नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में सिर्फ महिलाओं को मौका क्यों? हाईकोर्ट में सरकार से जवाब तलब
News in short
- नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में 100% महिला आरक्षण पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
- 800+ पदों की भर्ती प्रक्रिया फिलहाल विवादों में
- पुरुष अभ्यर्थियों ने भर्ती विज्ञापन को कोर्ट में दी चुनौती
- याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के उल्लंघन का आरोप
- अगली सुनवाई 15 अप्रैल को तय
News in Detail
मध्य प्रदेश में नर्सिंग ऑफिसर भर्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।। 800 से अधिक पदों पर 100% महिला आरक्षण के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए सरकार से पूछा है कि क्या यह लिंग आधारित भेदभाव नहीं है?
100% महिला आरक्षण के खिलाफ मामला पहुंचा हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के 800 से अधिक पदों पर निकली भर्ती प्रक्रिया अब कानूनी विवाद में घिर गई है। जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विशाल घगट की एकलपीठ ने राज्य सरकार और कर्मचारी चयन मंडल (ESB) से स्पष्ट जवाब मांगा है कि आखिर नर्सिंग ऑफिसर पदों पर 100 प्रतिशत महिला आरक्षण किस आधार पर लागू किया गया है। कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई 15 अप्रैल को निर्धारित की है।
पुरुष अभ्यर्थियों ने दी कानूनी चुनौती
इस भर्ती प्रक्रिया को संतोष कुमार लोधी सहित अन्य पुरुष अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने दलील दी कि 2 अप्रैल 2026 को जारी “नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा-2026” के विज्ञापन में नर्सिंग ऑफिसर के सभी पदों को केवल महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इससे योग्य और पात्र पुरुष अभ्यर्थियों को आवेदन करने का अवसर ही नहीं मिल रहा, जो कि पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
नियमों के खिलाफ बताया गया प्रावधान
याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया कि “मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2023” में नर्सिंग ऑफिसर पद के लिए किसी भी प्रकार का लिंग आधारित प्रतिबंध नहीं है। इसके बावजूद भर्ती विज्ञापन में इस तरह का प्रावधान लागू करना सीधे-सीधे वैधानिक नियमों के विपरीत है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर यह निर्णय नियमों को दरकिनार कर लिया गया है।
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समान योग्यता के बावजूद भेदभाव का आरोप
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि नर्सिंग क्षेत्र में पुरुष और महिला दोनों ही समान पाठ्यक्रम B.Sc. नर्सिंग और GNM की पढ़ाई करते हैं और समान रूप से पंजीकृत होते हैं। ऐसे में केवल लिंग के आधार पर पुरुषों को पूरी तरह बाहर कर देना न केवल अनुचित है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 15 (भेदभाव का निषेध) और 16 (सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर) का भी उल्लंघन है।
भर्ती प्रक्रिया पर पहले भी उठते रहे सवाल
मध्य प्रदेश में सरकारी भर्तियों को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। कभी 100% आरक्षण लागू कर सामान्य और EWS वर्ग को प्रभावित करने के आरोप लगते हैं, तो कभी OBC आरक्षण को लेकर विवाद खड़ा होता है। अब नर्सिंग भर्ती में 100% महिला आरक्षण का मामला सामने आने से एक बार फिर भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधानिकता पर सवाल उठने लगे हैं।
क्या बदलेगा भर्ती का स्वरूप?
इस पूरे मामले में अब सभी की नजर 15 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई है। यदि हाईकोर्ट इस आरक्षण को असंवैधानिक मानता है, तो न केवल यह भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि भविष्य में होने वाली अन्य भर्तियों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकती है।
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