MP में सियासत का सुपर वीक: शाह-भागवत-गडकरी और राहुल आए, शिवराज की टीस और बिप्लब का मैसेज, जानें और क्या-क्या हुआ?

Ravi Kant Dixit | Sootr Assets | Oct 03, 2026, 14:25 IST
मध्यप्रदेश में सियासत का बड़ा हफ्ता
मध्यप्रदेश में इस हफ्ते खूब सियासत हुई। सिस्टम की भी खूब बातें हुईं। संघ प्रमुख डॉ.मोहन भागवत, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत सियासत के कई बड़े चेहरे मध्यप्रदेश में नजर आए। राहुल गांधी 12 दिन के भीतर दूसरी बार मध्यप्रदेश पहुंचे और बालाघाट में आदिवासी परिवारों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी बात सुनी।

अमित शाह ने भोपाल में गोपालक सम्मेलन के जरिए सहकारिता और डेयरी सेक्टर से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स की सौगात दी। परिवहन मंत्री नितन गडकरी ने बस सेवा शुरू कराई और इसी मंच से आरटीओ अफसरों को लेकर ऐसी बात कही, जो मीडिया की हेडलाइन बन गई। उधर, मुख्यमंत्री मोहन यादव दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर 2027 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का न्योता दिया।



बीजेपी के नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब ने संगठन में गुटबाजी से लेकर महंगे स्वागत और जेसीबी से फूल बरसाने पर सख्त संदेश दे दिया और जिस भोपाल मास्टर प्लान का लंबे समय से इंतजार था, उसका ड्राफ्ट आखिरकार सामने आ ही गया। अब नजर इंदौर के मास्टर प्लान पर है। इसी बीच सरकारी कर्मचारियों के लिए दिवाली से पहले महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की उम्मीद भी बनती दिखाई दे रही है।



नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल और गुड आफ्टरनून...

द सूत्र की 'राज्य की डायरी' में इस हफ्ते मध्यप्रदेश की सियासत, प्रशासन और सिस्टम से जुड़ी ऐसी ही तमाम बड़ी खबरों का लेखा-जोखा।



तो चलिए, शुरू करते हैं...



शाह ने गोपालकों को दीं सौगातें

सबसे पहले बात बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की। शाह 2 अक्टूबर की रात भोपाल पहुंचे और 3 अक्टूबर को यहां राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में शामिल हुए। कार्यक्रम में पशुपालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वाली गोपालक दीदियों को सम्मानित किया गया। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र भी दिए गए। सम्मेलन में बड़ी संख्या में गोपालक और डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े लोग शामिल हुए।



शाह ने उज्जैन में 3 लाख लीटर प्रतिदिन प्रसंस्करण क्षमता वाले अत्याधुनिक डेयरी प्लांट का वर्चुअल भूमि-पूजन भी किया। इसके साथ भोपाल में तैयार 40 हजार लीटर उत्पादन क्षमता वाले फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का शुभारंभ हुआ। भोपाल में सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला और शिवपुरी के मिनी डेयरी संयंत्र का भी शुभारंभ किया गया।



अमित शाह का भोपाल दौरा

शाह के दौरे में सहकारिता, पशुपालन और डेयरी के साथ नए आपराधिक कानूनों से जुड़ी प्रदर्शनी भी कार्यक्रम का हिस्सा रही, लेकिन उनका दौरा सिर्फ सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा। भोपाल पहुंचने के बाद उन्होंने रात में ही बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। यानी शाह का दौरा सरकारी कार्यक्रमों के साथ संगठन और सियासत...दोनों लिहाज से अहम रहा।



जब मंत्रियों की सुनवाई नहीं, तो जनता किसके पास जाए?

अब आते हैं उस सवाल पर, जिसने इस हफ्ते मध्यप्रदेश की अफसरशाही को लेकर राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। क्या प्रदेश में अफसर केंद्रीय मंत्री और राज्य के मंत्रियों की भी बात नहीं सुन रहे? यह सवाल इसलिए उठा है क्योंकि केंद्रीय कृषि मंत्री और 18 साल तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान ने बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक में अफसरों के रवैये का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि जब वे अपने संसदीय क्षेत्र में आते-जाते हैं तो कलेक्टर प्रोटोकॉल तक का पालन नहीं करते। इसी तरह डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भी अफसरों के रवैये पर सवाल उठाए।



अब मुद्दा यह है कि यदि सत्ता और सरकार के शीर्ष स्तर से जुड़े नेताओं को ही अफसरों के रवैये को लेकर सवाल उठाने पड़ रहे हैं तो आम आदमी की शिकायतें किस स्तर तक पहुंच रही हैं और उनका समाधान कैसे हो रहा होगा...सहज ही समझा जा सकता है।



जेसीबी से फूल बरसेंगे या अब संगठन में सादगी चलेगी?

