कोर्ट के आदेश की अनदेखी मऊगंज तहसीलदार को पड़ी भारी, सुनाई अनोखी सजा, यह थी वजह

Sanjay Dhiman | Sept 22, 2026, 17:48 IST
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मऊगंज के तहसीलदार सुनील कुमार द्विवेदी को कोर्ट के आदेश पर कंप्लायंस रिपोर्ट न भेजने पर 50 रुपए जुर्माना लगा। सजा उनकी सर्विस बुक में भी दर्ज होगी। मामला 2004 के पुराने प्रकरण से जुड़ा है।

मऊगंज जिले की एक अदालत ने नायगढ़ी के तहसीलदार सुनील कुमार द्विवेदी को दोषी ठहराया है। वजह है कोर्ट के आदेश पर समय से रिपोर्ट न भेजना। बार-बार नोटिस के बाद भी जवाब नहीं आया। अदालत ने 50 रुपए जुर्माना लगाया। यह सजा उनकी सर्विस बुक में भी दर्ज होगी।



आदेश की शुरुआत

यह मामला साल 2004 के एक पुराने प्रकरण से जुड़ा है। मामले का नाम है विशराम बनाम दीनबंधु और अन्य। यह एक निष्पादन यानी execution प्रकरण था। कोर्ट ने 18 अप्रैल को आदेश दिया था। तहसीलदार को मौके पर मौजूद रहकर कब्जा कार्रवाई करनी थी। समय सीमा 29 अप्रैल तय हुई थी। इसके बाद 4 मई तक कंप्लायंस रिपोर्ट देनी थी। कंप्लायंस रिपोर्ट यानी पालन प्रतिवेदन कोर्ट के आदेश का सबूत होती है।



लगातार टलती रही तारीख

तय तारीख पर कोई रिपोर्ट नहीं आई। अदालत ने बार-बार पत्र भेजे। 14 मई, 21 मई और 29 मई की तारीखें दी गईं। जून महीने में भी कई मौके दिए गए। लेकिन तहसीलदार कार्यालय की ओर से न रिपोर्ट आई, न कोई अनुरोध। समय बढ़ाने की मांग तक नहीं की गई। अदालत का धैर्य धीरे-धीरे कम होता गया।



कारण बताओ नोटिस जारी

25 जून को अदालत ने सख्ती दिखाई। तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस भेजा गया। जवाब देने के लिए 29 जून तक समय दिया गया। फिर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। कोर्ट ने तीन दिन का अतिरिक्त समय दिया। यह आखिरी मौका था। लेकिन 2 जुलाई को भी स्थिति नहीं बदली। न रिपोर्ट आई, न कोई जवाब।



BNS के तहत केस दर्ज

इसके बाद अदालत ने बड़ा कदम उठाया। भारतीय न्याय संहिता (BNS – Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 210 के तहत संज्ञान लिया गया। एक विविध आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया। यह धारा सरकारी आदेश की अवहेलना से जुड़ी है। तहसीलदार बाद में कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने ऑन-साइट दिक्कतों का हवाला दिया। हलफनामा देकर खेद भी जताया। लेकिन कोर्ट ने यह सफाई नहीं मानी।



सर्विस बुक में एंट्री

न्यायिक मजिस्ट्रेट ओशी जैन ने आदेश दिया। इस पूरी कार्रवाई का रिकॉर्ड सर्विस बुक में दर्ज होगा। सर्विस बुक किसी सरकारी अफसर के करियर का आधिकारिक रिकॉर्ड होती है। इसमें दर्ज बातें प्रमोशन और पोस्टिंग पर असर डाल सकती हैं। आदेश की एक प्रति मऊगंज कलेक्टर को भी भेजी गई। इससे प्रशासनिक स्तर पर भी मामले पर नजर रहेगी।



उसी दिन जमा हुआ जुर्माना

तहसीलदार सुनील कुमार द्विवेदी ने देरी नहीं की। उन्होंने 17 अगस्त को ही ऑनलाइन जुर्माना जमा कर दिया। लेकिन यह घटना अकेले मऊगंज तक सीमित नहीं रही। पूरे मध्य प्रदेश में प्रशासनिक हलकों में इसकी चर्चा है। कई अफसर इसे एक चेतावनी की तरह देख रहे हैं। कोर्ट का यह रुख साफ संदेश देता है। न्यायिक आदेशों की अनदेखी अब आसान नहीं होगी।



प्रशासन पर बढ़ेगा दबाव

इस मामले के बाद जिले में अन्य अधिकारी भी सतर्क हो गए हैं। कोर्ट की सख्ती से यह संदेश गया कि रिपोर्टिंग में देरी अब बर्दाश्त नहीं होगी। आने वाले समय में इस तरह के मामलों पर कोर्ट की निगरानी और बढ़ सकती है। प्रशासनिक अधिकारियों के लिए यह घटना एक सीख बनकर सामने आई है।



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