इस बार खास होगी बाबा महाकाल की दिवाली, पांच दिन दीपों से जगमगाएगा मंदिर, जानें पांच दिन के उत्सव की खास बातें
इस साल दिवाली के त्योहारों की तारीखों में थोड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। महाकाल मंदिर में 6 नवंबर को धनतेरस, 8 नवंबर को दिवाली और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा मनाई जाएगी। यानी प्रमुख त्योहारों के बीच एक-एक दिन का अंतर रहेगा। हालांकि, मंदिर में दीपोत्सव की रौनक लगातार पांच दिनों तक बनी रहेगी।
सबसे खास आयोजन 8 नवंबर को होने वाली भस्म आरती में होगा। इस दिन सुबह 4 बजे भगवान महाकाल की विशेष पूजा की जाएगी। बाबा को हल्दी और चंदन लगाने के बाद गर्म जल से स्नान कराया जाएगा। इसके साथ ही अन्नकूट का भोग और विशेष श्रृंगार होगा।
महाकाल मंदिर में पांच दिन तक चलेगा दीपोत्सव
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में दिवाली हर साल खास तरीके से मनाई जाती है। इस बार भी मंदिर प्रशासन और पुजारी तैयारियों में जुटे हैं। धनतेरस से लेकर गोवर्धन पूजा तक मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम होंगे। पांच दिनों तक भगवान महाकाल की आरती के दौरान फुलझड़ियां जलाई जाएंगी।
मंदिर परिसर को आकर्षक फूलों, दीपकों और रंगोली से सजाया जाएगा। इसके अलावा बिजली की रोशनी से पूरे मंदिर को जगमगाया जाएगा। भक्तों को इन दिनों बाबा महाकाल के विशेष श्रृंगार और पूजा के दर्शन करने का अवसर मिलेगा।
इस बार त्योहारों की तारीखों में क्यों है अंतर
महाकाल मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों के लिए ग्वालियर के पंचांग को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी पंचांग के आधार पर मंदिर में कई प्रमुख पूजा और उत्सव आयोजित होते हैं। इस बार पंचांग में तिथियों की घट-बढ़ के कारण त्योहारों के बीच अंतर आया है।
मंदिर की परंपरा के मुताबिक, 6 नवंबर को धनतेरस की विशेष पूजा होगी। इसके बाद 8 नवंबर को दिवाली और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा आयोजित की जाएगी। यानी एक दिन प्रमुख उत्सव होगा और अगले दिन अंतर रहेगा। हालांकि, मंदिर में पूरे पांच दिन दिवाली की सजावट और उत्सव का माहौल बना रहेगा।
6 नवंबर को महाकाल को चढ़ाए जाएंगे चांदी के सिक्के
महाकाल मंदिर में 6 नवंबर को धनतेरस की विशेष पूजा होगी। इस दिन मंदिर की पुरोहित समिति भगवान महाकाल का विशेष पूजन करेगी। पूजा के दौरान बाबा महाकाल को चांदी के सिक्के अर्पित किए जाएंगे। इसके साथ ही देश, प्रदेश और उज्जैन की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाएगी।
पुरोहित समिति के अध्यक्ष के मुताबिक, ग्वालियर के पंचांग में 6 नवंबर को धनत्रयोदशी की पूजा का दिन बताया गया है। इसी आधार पर मंदिर में धनतेरस की महापूजा करने का निर्णय लिया गया है।
हालांकि, महाकाल मंदिर के कैलेंडर में 6 नवंबर को कार्तिक कृष्ण द्वादशी और प्रदोष व्रत का उल्लेख है। इस कारण पंचांग और मंदिर कैलेंडर में तिथियों का अंतर दिखाई देता है।
8 नवंबर को सुबह मनेगी बाबा महाकाल की दिवाली
महाकाल मंदिर में दीपावली का सबसे खास आयोजन 8 नवंबर को होगा। इस दिन रूप चौदस पर सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में दीपोत्सव मनाया जाएगा। भगवान महाकाल की विशेष पूजा की जाएगी। सबसे पहले बाबा को हल्दी और चंदन से स्नान कराया जाएगा।
इसके बाद भगवान महाकाल को गर्म जल से स्नान कराने की परंपरा शुरू होगी। यह महाकाल मंदिर की खास परंपराओं में शामिल है। सर्दियों के दौरान भगवान महाकाल को गर्म जल से स्नान कराने की व्यवस्था की जाती है।
इसके बाद बाबा का विशेष श्रृंगार होगा। भगवान महाकाल को सोने और चांदी के आभूषणों से सजाया जाएगा। पूजा के दौरान फुलझड़ियों की रोशनी में आरती होगी। भक्तों को महाकाल के सजे हुए स्वरूप के दर्शन करने का अवसर मिलेगा।
दिवाली पर बाबा महाकाल को लगेगा अन्नकूट का भोग
8 नवंबर को भगवान महाकाल की पूजा में अन्नकूट का भोग भी लगाया जाएगा। अन्नकूट में अलग-अलग प्रकार के खाद्य पदार्थों का भोग लगाया जाता है। यह मंदिर की विशेष धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
दिवाली के मौके पर बाबा महाकाल को विशेष रूप से सजाया जाएगा। मंदिर में दीपों और फुलझड़ियों के बीच आरती की जाएगी। इस दिन होने वाली भस्म आरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगी।
10 नवंबर को होगी गोवर्धन और गोवंश की पूजा
दिवाली के बाद 10 नवंबर को महाकाल मंदिर समिति गोवर्धन पूजा का आयोजन करेगी। इस दिन ग्राम चिंतामन स्थित वैदिक शोध संस्थान की महाकालेश्वर गोशाला में विशेष पूजा होगी।
यहां गोवर्धन के साथ गायों और अन्य गोवंश का पूजन किया जाएगा। पूजा के दौरान वेदपाठी बटुक वैदिक मंत्रों का पाठ करेंगे। इसके अलावा महाकाल मंदिर के मुख्य द्वार पर भी गोवर्धन बनाया जाएगा। यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी। यह आयोजन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के अवसर पर किया जाएगा।
दिवाली पर महाकाल मंदिर में क्या होगा खास?
इस बार महाकाल मंदिर में दीपावली के दौरान कई विशेष आयोजन होंगे। भगवान महाकाल के आंगन को दीपकों और फूलों से सजाया जाएगा। मंदिर में पांच दिनों तक फुलझड़ियों से आरती की परंपरा निभाई जाएगी।
धनतेरस पर चांदी के सिक्के अर्पित होंगे। दिवाली पर बाबा का गर्म जल से अभिषेक और विशेष श्रृंगार किया जाएगा। इसके अलावा अन्नकूट का भोग लगाया जाएगा। गोवर्धन पूजा के दिन गोवंश का विशेष पूजन होगा। इस तरह महाकाल मंदिर में धनतेरस से गोवर्धन पूजा तक अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
FAQs:
- महाकाल मंदिर में इस साल दिवाली कब मनाई जाएगी?
महाकाल मंदिर में इस साल दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। - धनतेरस पर महाकाल मंदिर में क्या विशेष पूजा होगी?
धनतेरस पर महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल को चांदी के सिक्के चढ़ाए जाएंगे और विशेष पूजा की जाएगी। - गोवर्धन पूजा कब और कैसे मनाई जाएगी महाकाल मंदिर में?
गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को महाकाल मंदिर में होगी, जिसमें गोवंश का विशेष पूजन किया जाएगा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी।