनी हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य की जीएसडीपी 15 लाख करोड़ रुपए के करीब थी और चालू वित्तीय वर्ष के लिए भी लगभग इतनी ही राशि का अनुमान लगाया गया है। राज्यों को अपने जीएसडीपी के तीन प्रतिशत के भीतर ऋण लेने की अनुमति है, जो लगभग 45 हजार करोड़ रुपए होगी।
पिछले दो साल में प्रदेश सरकार ने कितना लिया कर्ज
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक