सावन के दूसरे सोमवार को चंद्रमोलेश्वर स्वरुप में निकले बाबा महाकाल, उमड़ा जनसैलाब
समझें क्या है पूरा मामला
- उज्जैन में बाबा महाकाल की दूसरी शाही सवारी निकली।
- बाबा चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में पालकी पर विराजे।
- झाबुआ कलाकारों ने लोक नृत्य की प्रस्तुति दी।
- सशस्त्र पुलिस बल ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
- सावन-भादौ में छह सवारियां निकलेंगी।
सावन के दूसरे सोमवार पर उज्जैन एक बार फिर शिव भक्ति में डूब गया। बाबा महाकाल की दूसरी शाही सवारी पूरे वैभव और श्रद्धा के साथ निकली। चांदी की पालकी में चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में विराजित बाबा महाकाल ने नगर भ्रमण किया। सवारी मार्ग पर हजारों श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर बाबा का स्वागत किया।
पूजन के बाद निकली सवारी
सवारी शुरू होने से पहले महाकाल मंदिर के सभा मंडप में भगवान चंद्रमोलेश्वर का विधि-विधान से पूजन हुआ। मंत्री विजय शाह, संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रोशन सिंह और एसपी (SP – Superintendent of Police) प्रदीप शर्मा ने पूजा में हिस्सा लिया। पंडित घनश्याम पुजारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन संपन्न कराया।
इसके बाद बाबा महाकाल को चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में रजत पालकी में विराजित किया गया। मन महेश स्वरूप हाथी पर सवार रहे। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बना।
गार्ड ऑफ ऑनर से हुआ स्वागत
जैसे ही पालकी मंदिर परिसर से बाहर निकली, सशस्त्र पुलिस बल ने सलामी दी। "जय महाकाल" और हर-हर महादेव के जयघोष से माहौल गूंज उठा। मंदिर परिसर से सवारी मार्ग तक भक्ति का खास माहौल रहा।
लोक नृत्य बना सवारी की जान
इस बार सवारी की विशेष थीम लोक नृत्य रही। झाबुआ से आए कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य प्रस्तुत किया। अलग-अलग भजन मंडलियों ने भी माहौल को भक्तिमय बनाए रखा। महाकाल मंदिर बैंड और पुलिस बैंड भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।
एलईडी रथ से हुए दर्शन
मंदिर प्रबंध समिति ने सवारी का सीधा प्रसारण सोशल मीडिया पर किया। इसके अलावा छह एलईडी (LED – Light Emitting Diode) रथों से भी लाइव प्रसारण हुआ। इससे अधिक से अधिक श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन कर सके।
शिप्रा तट पर हुआ अभिषेक
परंपरा अनुसार सवारी महाकाल चौराहा, गुदरी, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। यहां शिप्रा नदी के जल से भगवान महाकाल का पूजन और अभिषेक हुआ। वैदिक मंत्रों की गूंज में पूरा शिप्रा तट डूब गया। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए वापस महाकाल मंदिर पहुंची।
आगे भी निकलेंगी सवारियां
सावन-भादौ में बाबा महाकाल की कुल छह प्रमुख सवारियां निकलेंगी। पहली सवारी 3 अगस्त को निकली थी, दूसरी आज 10 अगस्त को निकाली गई। इसके बाद 17, 24 और 31 अगस्त को सवारियां होंगी। अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर को निकलेगी।
देशभर के मंदिरों में उमड़ी आस्था
सावन के दूसरे सोमवार पर सिर्फ उज्जैन ही नहीं, देशभर के शिव मंदिरों में भीड़ उमड़ी। काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम तक जलाभिषेक हुआ। उज्जैन में सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया। इसके बाद शाम को दूसरी सवारी निकाली गई।
FAQ
- उज्जैन में बाबा महाकाल की दूसरी सवारी कब निकली?
सावन के दूसरे सोमवार, 10 अगस्त को दूसरी सवारी निकाली गई। इसमें बाबा महाकाल चंद्रमोलेश्वर स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले। - सावन में कुल कितनी सवारियां निकलेंगी?
सावन-भादौ में कुल छह सवारियां निकलेंगी। आखिरी राजसी सवारी 7 सितंबर को निकाली जाएगी।
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