फिर मध्यप्रदेश आ रहे राहुल गांधी, अमित शाह भी आएंगे, आखिर बड़े नेताओं को क्यों भा रहा मध्यप्रदेश?
दतिया उपचुनाव के बाद दोनों दल युवा, आदिवासी और ग्रामीण वोटरों पर फोकस कर रहे हैं। क्या इसे 2028 विधानसभा चुनाव की शुरुआती बिसात माना जा सकता है?
क्या होने वाला है इस सप्ताह
30 सितंबर: बीजेपी के प्रदेश प्रभारी बिप्लब देब दो दिन के दौरे पर भोपाल आ रहे हैं।
1 अक्टूबर: बैगा बच्चों की मौत के बाद राहुल गांधी बालाघाट आ रहे हैं।
3 अक्टूबर: भोपाल में 35 हजार गोपालकों के बीच पहुंचेंगे अमित शाह।
पहला दौर: तीन दिन, तीन चेहरे
नबीन का पहला एमपी दौरा
नितिन नबीन 20 जनवरी 2026 को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। 17 सितंबर को वे इस हैसियत से पहली बार एमपी आए। उस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी था।
इंदौर में उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ रोड शो किया। फिर स्वामित्व योजना के तहत प्रदेशभर में रजिस्ट्री अभियान शुरू किया। सरकार के मुताबिक 50 लाख से ज्यादा ग्रामीण भूस्वामियों को मुफ्त रजिस्ट्री मिलेगी।
शाम को वे उज्जैन में शिप्रा आरती और दीपोत्सव में शामिल हुए। अगली सुबह महाकाल की भस्म आरती के बाद वे रवाना हो गए।
उज्जैन में भागवत का युवा संवाद
इन्हीं दिनों संघ प्रमुख मोहन भागवत भी उज्जैन में थे। उन्होंने संघ पदाधिकारियों के साथ बैठकें कीं। 18 सितंबर को उन्होंने युवा धर्म संसद 2026 का शुभारंभ किया। इसमें देशभर से करीब 1,700 युवा पहुंचे थे।
इसे जेन-जी (नई पीढ़ी) से संवाद के रूप में पेश किया गया। चरित्र निर्माण, राष्ट्र सेवा और सनातन संस्कृति इसके केंद्र में रहे।
इंदौर में राहुल की छात्रों की गूंज
19 सितंबर को राहुल गांधी इंदौर पहुंचे। कांग्रेस के कार्यक्रम छात्रों की गूंज में उन्होंने युवाओं से बात की। शिक्षा, पेपर लीक और बेरोजगारी मुख्य मुद्दे रहे।
यह दौरा पहले 12 सितंबर को होना था। फिर तारीख एक हफ्ता आगे बढ़ी। कार्यक्रम से पहले पुलिस की भूमिका पर विवाद भी हुआ।
दूसरा दौर: चार दिन, तीन नेता
बिप्लब देब की पहली पारी
23 सितंबर को नबीन ने 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रभारी तय किए। त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को एमपी की कमान मिली। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा सह-प्रभारी हैं।
जिम्मेदारी मिलने के एक हफ्ते बाद ही देब भोपाल पहुंच रहे हैं। 30 सितंबर को वे लालघाटी के गुफा मंदिर जाएंगे। वे विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से भी मिलेंगे। शाम 5 बजे प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक होगी।
बालाघाट में राहुल का दूसरा दौरा
1 अक्टूबर को राहुल गांधी बालाघाट जाएंगे। करीब 13 दिन में यह उनका दूसरा एमपी दौरा होगा। वे बैहर और बिरसा के बैगा आदिवासी परिवारों से मिलेंगे।
इन इलाकों में करीब 30 बच्चों की मौत की खबरें सामने आई हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। हाईकोर्ट में लापरवाही के आरोप वाली याचिका पर सुनवाई भी चल रही है।
प्रशासन ने अब तक 45 हजार 969 लोगों की जांच की है। 29 सितंबर तक सात हजार 624 मरीज मिले। इनमें 691 को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।
शाह की गोपालक सभा और सौगातें
3 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भोपाल आएंगे। भेल दशहरा मैदान में राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन होगा। सरकार का दावा है कि इसमें 35 हजार से ज्यादा लोग आएंगे।
