शादी का झांसा, कस्टम ड्यूटी का खेल और पाकिस्तान कनेक्शन: मंदसौर साइबर ठगी का अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट ऐसे हुआ बेनकाब!
शादी का झांसा देकर 7.5 लाख की ठगी
बता दें कि शामगढ़ की युवती ने मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल बनाई थी। आरोपी ने खुद को एनआरआई बताकर उससे संपर्क साधा था। नकली फोटो और फर्जी परिजनों के जरिए भरोसा भी जीता। फिर शादी का झांसा दिया और विदेश से महंगा गिफ्ट भेजने की बात कही।
इसके बाद आरोपी ने बताया कि गिफ्ट कस्टम विभाग में पकड़ा गया है। अब कस्टम ड्यूटी और टैक्स के नाम पर पैसे की मांग की जा रही है। ऐसा कहने पर युवती ने आरोपी को किश्तों में साढ़े 7 लाख रुपए दे दिए। वहीं जब ठगी का पता चला तो पर शामगढ़ थाने में शिकायत की गई। पुलिस ने डेढ़ महीने जांच करने के बाद आरोपियों को पकड़ा है।
29 सितंबर को 6 आरोपी हुए थे गिरफ्तार
जानकारी के अनुसार पुलिस ने 29 सितंबर को अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया था। मामले में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। जांच आगे बढ़ने पर आरोपियों के पाकिस्तान कनेक्शन सामने आए हैं।
मुख्य सरगना बिहार निवासी टोनी कुमार है। वह साइबर ठगी की रकम क्रिप्टोकरेंसी से पाकिस्तान भेजता था। पुलिस मोबाइल, बैंक खाते, सिम और क्रिप्टो वॉलेट खंगाल रही है। मामले की गंभीरता देखकर पुलिस राष्ट्रीय एजेंसियों का सहयोग लेगी।
मोबाइल नंबर और IP एड्रेस पाकिस्तान के मिले
सीएसपी जितेंद्र भास्कर ने बताया कि आरोपियों के संपर्क पाकिस्तान से थे। वहीं के निर्देशों पर स्थानीय बैंक खाते उपलब्ध कराए जाते थे। उन खातों से रकम निकालकर आगे ट्रांसफर की जाती थी। संपर्क वाले मोबाइल नंबरों का IP एड्रेस पाकिस्तान से लिंक मिला। रतलाम रेंज डीआईजी निमिष अग्रवाल ने बताया कि जांच जारी है।
खुद ठगी का शिकार हुआ, फिर बना मास्टरमाइंड
जांच में पता चला कि टोनी कुमार पहले खुद शिकार बना था। बाद में वह खुद इस अपराध में शामिल हो गया। धीरे-धीरे वह गिरोह का सरगना बन गया। आरोपी 11 करोड़ से अधिक के ट्रांजेक्शन वाले नेटवर्क में था।
जानकारी के अनुसार इस गिरोह ने 100 से ज्यादा साइबर घटनाओं को अंजाम दिया। ठगी में 150 से ज्यादा म्यूल खाते और सिम इस्तेमाल किए।
अलग-अलग टीमों में बंटा था नेटवर्क
गिरोह का नेटवर्क अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ था। एक टीम म्यूल बैंक खाते और सिम कार्ड देती थी। आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली, बिहार और भोपाल से खाते उपलब्ध कराए गए। दूसरी टीम अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बदलकर पैसे निकालती थी।
खाते फ्रीज होने पर आरोपी सिम और मोबाइल फेंक देते थे। पुलिस ने 22 एंड्रॉयड मोबाइल, 150 से अधिक सिम, 5 एटीएम भी जब्त किए।
10% रकम खुद रखते, 90% पाकिस्तान भेजते
इस मामले में एक हैरान कर देने वाली बात सामने आई है। आरोपी साइबर ठगी की रकम का 10 फीसदी हिस्सा अपने पास रखते थे। बाकी 90 फीसदी रकम पाकिस्तान भेज दी जाती थी। शुरुआती जांच में पाकिस्तान के कराची से जुड़ा नेटवर्क सामने आया है। पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
FAQ
- मंदसौर में साइबर ठगी का मामला कब सामने आया?
यह मामला 29 सितंबर को सामने आया, जब पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया और 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। - मंदसौर में आरोपियों ने ठगी के लिए किस प्रकार की तकनीक का इस्तेमाल किया?
आरोपियों ने खुद को एनआरआई बताकर, नकली फोटो और फर्जी परिजनों के जरिए युवती का भरोसा जीता और शादी का झांसा देकर गिफ्ट भेजने का बहाना बनाकर पैसे की मांग की। - पुलिस ने मंदसौर साइबर ठगी के मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने 22 एंड्रॉयड मोबाइल, 150 से अधिक सिम, और 5 एटीएम जब्त किए हैं, और मुख्य सरगना टोनी कुमार सहित 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।