महाशिवरात्रि पर लगातार 44 घंटे खुला रहेगा महाकाल का दरबार, विदेशी फूलों से सजेगा मंदिर
Kaushiki | Feb 14, 2026, 13:38 IST
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44 घंटे नॉनस्टॉप दर्शनImage credit : Kaushiki
इस साल महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी सुबह 6 बजे से लेकर 16 फरवरी तक मंदिर के पट लगातार 44 घंटे खुले रहेंगे। इस दौरान श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांग सकेंगे।
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सिंगापुर-हांगकांग के फूलों से श्रृंगारImage credit : Kaushiki
महाकाल मंदिर को सिंगापुर, हांगकांग और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से मंगाए गए 40 प्रजातियों के फूलों से सजाया जा रहा है। बेंगलुरु के 200 कलाकार दिन-रात मेहनत करके नंदी हॉल और गर्भगृह को हवाई मार्ग से आए इन खास फूलों से बेहद खूबसूरत रूप दे रहे हैं।
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चारों प्रहर की विशेष पूजाImage credit : Kaushiki
महाशिवरात्रि पर्व (महाकाल का दरबार) के दिन और रात के चारों प्रहर में महादेव की विशेष आराधना और अभिषेक किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और शिव नाम का जाप करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
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साल में एक बार दोपहर की भस्म आरतीImage credit : Kaushiki
16 फरवरी को शिव नवरात्रि के समापन पर दोपहर 12 बजे विशेष भस्म आरती की जाएगी। पूरे साल में केवल महाशिवरात्रि के अगले दिन ही बाबा महाकाल की भस्म आरती दोपहर में आयोजित करने की परंपरा है।
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महाशिवरात्रि का त्योहारImage credit : Kaushiki
कल 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। ऐसे में उज्जैन के बाबा महाकाल के दरबार से जुड़ी ये जानकारी हर शिव भक्त के लिए बहुत खास है। महाकाल मंदिर में इस बार आस्था का सैलाब उमड़ने वाला है। आइए जानें बाबा महाकाल के दर्शन और शिव नवरात्रि से जुड़ी मुख्य बातें।
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शिव नवरात्रि का खास उत्सवImage credit : Kaushiki
उज्जैन में महाशिवरात्रि से 9 दिन पहले (6 फरवरी से) शिव नवरात्रि शुरू हो चुकी थी। ये महादेव के विवाह उत्सव के रूप में मनाई जाती है। मान्यता है कि माता पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए इन्हीं 9 दिनों में कठिन तपस्या की थी।
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बाबा का भव्य सेहरा दर्शनImage credit : Kaushiki
दोपहर की भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल को फलों, फूलों और सात तरह के अनाजों से बना सुंदर सेहरा सजाया जाएगा। ये अद्भुत दृश्य देखने के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु उज्जैन नगरी पहुंचते हैं।
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दक्षिण भारत के नटराज मंदिर की अनूठी थीमImage credit : Kaushiki
इस बार मंदिर की सजावट दक्षिण भारत के प्रसिद्ध नटराज मंदिर की थीम पर की जा रही है, जो पूरी तरह प्राकृतिक होगी। पिछले 12 वर्षों से यह सेवा दे रहे कृष्णमूर्ति रेड्डी की टीम लाखों की लागत से मंदिर को एक दिव्य और अलौकिक स्वरूप दे रही है।