मध्यप्रदेश में छठे राज्य वित्त आयोग का गठन: जयभान सिंह पवैया संभालेंगे कमान
News in Short
- जयभान सिंह पवैया को अध्यक्ष नियुक्त किया गया
- आयोग पंचायतों और नगरपालिकाओं के वित्तीय सुधार पर काम करेगा
- आयोग की सिफारिश 31 अक्टूबर 2026 तक प्रस्तुत की जाएगी
- आयोग को राज्य और स्थानीय निकायों के वित्तीय अधिकार पर विचार करना है
- आयोग ने पूंजीगत खर्च और वित्तीय नीति पर विचार करने का सुझाव दिया
News in Detail
BHOPAL. मध्यप्रदेश के राज्यपाल ने छठे राज्य वित्त आयोग का गठन किया है। इस आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया होंगे। आयोग का उद्देश्य पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति में सुधार लाना और उनके बीच संसाधनों का उचित वितरण सुनिश्चित करना है। आयोग राज्य और स्थानीय निकायों के वित्तीय अधिकारों और संसाधन आवंटन पर विचार करेगा।
राज्य वित्त आयोग का गठन
मध्यप्रदेश के राज्यपाल ने 19 मार्च 2026 को छठे राज्य वित्त आयोग का गठन किया है। इस आयोग का उद्देश्य पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति में सुधार लाना है। आयोग के अध्यक्ष के रूप में जयभान सिंह पवैया की नियुक्ति की गई है। उनके साथ के के. सिंह और वीरेन्द्र कुमार सदस्य होंगे।
आयोग का कार्यक्षेत्र और उद्देश्य
आयोग का मुख्य कार्य पंचायतों और नगरपालिकाओं के वित्तीय अधिकारों का पुनर्विलोकन करना है। आयोग संसाधनों के वितरण और वित्तीय सुधार के लिए सिफारिशें प्रस्तुत करेगा। इसके अंतर्गत राज्य और स्थानीय निकायों के बीच करों, शुल्कों और राजस्व के वितरण को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
आयोग की सिफारिशें और समयसीमा
आयोग को 31 अक्टूबर 2026 तक अपनी सिफारिशें राज्यपाल को प्रस्तुत करनी होंगी। आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि पंचायतों और नगरपालिकाओं को वित्तीय सहायता अनुदान मिलने में कोई बाधा न हो। इसके अलावा, यह भूमि करों, शुल्कों और विकास शुल्कों के उचित बंटवारे पर भी विचार करेगा।
स्थानीय निकायों के लिए विशेष सिफारिशें
आयोग को पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए विशेष सिफारिशें करने का निर्देश दिया गया है। इसमें पर्यावरण संरक्षण कार्यों को बढ़ावा देने और जन-सुविधाओं के संचालन के लिए सिफारिशें शामिल होंगी।
आयोग के फैसलों का प्रभाव
राज्य वित्त आयोग के फैसले पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति पर महत्वपूर्ण असर डालेंगे। इन सिफारिशों से स्थानीय निकायों की कार्यकुशलता और जनता तक पहुंच में सुधार होगा। आयोग का उद्देश्य पंचायतों और नगरपालिकाओं की आत्मनिर्भरता और वित्तीय स्थिति को मजबूत करना है।
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