अब परिवार के खर्च से तय होगा न्यूनतम वेतन, नए श्रम नियमों से बदलेगी तस्वीर
मध्य प्रदेश में अब परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिसाब रखते हुए उनका न्यूनतम वेतन तय किया जाएगा। इसके लिए यह देखा जाएगा कि उन्हें भोजन में कितनी कैलोरी चाहिए।
कपड़े पर कितना खर्च होता है और किस शहर में घर का किराया कितना है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए श्रम विभाग न्यूनतम वेतन तय करेगा।
इस वेतन के आधार पर ही निजी और सरकारी नियोक्ता पेड वेजेस यानी कर्मचारियों को मिलने वाली सैलरी तय करेंगे।
केंद्र द्वारा जारी किए गए चार श्रम कानूनों के बाद अब राज्य सरकार नए श्रम नियम बना रही है। इसके तहत मंगलवार, 05 मई को प्रारंभिक नोटिफिकेशन जारी किया गया है।
नौकरियों की संख्या बढ़ाने की कोशिश
श्रम विभाग के अनुसार अभी लगभग 15 प्रतिशत कामकाजी लोग ही ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम करते हैं। जबकि 85 प्रतिशत लोग अन-ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम करते हैं। नए नियमों का मकसद यह है कि यह स्थिति पलट जाए।
यानी 85 प्रतिशत लोग ऐसे हों जिन्हें बैंक से सैलरी मिले। साथ ही उनका रिकॉर्ड हो और वे सभी सुविधाओं का फायदा उठा सकें।
इसके साथ ही यह कोशिश की जाएगी कि न्यूनतम वेतन ऐसा तय किया जाए, जिससे नई नौकरियों का सृजन हो सके। नए नियम लागू होने के बाद हर पांच साल में न्यूनतम वेतन में संशोधन इन नए नियमों के आधार पर किया जाएगा।
कामकाजी लोग अपने घर वापस लौटेंगे
सरकार बस ये तय करेगी कि, केंद्र के नियमों के हिसाब से एक परिवार में दो वयस्क (Adult) और दो बच्चे या तीन वयस्कों को कितनी खाना-पीना चाहिए। इसके अलावा, कपड़े और घर का किराया भी तय किया जाएगा। इससे उनकी न्यूनतम जरूरतें साफ हो जाएंगी।
फिर, निजी और सरकारी नियोक्ताओं को कहा जाएगा कि वे इस न्यूनतम जरूरत से ऊपर वेतन तय करें।
इंदौर, भोपाल जैसे बड़े शहरों में किराया ज्यादा होगा, जबकि छोटे शहरों जैसे उमरिया, अनूपपुर में किराया कम होगा। इसका फायदा ये होगा कि छोटे शहरों में न्यूनतम वेतन भी कम होगा। इससे कामकाजी लोग (श्रमिक) अपने घर वापस लौटेंगे और इन इलाकों में श्रम आधारित उद्योग भी बढ़ेंगे।
हर किसी को न्यूनतम वेतन देने का मकसद
श्रम विभाग के सचिव रघुराज एमआर के मुताबिक, नए नियमों का उद्देश्य है कि हर किसी को कम से कम एक न्यूनतम वेतन मिले। इसके लिए सबसे पहले तो ये कोशिश की जाएगी कि ज्यादा से ज्यादा रोजगार बढ़े और ज्यादा लोगों को काम मिले।
अब, कुछ लोगों को ज्यादा वेतन देने की बजाय, ज्यादा लोगों को थोड़ा कम न्यूनतम वेतन दिया जाएगा, यही कोशिश है।
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