महाकाल भस्म आरती: अश्विन मास की प्रतिपदा पर भांग-चंदन से हुआ महाकाल का श्रृंगार
Mahakal Bhasma Aarti: उज्जैन नगरी के राजा भगवान महाकाल का रूप सबसे अनोखा माना गया है। यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक बहुत खास स्थान रखता है। पूरे देश में केवल यहीं पर रोजाना तड़के भस्म आरती होती है।
भगवान महाकाल को काल का स्वामी भी माना जाता है। मान्यता है कि इनके दर्शन से सभी दुख दूर हो जाते हैं। उज्जैन की पावन भूमि पर महाकाल स्वयं विराजमान रहते हैं।
यहां आने वाला हर भक्त खाली हाथ वापस कभी नहीं लौटता है। बाबा महाकाल अपने भक्तों की हर एक मनोकामना पूरी करते हैं। मंदिर में हर रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
तड़के होने वाली आरती का नजारा बहुत ही ज्यादा दिव्य होता है। इस समय पूरे मंदिर परिसर में अलग ही ऊर्जा देखने को मिलती है। भक्तों के जयकारों से पूरी उज्जैन नगरी गूंज उठती है।
महाकाल भस्म आरती में बाबा का अद्भुत रूप
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रविवार (27 सितंबर) तड़के 3:00 बजे भस्म आरती हुई।
भस्म आरती से पहले सभा मंडप में वीरभद्र जी के कान में स्वस्ति वाचन किया गया। इसके बाद घंटी बजाकर भगवान से अनुमति ली गई और सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए
गर्भगृह के पट खुलने के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का श्रृंगार उतारा। फिर पंचामृत से पूजन किया गया और कर्पूर आरती हुई।इसके बाद नंदी हाल में नंदी जी का स्नान कराया गया और विधि-विधान से पूजा की गई।
भगवान महाकाल का पहले जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का पूजन किया गया।
भस्म आरती में कैसे लें ऑनलाइन भाग
अगर आप भी इस आरती में जाना चाहते हैं तो तैयारी करें। मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आप बुकिंग कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपना पहचान पत्र देना अनिवार्य होता है।
आरती की बुकिंग के लिए कोई भी फर्जी ऐप इस्तेमाल न करें। केवल आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही पास की बुकिंग कराएं। सुबह जल्दी पहुंचकर लाइन में लगना जरूरी होता है।
मंदिर प्रशासन भक्तों की सुविधा का पूरा ध्यान हमेशा रखता है। यहाँ बुजुर्गों और बच्चों के लिए अलग व्यवस्था रहती है। दर्शन के बाद परिसर में शांति का अनुभव होता है।
महाकाल मंदिर में प्रवेश के कुछ कड़े नियम बनाए गए हैं। गर्भगृह में जाने के लिए पारंपरिक कपड़े पहनना जरूरी है। नियमों का पालन करके आप आसानी से दर्शन पा सकते हैं।
आरती के दौरान मिलने वाला हरिओम जल बहुत पवित्र होता है। भक्त इसे प्रसाद के रूप में अपने घर ले जाते हैं। मान्यता है कि यह जल बीमारियों से मुक्ति दिलाता है। भस्म आरती की परंपरा | उज्जैन भस्म आरती | mahakal bhasm aarti