शाह उज्जैन में 255 करोड़ रुपए के डेयरी प्लांट की सौगात देंगे। भोपाल पश्चिम बायपास का भूमिपूजन भी होगा। भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ के पशुपालकों को बोनस बांटा जाएगा।
वे नए आपराधिक कानूनों पर प्रदर्शनी का उद्घाटन भी करेंगे। भौरी में IISER (Indian Institute of Science Education and Research) परिसर की नींव रखेंगे।
दतिया ने बढ़ाई हलचल
इस सक्रियता की एक बड़ी वजह दतिया उपचुनाव को माना जा रहा है। 3 अगस्त को नतीजे आए। कांग्रेस के घनश्याम सिंह करीब 6 हजार वोटों से जीते।
बीजेपी ने यहां नरोत्तम मिश्रा की जगह नया चेहरा उतारा था। यह दांव नहीं चला।
सरकार की सेहत पर इस नतीजे का कोई असर नहीं पड़ा। फिर भी इसे 2028 से पहले जनता के मूड की पहली परीक्षा माना गया। कांग्रेस ने इसे बदलाव का संकेत बताया। बीजेपी के लिए यह बूथ स्तर की तैयारी कसने का संदेश माना गया।
सोचिए, एक सीट के नतीजे ने दोनों दलों को कितना सक्रिय कर दिया।
युवा वोटर पर सीधी खींचतान
पहले दौर का सबसे दिलचस्प पहलू युवा रहे। एक ही हफ्ते में दो बड़े युवा आयोजन हुए। उज्जैन में भागवत ने नई पीढ़ी से संवाद किया। अगले दिन इंदौर में राहुल ने पेपर लीक और नौकरी पर बात की।
एक मंच पर संस्कृति और राष्ट्र सेवा की बात थी। दूसरे मंच पर रोजगार और परीक्षा की चिंता। आप सोच रहे होंगे, क्या यह सिर्फ संयोग था? कई रिपोर्टों ने इसे आमने-सामने का मुकाबला कहा।
आदिवासी और गांव पर नजर
दूसरे दौर का फोकस गांव और आदिवासी इलाके हैं। राहुल गांधी का बालाघाट दौरा बैगा परिवारों के दर्द से जुड़ा है। एमपी की 230 में से 47 विधानसभा सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
उधर शाह का कार्यक्रम पशुपालकों और दूध उत्पादकों के इर्द-गिर्द बुना गया है। सम्मेलन में भोपाल, सीहोर, विदिशा, रायसेन और नर्मदापुरम जैसे जिलों से लोग आएंगे। नबीन की स्वामित्व रजिस्ट्री भी सीधे ग्रामीण परिवारों तक पहुंचती है।
सीधे बात करें तो दोनों दल गांव तक अलग रास्तों से पहुंच रहे हैं। कांग्रेस सवालों के साथ। बीजेपी सौगातों के साथ।
2028 की तैयारी अभी से
2028 विधानसभा चुनाव में अभी करीब दो साल बाकी हैं। लेकिन दोनों दलों की टीमें अभी से बदल रही हैं। बीजेपी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष और नया प्रदेश प्रभारी मिला है। देब का पहला काम सत्ता और संगठन की नब्ज टटोलना माना जा रहा है।
कांग्रेस भी दतिया के बाद आक्रामक दिख रही है। पार्टी ने प्रदेश की कई समितियां भंग की हैं। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी संभागीय सम्मेलनों की योजना भी बता चुके हैं।
तो क्या यह चुनावी मौसम की जल्दी शुरुआत है? फिलहाल एमपी दोनों दलों की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर दिखता है।
और यह सिलसिला अभी थमता नहीं दिखता।
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह खबर बताती है कि मध्यप्रदेश की राजनीति चुनाव से करीब दो साल पहले ही गरमा चुकी है। बीजेपी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष और नए प्रदेश प्रभारी के साथ संगठन कस रही है। कांग्रेस दतिया की जीत से उत्साहित होकर युवाओं और आदिवासियों के मुद्दे उठा रही है। बालाघाट में बच्चों की मौत जैसे सवाल अब सियासी बहस के केंद्र में हैं। पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि आने वाली योजनाएं और घोषणाएं किस राजनीतिक संदर्भ में आ रही हैं।