स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल, बढ़े बिजली बिल और देश की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

Dablu Kumar | Aug 30, 2025, 10:27 IST
Smart meter ajay singh rahul
कांग्रेस नेता अजय सिंह ने स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट में सुरक्षा खतरों और घटिया सामग्री की आपूर्ति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इसकी जांच की मांग की है।

मध्य प्रदेश में बिजली के पुराने मीटरों को हटाया जा रहा है। साथ ही, अब उनकी जगह पर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इस बदलाव को लेकर आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ विधायक भी चिंतित हैं। कांग्रेस के विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह उर्फ राहुल भैया ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव से सऊदी अरब की कंपनी अल्फानार इंडिया की ओर से लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों की जांच की मांग की है।



सुरक्षा को लेकर सवाल

अजय सिंह ने सवाल उठाया कि क्या ठेका देने से पहले मुख्यमंत्री को विश्वास में लिया गया था? यदि ऐसा हुआ है तो सरकार को इस मुद्दे को श्वेत पत्र के माध्यम से प्रदेश की जनता तक पहुंचाना चाहिए।



कांग्रेस नेता को क्यों है शक

अजय सिंह ने कहा कि शक इस वजह से और गहरा हो गया है क्योंकि कंपनी ने सरकारी बोली से चार हजार करोड़ रुपये कम में ठेका लिया। सरकारी बोली 15 करोड़ 70 लाख 26 हजार रुपये की थी, जबकि कंपनी ने मात्र 11 करोड़ 63 लाख 40 हजार रुपये में ही ठेका ले लिया। इस भारी अंतर का कारण केवल सिस्टम में प्रवेश पाने के लिए सोची-समझी रणनीति नजर आ रही है।



स्मार्ट मीटर पर कांग्रेस के लगाए गए आरोपों वाली खबर पर एक नजर

  • अजय सिंह ने स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट की जांच की मांग की, क्योंकि कंपनी के अधिकारी पाकिस्तानी मूल के हैं।
  • कंपनी ने सरकारी बोली से कम में ठेका लिया, जिससे घटिया सामग्री की आशंका जताई गई।
  • इंदौर में अयोग्य घोषित होने के बावजूद कंपनी को अन्य स्थानों पर काम दिया गया।
  • स्मार्ट मीटर की सामग्री चीन से आयात हो रही है, जबकि असेंबलिंग भारत में हो रही है।
  • इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम ने साइबर हमलों और सुरक्षा खतरे की चेतावनी दी है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के काम से यह स्पष्ट है कि घटिया सामग्री प्रदान की जाएगी। अल्फानार कंपनी के पास सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट या डेटा मैनेजमेंट का कोई अनुभव नहीं है। इस काम को कंपनी ने यूएई की एस्यासॉफ्ट टेक्नोलॉजी कंपनी को सौंपा है। इसमें पाकिस्तानी अधिकारी कार्यरत है। अजय सिंह ने यह सवाल उठाया कि इन अधिकारियों की उपभोक्ताओं के डेटा तक पहुंच राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं बन सकती?



इंदौर में कंपनी को किया गया है अयोग्य घोषित- अजय सिंह

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि इंदौर में कंपनी को अयोग्य घोषित किए जाने के बावजूद अन्य स्थानों में उसे काम क्यों सौंपा गया? प्रदेश के विभिन्न स्थानों से स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायतें आ रही हैं। और मीडिया के माध्यम से विस्फोट होने और आग लगने की कई घटनाओं की खबरें भी सामने आ रही हैं।



अजय सिंह ने कहा कि स्मार्ट मीटर की सामग्री चीन से आयात हो रही है। वहीं, केवल असेंबलिंग भारत में की जा रही है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि एक ओर प्रधानमंत्री स्वदेशी अपनाने की बात करते हैं। वहीं, दूसरी ओर आयातित सामान का उपयोग किया जा रहा है। अजय सिंह ने बोली मूल्यांकन में शामिल सभी अधिकारियों की संपत्तियों और परिसंपत्तियों की ईओडब्ल्यू से जांच कराने की मांग की।



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पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने आगे कहा कि अल्फानार और एस्यासॉफ्ट के सभी परिचालन केंद्रों का राष्ट्रीय सुरक्षा ऑडिट भी कराया जाए। इसके साथ ही उन्होंने घटिया मीटर की आपूर्ति पर तत्काल रोक लगाने की अपील की। क्योंकि, यह मामला देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि पहलगाम हमले के बाद से हमें विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए।



अजय सिंह ने उठाए गंभीर सवाल

अजय सिंह ने कहा कि इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिखकर स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट में भाग ले रही खाड़ी देशों की विदेशी कंपनियों को ठेका देने पर डाटा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। फोरम ने साइबर हमलों के खतरे की भी चेतावनी दी है। गौरतलब है कि, अल्फानार इंडिया ने मध्यप्रदेश डिस्कॉम भोपाल और जबलपुर से लगभग दो मिलियन स्मार्ट मीटर लगाने के लिए दो परियोजनाएं प्राप्त की हैं।



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ये परियोजनाएं स्मार्ट मीटरिंग तकनीकी के साथ-साथ ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को मॉडर्न करने के लिए भारत की राष्ट्रीय पहल का हिस्सा हैं, इसमें मध्य प्रदेश एक प्रमुख क्षेत्र है। भारत का लक्ष्य 2025 के अंत तक 250 मिलियन मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटरों से बदलना है।



FAQ

  1. क्या अजय सिंह ने स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट की जांच क्यों मांगी?
    अजय सिंह ने स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट की जांच इस वजह से मांगी क्योंकि कंपनी के अधिकारी पाकिस्तानी मूल के हैं और उन्होंने चिंता जताई कि इससे नागरिकों का डेटा दुरुपयोग हो सकता है।
  2. क्या कंपनी को ठेका देने से पहले मुख्यमंत्री को विश्वास में लिया गया था?
    अजय सिंह ने सवाल किया है कि क्या मुख्यमंत्री को ठेका देने से पहले विश्वास में लिया गया था। उन्होंने इस मामले को श्वेत पत्र के माध्यम से प्रदेश की जनता तक पहुंचाने की मांग की है।

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