मध्यप्रदेश बीजेपी को नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब मिले हैं और शुरुआती बैठकों में ही उनके तेवर नजर आ गए हैं। प्रदेश बीजेपी की कोर ग्रुप बैठक के बाद संगठन में गुटबाजी को लेकर उनका अंदाज चर्चाओं में है। बिप्लब कुमार ने कहा कि संगठन में गुटबाजी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए जिला और संभाग प्रभारियों को तीन महीने की डेडलाइन दी गई है। पहले बातचीत और समझाइश से मतभेद दूर करने की कोशिश होगी। बात नहीं बनी तो संबंधित नेताओं के नाम और मोबाइल नंबर प्रदेश नेतृत्व को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।



बिप्लब कुमार ने प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में नेताओं के स्वागत के तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि होर्डिंग में नेताओं की बड़ी तस्वीरों के बजाय सरकारी योजनाओं को प्रमुखता दी जाए। महंगे गिफ्ट देने की परंपरा बंद हो और जेसीबी से फूल भी नहीं बरसने चाहिए। नए प्रदेश प्रभारी के यह मैसेज आने वाले दिनों में जमीन पर कितने दिखाई देंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।।



मध्यप्रदेश बीजेपी के नए प्रदेश प्रभारी बने बिप्लब कुमार देब

दिल्ली में मोहन और एजेंडे में जीआईएस

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव इस हफ्ते दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को जनवरी 2027 में मध्यप्रदेश में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में शामिल होने का न्योता दिया। बैठक में सीएम ने प्रदेश में निवेश का वातावरण बनाने, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। मोहन ने प्रधानमंत्री को प्रदेश में विभिन्न योजनाओं की प्रगति से भी अवगत कराया। इनमें 'विकास कल्पना वर्ष-2026' के दौरान किसानों के हित में लिए गए निर्णय, बलराम कृषि महोत्सव, सांदीपनि विद्यालयों की उपलब्धियां और सुगम परिवहन योजना शामिल हैं।



दिल्ली में मुख्यमंत्री मोहन यादव और एजेंडे में जीआईएस

गडकरी ने बसें भी दीं, आरटीओ को चेतावनी भी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का मध्यप्रदेश दौरा भी खास रहा। मुद्दा था प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई शुरुआत देना। गडकरी ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के साथ भोपाल में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा का शुभारंभ किया। दोनों नेताओं ने सात शहरों के लिए 351 बसों को हरी झंडी दिखाई। इनमें 120 इंटरसिटी और 231 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को जोड़ा गया है।



कार्यक्रम में बसों से ज्यादा चर्चा गडकरी की उस टिप्पणी की हुई, जिसमें उन्होंने आरटीओ अफसरों को सीधे चेतावनी दी है। गडकरी ने कहा कि बसों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार ने 1 सितंबर 2025 से नया बस बॉडी कोड लागू किया गया है। नए सेफ्टी रिजीम में वाहन पोर्टल पर डिजिटल चेकलिस्ट और फिजिकल इंस्पेक्शन के बिना बस का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा।



इसके बाद उन्होंने आरटीओ अफसरों को लेकर कहा कि कुछ अफसर 'गांधीवादी' हैं। गांधी के नोट दिखते हैं तो फटाफट ठप्पे मार देते हैं। गडकरी ने चेतावनी दी है कि गलत बस को पास किया तो नौकरी जाएगी। यानी बस सेवा के शुभारंभ के मंच से गडकरी ने परिवहन व्यवस्था के साथ-साथ उसकी निगरानी करने वाले सिस्टम को भी सीधा संदेश दे दिया।



राहुल बालाघाट पहुंचे, आदिवासियों के बीच जमीन पर बैठे

अब बात कांग्रेस की। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 12 दिन के भीतर दूसरी बार मध्यप्रदेश पहुंचे। इस बार उनका पड़ाव बालाघाट था। राहुल ने जगला गांव में बैगा आदिवासियों से जमीन पर बैठकर मुलाकात की। वे बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों से मिलने पहुंचे थे। एक घंटे की मुलाकात के बाद राहुल ने कहा कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं और उन्हें उनका हक मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में ऐसा नहीं हो रहा और केंद्र तथा राज्य सरकार ने आदिवासियों को बेसहारा छोड़ दिया है।



राहुल गांधी 12 दिन के भीतर दूसरी बार मध्यप्रदेश पहुंचे।

उन्होंने बीमारी से निपटने में राज्य सरकार को विफल बताया और कहा कि वे इस मुद्दे को लोकसभा में उठाएंगे। राहुल से मिलने आसपास के गांवों से करीब डेढ़ हजार लोग पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल पहुंचकर बच्चों से मिड-डे मील के बारे में भी जानकारी ली। बालाघाट जिले में पिछले तीन महीनों में कुपोषण और मलेरिया से करीब 30 आदिवासी बच्चों की मौत हुई है। कांग्रेस का दावा है कि मौतों की संख्या इससे ज्यादा है।



