अनुपूरक बजट: मध्य प्रदेश सरकार की खर्चों पर सख्ती, मंत्रियों और अफसरों के नए वाहनों की खरीद पर लगी रोक
अनुपूरक बजट क्या होता है?
अनुपूरक बजट यानी सप्लीमेंट्री बजट। यह मुख्य बजट के बाद आने वाला अतिरिक्त खर्च का प्रस्ताव होता है। जब किसी काम के लिए पैसा कम पड़ता है, तब सरकार इसे लाती है। नई जरूरतों के लिए भी इसका इस्तेमाल होता है। इसे विधानसभा से पास कराना पड़ता है। इस साल का मुख्य बजट 18 फरवरी 2026 को उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने पेश किया था। पीआरएस (PRS Legislative Research) ने इस बजट का विश्लेषण किया है। इसके मुताबिक कुल खर्च का लक्ष्य तीन लाख 88 हजार 923 करोड़ रुपए है। यह आंकड़ा कर्ज चुकाने का खर्च छोड़कर है।
क्या-क्या खर्च रुकेंगे?
रोक सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं है। दफ्तरों की साज-सज्जा पर होने वाला खर्च भी रुकेगा। महंगे उपकरणों की खरीद भी नहीं होगी। अनावश्यक यात्राओं पर भी पाबंदी रहेगी। जिन खर्चों की भरपाई विभाग अपनी बचत से कर सकते हैं, वे भी अभी नहीं होंगे। यहां बचत का मतलब विभाग की मौजूदा योजनाओं में बची राशि है। जिन खर्चों के लिए अतिरिक्त बजट चाहिए, उन्हें भी अनुमति नहीं मिलेगी।
मध्य प्रदेश सरकार का संदेश साफ है। अभी सिर्फ जरूरी काम आगे बढ़ेंगे।
22 अक्टूबर तक मांगे प्रस्ताव
वित्त विभाग ने सभी विभागों से प्रस्ताव मांगे हैं। इन्हें 22 अक्टूबर तक ऑनलाइन भेजना है। यह काम आईएफएमएस (Integrated Financial Management System) के जरिए होगा। यह सरकार की ऑनलाइन वित्तीय प्रबंधन प्रणाली है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक वित्त विभाग पहले सभी प्रस्तावों की जांच करेगा। फिर उपलब्ध संसाधनों के आधार पर जरूरी प्रावधान तय होंगे।
किन मदों को मिलेगी जगह?
द्वितीय अनुपूरक बजट में सिर्फ चुनिंदा और अति-आवश्यक मदें होंगी। इनमें वे मामले आएंगे, जिन्हें आकस्मिकता निधि से पहले ही अग्रिम मंजूरी मिल चुकी है। आकस्मिकता निधि यानी आपात जरूरतों के लिए अलग रखा गया सरकारी फंड। केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता से जुड़े मामले भी शामिल हो सकते हैं।
अतिरिक्त पैसे की मांग करने वाली नई योजनाओं को अनुमति नहीं मिलेगी।
प्रस्ताव तैयार करने में भी सख्ती रहेगी। बिना सक्षम प्रशासनिक मंजूरी वाले प्रस्ताव अधूरे माने जाएंगे। पूरा ब्योरा न देने वाले प्रस्ताव भी खारिज होंगे। यानी विभागों को कागजी तैयारी पूरी रखनी होगी।
पहले बजट में क्या था?
इस साल का पहला अनुपूरक बजट जुलाई में आया था। इसमें कुल 7765.77 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया। राजस्व मद में 907.59 करोड़ रुपए थे। पूंजीगत मद में 6858.18 करोड़ रुपए रखे गए। पूंजीगत मद का मतलब सड़क, पुल और इमारत जैसी स्थायी संपत्ति पर होने वाला खर्च है।
लोक निर्माण विभाग को सड़क, पुल और रेलवे ओवर ब्रिज के लिए 1,300 करोड़ रुपए दिए गए थे। कृषि विभाग को 352.69 करोड़ रुपए मिले। इनमें भावांतर और फ्लैट रेट योजना के लिए 313.18 करोड़ रुपए थे। पुलिस आधुनिकीकरण के लिए भी 58.52 करोड़ रुपए का प्रावधान हुआ था।
सरकार सख्ती क्यों बरत रही है?
रिपोर्ट में रोक का कारण अलग से नहीं बताया गया है। लेकिन संकेत साफ हैं। सरकार सीमित पैसे को जरूरी कामों पर लगाना चाहती है, ऐसा लगता है। जुलाई के अनुपूरक बजट में ही हजारों करोड़ रुपए का प्रावधान हो चुका है।
मुख्य बजट पर नजर डालें तो राजस्व खर्च तीन हजार आठ हजार 659 करोड़ रुपए रखा गया है। इसमें वेतन, पेंशन, ब्याज और सब्सिडी जैसे खर्च आते हैं। पूंजीगत खर्च 78 हजार 920 करोड़ रुपए तय हुआ है। खर्च पूरा करने के लिए 71 हजार 753 करोड़ रुपए का शुद्ध कर्ज भी लेना है। ऐसे में हर नया खर्च सोच-समझकर तय करना जरूरी हो जाता है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर 22 अक्टूबर की समय सीमा पर है। उसके बाद वित्त विभाग प्रस्तावों की जांच शुरू करेगा। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक शीतकालीन सत्र दिसंबर के पहले सप्ताह में होना है। तभी द्वितीय अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। तब तक विभागों को हर खर्च संभलकर करना होगा।
इस रिपोर्ट में किसी मंत्री या अधिकारी का सीधा बयान नहीं है। जानकारी वित्त विभाग की तैयारियों और निर्देशों पर आधारित है। कोई आधिकारिक बयान आने पर तस्वीर और साफ होगी।