Auto Brewery Syndrome: बिना शराब पिए शख्स को हो रहा नशा, वजह जान चौंक जाएंगे आप

Manya Jain | May 31, 2026, 17:20 IST
Auto Brewery Syndrome
दुनिया में एक ऐसी दुर्लभ बीमारी मिली है जिससे इंसान बिना शराब पिए भी नशे में रहता है। ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम नाम की इस बीमारी में पेट के अंदर खुद एल्कोहल बनने लगती है। एक शख्स इस समस्या से 10 साल तक परेशान रहा।

समझें पूरा मामला...

  • बिना शराब छुए एक व्यक्ति पूरे 10 साल तक नशे में रहा।
  • डॉक्टरों ने जांच के बाद एक बेहद दुर्लभ बीमारी का पता लगाया है।
  • इस बीमारी का नाम ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम (Auto-Brewery Syndrome) है।
  • मरीज के पेट के फंगस कार्बोहाइड्रेट को शराब में बदल देते थे।
  • रोटी, चावल और मीठा खाते ही शरीर में नशा होने लगता था।

बिना शराब पिए नशे में रहने का अजीब मामला

क्या आपने कभी सोचा है कि कोई बिना शराब पिए भी नशे में रह सकता है? सुनने में यह बात बिल्कुल जादू या किसी कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन विज्ञान की दुनिया में यह पूरी तरह सच साबित हुआ है।



हाल ही में एक ऐसा ही हैरान करने वाला अनोखा मामला सामने आया है। एक व्यक्ति बिना शराब को हाथ लगाए सालों तक नशे की हालत में रहा। डॉक्टर भी उसकी इस अजीब मेडिकल कंडीशन को देखकर पूरी तरह चौंक गए।



ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम क्या है?

मैक्स केयर हेल्थ के डॉ. दीपांशु खन्ना के अनुसार इस बीमारी को ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम का नाम दिया है। यह एक बहुत ही दुर्लभ और अनोखी बीमारी मानी जाती है। इसमें इंसान का अपना शरीर ही शराब का कारखाना बन जाता है।





AUTO BREWER SYNDROME


हमारे पेट और आंतों में कई तरह के छोटे माइक्रोऑर्गेनिज्म और फंगस होते हैं। इस बीमारी में ये फंगस शरीर में पहुंचने वाले कार्बोहाइड्रेट को शराब में बदल देते हैं। यानी खाना खाते ही अंदर फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।



रोटी, चावल और पास्ता खाते ही होने लगता था भारी नशा

इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति जब भी सामान्य खाना खाता तो उसे नशा हो जाता था। वह जैसे ही रोटी, चावल, मिठाई या पास्ता जैसी चीजें खाता था। उसके पेट के अंदर अपने आप अल्कोहल (Alcohol) का निर्माण होने लगता था।



इसी वजह से उसने सालों से शराब की एक बूंद भी नहीं पी थी। इसके बावजूद उसके शरीर में अल्कोहल की भारी मात्रा हमेशा पाई जाती थी। खाना खाते ही उसे सामान्य शराबी की तरह गंभीर लक्षण महसूस होने लगते थे।



10 साल तक जूझता रहा शख्स

मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार यह व्यक्ति करीब 10 साल तक इस नरक जैसी जिंदगी में रहा। उसे खुद समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसके साथ क्या हो रहा है। वह हमेशा बीमार और थका हुआ सा रहने लगा था।



कई बार उसे अचानक चलते-चलते चक्कर आने लगते थे। उसका सिर हमेशा भारी रहता था और वह सामान्य काम भी नहीं कर पाता था। समाज के लोग भी उसे गलत नजरों से देखने लगे थे।



शराब के नशे जैसे ही दिखते हैं लक्षण

इस अजीब बीमारीके लक्षण बिल्कुल आम शराब के नशे जैसे ही होते हैं। इसमें मरीज को तेज चक्कर आते हैं और लगातार सिरदर्द की समस्या रहती है। किसी भी काम में ध्यान लगाने में बहुत परेशानी होती है।



मरीज हमेशा शारीरिक थकान और कमजोरी महसूस करता है। ज्यादा खाना खाने पर उसकी बोली लड़खड़ाने लगती है और शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है। उसके मूड में भी बहुत तेजी से बदलाव आता है।



रोजमर्रा जिंदगी पर पड़ा बुरा असर

इस अनोखी बीमारी ने उस व्यक्ति के सामान्य जीवन को पूरी तरह तबाह कर दिया था। उसकी काम करने की शारीरिक ऊर्जा बहुत ज्यादा कम हो गई थी। कोई भी नया काम करना उसके लिए नामुमकिन हो गया था।



सबसे बड़ी बात यह थी कि लोग उसकी इस सच्चाई पर यकीन नहीं करते थे। बिना शराब पिए शरीर में नशा होने की बात सबको मजाक लगती थी। इसकी वजह से उसे मानसिक तनाव का सामना भी करना पड़ा।



क्या कहते हैं डॉक्टर?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बड़े डॉक्टरों के अनुसार यह बीमारी करोड़ों में किसी एक को होती है। इसका इलाज हर मरीज की शारीरिक स्थिति को देखकर अलग तरीके से किया जाता है।



डॉक्टर सबसे पहले मरीज के खानपान में बहुत बड़ा बदलाव करते हैं। मरीज को कार्बोहाइड्रेट और शुगर वाली चीजें खाने से पूरी तरह मना किया जाता है। इसके साथ ही फंगस को खत्म करने के लिए विशेष दवाइयां दी जाती हैं।



FAQ

  1. ऑटो-ब्रुअरी सिंड्रोम (Auto-Brewery Syndrome) क्या है?
    यह दुर्लभ मेडिकल स्थिति है जिसमें व्यक्ति का पाचन तंत्र भोजन में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और शुगर को खुद ब खुद अल्कोहल (शराब) में बदलने लगता है। पेट में मौजूद विशेष फंगस या यीस्ट के कारण शरीर के अंदर ही फर्मेंटेशन होने लगता है, जिससे बिना शराब पिए भी नशा हो जाता है।
  2. इस दुर्लभ बीमारी के मुख्य लक्षण क्या-क्या होते हैं?
    इसके लक्षण सामान्य शराब के नशे जैसे ही होते हैं। इसमें मरीज को बिना वजह चक्कर आना, सिर में तेज दर्द, कमजोरी, थकान, बोलने में लड़खड़ाहट और चलने में शरीर का संतुलन बिगड़ना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
  3. क्या डॉक्टरों के पास इस बीमारी का कोई पक्का इलाज मौजूद है?
    हां, इसका इलाज संभव है। डॉक्टर सबसे पहले मरीज की डाइट से कार्बोहाइड्रेट, पास्ता, चावल और मीठी चीजों को पूरी तरह हटा देते हैं। इसके साथ ही पेट के अंदर मौजूद अतिरिक्त फंगस को मारने के लिए विशेष एंटी-फंगल दवाइयां दी जाती हैं।

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