फिर खुल जाएंगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद बंद हुए चेकपोस्ट, हाईकोर्ट ने 30 दिन में खोलने के दिए आदेश

Neel Tiwari | Apr 22, 2026, 17:17 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश के बंद हुए परिवहन चेकपोस्ट को हाईकोर्ट ने 30 दिन में खोलने का आदेश दिया है। यह चेकपोस्ट भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद बंद किए गए थे।

News in short

  • हाईकोर्ट ने 30 दिन में चेकपोस्ट खोलने का आदेश दिया
  • 3 जनवरी 2023 के आदेश की अवमानना का मामला
  • 1 जुलाई 2024 से सरकार ने बंद किए थे सभी RTO नाके
  • अवैध वसूली रोकने के लिए लागू किया गया था नया सिस्टम
  • आदेश के बाद अब सरकार की नीति पर सवाल खड़े

Intro

मध्य प्रदेश में भारी भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद परिवहन चेकपोस्ट बंद करने के फैसले के बाद अब नया मोड़ आ गया है। हाईकोर्ट ने 30 दिन में सभी बंद चेकपोस्ट खोलने के आदेश दे दिए हैं। यह आदेश 3 जनवरी 2023 के फैसले की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान आया।



News in detail

कोर्ट ने दिया 30 दिन का अल्टीमेटम

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग को कड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि प्रदेश के सभी बंद चेकपोस्ट 30 दिनों के भीतर फिर से शुरू किए जाएं। कोर्ट ने साफ किया कि यह आदेश अनदेखा नहीं किया जा सकता और समयसीमा में पालन अनिवार्य होगा। यह निर्देश अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।





पुराने आदेश की अवमानना बना मुद्दा

दरअसल, यह मामला 3 जनवरी 2023 को दिए गए हाईकोर्ट के आदेश से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि उस आदेश के बावजूद चेकपोस्ट दोबारा चालू नहीं किए गए। इसी आधार पर अवमानना याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और विभाग से जवाब मांगा।



सरकार के फैसले से बंद हुए थे चेकपोस्ट

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 जुलाई 2024 से सभी अंतरराज्यीय सीमाओं पर स्थित परिवहन चेकपोस्ट (RTO नाके) बंद करने का बड़ा फैसला लिया था। इस निर्णय के पीछे मुख्य वजह लंबे समय से मिल रही अवैध वसूली की शिकायतें और ट्रांसपोर्टर्स का उत्पीड़न था, जिससे राज्य की छवि प्रभावित हो रही थी और माल ढुलाई में भी देरी होती थी।



“गुजरात मॉडल” पर लागू हुई नई व्यवस्था

सरकार ने पुराने चेकपोस्ट सिस्टम को खत्म कर “गुजरात मॉडल” अपनाया, जिसके तहत 45 नए रोड सेफ्टी और इंफोर्समेंट चेकिंग पॉइंट्स बनाए गए। इन पॉइंट्स पर स्थायी बैरियर नहीं रखे गए, बल्कि मोबाइल फ्लाइंग स्क्वॉड (उड़न दस्ते) तैनात किए गए, जिनमें परिवहन विभाग और होमगार्ड के जवान शामिल हैं।



ट्रांसपोर्टर्स ने किया था स्वागत

इस नई व्यवस्था को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बताया गया था। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे राज्य के विकास के लिए मील का पत्थर बताया था। सरकार का दावा था कि इससे ट्रक चालकों को राहत मिलेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।



अब कोर्ट के आदेश से बदली स्थिति

हालांकि, अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद पूरी स्थिति बदलती नजर आ रही है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तय समय में चेकपोस्ट खोलना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।



फैसले को लेकर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन में नाराजगी

मध्य प्रदेश में परिवहन विभाग के बंद किए गए चेकपोस्टों को पुनः खोलने के कोर्ट के निर्देश के खिलाफ ट्रांसपोर्ट संगठनों में तीव्र नाराजगी देखी जा रही है। ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर का कहना है कि जिन चेकपोस्टों को पहले भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के गंभीर आरोपों के चलते बंद किया गया था, उन्हें दोबारा शुरू करना सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों को कमजोर करता है।



उनका आरोप है कि इन नाकों के जरिए पूर्व में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ था, जिससे ट्रक मालिकों और चालकों को आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान होना पड़ता था। संगठनों के अनुसार, इस फैसले से परिवहन लागत बढ़ेगी, व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होंगी और ईमानदार कारोबारियों पर अनावश्यक दबाव पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट समुदाय ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया, तो देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।



नीति बनाम आदेश, क्या होगा अगला कदम?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार क्या इस आदेश के खिलाफ अपील करेगी या फिर हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार पुराने चेकपोस्ट दोबारा शुरू करेगी। इस मामले ने प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिस पर सबकी नजर टिकी हुई है।



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