वहीं बीजेपी ने राहुल गांधी के दौरे को राजनीतिक माइलेज लेने की कवायद बताया है, लेकिन इस दौरे की राजनीतिक अहमियत को समझने के लिए एक आंकड़ा काफी है। मध्यप्रदेश में करीब डेढ़ करोड़ आदिवासी हैं। प्रदेश की कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत है। विधानसभा की 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। यानी मध्यप्रदेश की चुनावी राजनीति में जनजातीय इलाका ऐसा मैदान है, जहां पहुंचने की कोशिश हर बड़ी राजनीतिक ताकत करती है।



भागवत का इंदौर पड़ाव, फिर बालाघाट की राह

इसी बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भी मध्यप्रदेश में हैं। भागवत 2 से 6 अक्टूबर तक प्रदेश प्रवास पर रहेंगे। वे नागपुर से सड़क मार्ग से इंदौर पहुंचे हैं। इंदौर में 3 से 5 अक्टूबर तक आरएसएस की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक हो रही है। इसमें संघ के सभी 46 प्रांतों के पदाधिकारी शामिल होंगे।



मोहन भागवत का एमपी दौरा

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान होने वाली यह आखिरी बड़ी संगठनात्मक बैठकों में से एक है। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम 20 अक्टूबर, विजयादशमी तक चलेंगे। बैठक में पिछले एक साल के दौरान संघ की ओर से संचालित गतिविधियों की समीक्षा होगी। इसके साथ अगले एक साल की कार्ययोजना पर मंथन किया जाएगा। संगठन से जुड़े कई अन्य विषयों पर भी चर्चा होगी। इंदौर के बाद 6 अक्टूबर को भागवत बालाघाट के करंजा जाएंगे और स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। यानी एक ही समय में मध्यप्रदेश के दो शहर इंदौर और बालाघाट संघ की गतिविधियों के लिहाज से राष्ट्रीय फोकस में रहेंगे।



भोपाल का मास्टर प्लान आखिरकार बाहर आया

भोपाल डेवलपमेंट प्लान-2047 का ड्राफ्ट जारी हो गया है। दो दशक से ज्यादा समय से लंबित इस प्लान को लेकर लगातार सवाल उठते रहे थे। अब इसका ड्राफ्ट सार्वजनिक होने के बाद लोगों से दावे, आपत्तियां और सुझाव मांगे जा रहे हैं। इस प्लान में भोपाल के अगले दो दशकों से ज्यादा के विकास की दिशा तय करने की कोशिश की गई है। अब इसके बाद नजर इंदौर के मास्टर प्लान पर है। राज्य सरकार इंदौर का मास्टर प्लान भी जारी करने की तैयारी कर रही है। यानी प्रदेश के दो सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों की भविष्य की शहरी तस्वीर अब मास्टर प्लान के जरिए तय होने जा रही है।



दिवाली पर कर्मचारियों को डीए का तोहफा?

त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है और प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों की नजर अब सरकार के अगले फैसले पर है। सरकार दिवाली पर महंगाई भत्ते यानी डीए में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, 15 अक्टूबर के आसपास इसकी आधिकारिक घोषणा हो सकती है, ताकि नवंबर में दिवाली के दौरान बढ़ा हुआ डीए दिया जा सके।



अभी प्रदेश के कर्मचारियों को 58 प्रतिशत डीए देय है। प्रस्तावित 2 प्रतिशत बढ़ोतरी के बाद यह 60 प्रतिशत हो जाएगा। कर्मचारियों का इस साल 1 जनवरी से 2 प्रतिशत डीए लंबित है। इसे लेकर कर्मचारी संगठन लगातार मांग करते रहे हैं। अब सरकार ने बढ़े हुए डीए के भुगतान की तैयारी शुरू कर दी है और मुख्यमंत्री की ओर से जल्द घोषणा की उम्मीद है।



वित्त विभाग ने करीब 7.50 लाख कर्मचारियों को 2 प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई भत्ता देने पर होने वाले खर्च का हिसाब भी तैयार किया है। इससे सरकार पर हर महीने करीब 82 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा। वहीं, जनवरी से अक्टूबर तक 10 महीने के एरियर के भुगतान पर करीब 820 करोड़ रुपए का खर्च आएगा, जिसके लिए वित्तीय प्रावधान किया जाएगा।



फिलहाल 'राज्य की डायरी' में इतना ही...।



फिर मिलेंगे मध्यप्रदेश की नई हलचल, नई कहानी और नए सवालों के साथ।



नमस्कार...!

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