रीवा EOW की मैहर में बड़ी कार्रवाई, 111 अपात्रों के फर्जी BPL कार्ड घोटाले का पर्दाफाश
समझें क्या है पूरा मामला
- मैहर में बड़ा BPL सूची घोटाला सामने आया।
- 111 अपात्र लोगों के नाम सूची में जोड़े गए।
- गड़बड़ी 2018 से लगातार चल रही थी।
- बिना मंजूरी नाम जोड़कर लाभ दिया गया।
- EOW ने 6 अधिकारियों पर केस दर्ज किया।
कैसे मिली शिकायत
EOW के प्रकोष्ठ मुख्यालय रीवा को शिकायत मिली थी। शिकायत में बताया गया था कि मैहर जनपद पंचायत में नियमों को ताक पर रखकर अपात्र लोगों के नाम BPL सूची में जोड़े जा रहे हैं। एक ही BPL क्रमांक पर दो-दो लोगों के नाम दर्ज किए गए थे। शिकायत की जांच में ये आरोप सही पाए गए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तय आदेशों का पालन नहीं किया गया था।
जांच में क्या-क्या मिला
EOW की जांच में तीन बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं। पहली गड़बड़ी यह थी कि पटवारी सर्वे रिपोर्ट और तहसीलदार के सत्यापन के बिना नाम जोड़े गए। दूसरी बात यह कि कुल 111 अपात्र लोगों को फर्जी BPL CARD (Below Poverty Line) प्रमाण पत्र जारी किए गए। तीसरी और सबसे गंभीर बात यह कि ये लोग 2018 से लेकर अब तक सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते रहे।
नियम क्या कहता है?
BPL सूची में किसी का नाम जोड़ने के लिए पहले पटवारी सर्वे जरूरी है। फिर तहसीलदार की लिखित अनुशंसा या आदेश चाहिए। इसके बाद ही जनपद पंचायत कोई नाम सूची में शामिल कर सकती है। मैहर में यह पूरी प्रक्रिया नजरअंदाज की गई।
इन 6 पर दर्ज हुआ मामला
EOW ने जांच के बाद 6 अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वेदमणि मिश्रा और आरएन शर्मा दोनों ही जनपद पंचायत मैहर के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी रह चुके हैं। प्रेमलाल गौतम तत्कालीन सहायक विकास विस्तार अधिकारी थे। सुदामा प्रसाद चौरसिया तत्कालीन विकास खण्ड अधिकारी थे। दीपक मिश्रा तत्कालीन BPL प्रभारी थे। रामसुन्दर मिश्रा वर्तमान BPL प्रभारी हैं।
किन धाराओं में मामला दर्ज?
इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (आपराधिक विश्वासघात) और 120-बी (षड्यंत्र) के तहत केस दर्ज किया गया है। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)ए और 13(2) भी लगाई गई हैं।
गरीबों का हक गया अपात्रों को
यह घोटाला सिर्फ कागजी नहीं था। BPL कार्ड से प्रधानमंत्री आवास, राशन, छात्रवृत्ति और कई अन्य योजनाओं का लाभ मिलता है। 111 अपात्र लोग 2018 से यह सब हासिल करते रहे। इससे एक तरफ सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। दूसरी तरफ जो असली गरीब हैं उनका हक मारा गया। EOW ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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