मध्यप्रदेश में 348 करोड़ मंजूर, फिर भी यूनिफॉर्म राशि का इंतजार, दीपावली से पहले सरकारी स्कूलों के अनुदान पर सवाल
29 सितंबर को 348 करोड़ मंजूर, नवंबर में भी इंतजार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट ने 29 सितंबर को यूनिफॉर्म सहायता का फैसला किया था। पहली से आठवीं तक करीब 58 लाख विद्यार्थियों के लिए 348.07 करोड़ रुपए मंजूर हुए थे। हर पात्र विद्यार्थी को दो जोड़ी यूनिफॉर्म खरीदने के लिए 600 रुपए देने का प्रावधान है।
16 अक्टूबर की रिपोर्ट में करीब 56 लाख विद्यार्थियों को राशि नहीं मिलने की जानकारी मिली। एक नवंबर को शिक्षक कांग्रेस के पत्र ने भुगतान की धीमी प्रक्रिया फिर सामने रखी है। अलग तारीखों के ये आंकड़े वर्तमान भुगतान की अंतिम सरकारी स्थिति नहीं माने जा सकते हैं। मंजूरी के 33 दिन बाद भी संगठन यूनिफॉर्म राशि लंबित होने की शिकायत कर रहा था।
पहले टेंडर में उलझी ड्रेस, फिर सरकार ने बदला फैसला
सरकार ने पहले विद्यार्थियों तक सिली हुई यूनिफॉर्म पहुंचाने की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया। करीब 350 करोड़ रुपए की खरीद पर विवाद हुआ और जुलाई में अदालत से रोक लगी। इसके बाद सरकार ने तैयार यूनिफॉर्म की जगह DBT से राशि भेजने का निर्णय लिया। बैंक खातों और विद्यार्थियों के प्रोफाइल सत्यापन का काम पूरा नहीं होने से भुगतान अटका रहा। अक्टूबर में राज्य शिक्षा केंद्र ने प्रोफाइल अपडेट करके जल्द राशि देने की जानकारी दी थी। इस बीच राशि मिलने की निश्चित तारीख पर सार्वजनिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
अगस्त में शाला निधि के निर्देश, रखरखाव राशि पर सवाल
राज्य शिक्षा केंद्र ने 10 अगस्त को एकीकृत शाला निधि के खर्च संबंधी निर्देश जारी किए। नामांकन के आधार पर स्कूलों को दस हजार से एक लाख रुपए तक अनुदान तय है। अनुदान का न्यूनतम दस प्रतिशत हिस्सा स्कूलों की स्वच्छता पर खर्च करना अनिवार्य बताया गया है।
इसके बावजूद शिक्षक कांग्रेस का दावा है कि विद्यालयों को रखरखाव की राशि अभी नहीं मिली। यह स्पष्ट नहीं है कि कितने विद्यालयों का अनुदान लंबित है और कितनी राशि बाकी है। निर्देश जारी होना और स्कूलों तक वास्तविक School Grant पहुंचना दो अलग प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं।
प्रमुख सचिव समेत तीन अधिकारियों से मांगा हस्तक्षेप
मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस के प्रांताध्यक्ष नवनीत चतुर्वेदी ने प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा को पत्र भेजा है। उन्होंने लोक शिक्षण आयुक्त और राज्य शिक्षा केंद्र संचालक से राशि जारी करने का आग्रह किया। चतुर्वेदी के अनुसार, सत्र में जल्दी राशि मिलने से दीपावली पूर्व विद्यालयों की पुताई होती थी। भुगतान लंबित रहने से सफाई, रंगरोगन और जरूरी रखरखाव प्रभावित होने की आशंका उन्होंने जताई। उनका दावा पूरे प्रदेश से जुड़ा है, लेकिन विद्यालयवार भुगतान का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं है।
दीपावली में सरकारी स्कूलों की चमक पर संकट
दीपावली आठ नवंबर को है और विद्यालयों के पास तैयारियों के लिए सीमित दिन बचे हैं। संगठन ने छात्रों की यूनिफॉर्म राशि तथा विद्यालयों के आकस्मिक खर्च का भुगतान तत्काल मांगा है। शिक्षा विभाग की ओर से इस पत्र पर औपचारिक जवाब सार्वजनिक रूप से नहीं मिला है। विभाग यदि स्कूलवार Fund Release और यूनिफॉर्म भुगतान का विवरण जारी करे, तो स्थिति स्पष्ट होगी। मंजूरी और भुगतान के अंतर से सरकारी स्कूलों की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठे हैं।