मेधावी छात्र लैपटॉप योजना: 17 साल में तकनीक बदली, कीमतें बढ़ीं, लेकिन छात्रों के हाथ आज भी वही 25 हजार
समय के साथ तकनीक काफी बदल गई है और लैपटॉप भी पहले के मुकाबले काफी महंगे हो गए हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से हर छात्र को मिलने वाली मदद आज भी 25 हजार रुपए ही है। ऐसे में आज की पढ़ाई और जरूरतों को देखते हुए कई परिवारों के लिए इस रकम में लैपटॉप खरीदना मुश्किल हो रहा है।
तकनीकी पढ़ाई में 25 हजार में नहीं बन रही बात
आजकल की पढ़ाई सिर्फ इंटरनेट सर्फिंग तक सीमित नहीं रह गई है। बीटेक (B.Tech), कोडिंग और तकनीकी कोर्स में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर बहुत भारी होते हैं। प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना (Pratibhashali Vidyarthi Protsahan Yojana) के तहत सरकार से लैपटॉप खरीदने के लिए 25 हजार रुपए मिलने के बावजूद कई छात्रों के लिए अपनी जरूरत का लैपटॉप खरीदना मुश्किल हो रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक परिवार को अपने बच्चे की बीटेक की पढ़ाई के लिए 78 हजार रुपए का लैपटॉप खरीदना पड़ा। ऐसे में सरकार से मिले 25 हजार रुपए के बाद उन्हें 53 हजार रुपए अलग से अपनी जेब से लगाने पड़े।
कई ऐसे भी छात्र हैं, जिनके माता-पिता के पास अतिरिक्त पैसे जोड़ने की गुंजाइश नहीं थी। ऐसे में उन्होंने पुराने यानी सेकंड हैंड लैपटॉप से काम चलाया। आईटी और कंप्यूटर विशेषज्ञों का कहना है कि 25 हजार रुपए का बजट हर विद्यार्थी की जरूरत पूरी नहीं कर सकता है।
सामान्य पढ़ाई और तकनीकी पढ़ाई के लिए इस्तेमाल होने वाले लैपटॉप में जमीन-आसमान का फर्क होता है। बीटेक, प्रोग्रामिंग, डेटा और एआई जैसे क्षेत्रों में लैपटॉप का चुनाव कोर्स और इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर के हिसाब से ही करना पड़ता है।
25 हजार के बजट में छात्र क्या कर सकते हैं?
सामान्य पढ़ाई के लिए मेधावी छात्र लैपटॉप योजना (Meritorious Student Laptop Scheme) के तहत मिलने वाले बजट में ऐसा लैपटॉप लिया जा सकता है, जिस पर इंटरनेट चलाने, डॉक्यूमेंट बनाने, ऑनलाइन क्लास करने और रोजमर्रा के काम आसानी से हो सकें। वहीं, इंजीनियरिंग और प्रोग्रामिंग की पढ़ाई के लिए कोर्स के हिसाब से ज्यादा रैम, तेज प्रोसेसर और बेहतर ग्राफिक्स वाले लैपटॉप की जरूरत पड़ सकती है।
इसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। इसी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा की पढ़ाई के लिए लैपटॉप की जरूरत इस बात पर निर्भर करती है कि विद्यार्थी किस तरह के मॉडल पर काम कर रहा है और उनका इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है। इसलिए हर विद्यार्थी के लिए एक जैसा प्रोसेसर या लैपटॉप सही नहीं होता।
विशेषज्ञों ने बताया लैपटॉप का असली गणित
लैपटॉप विशेषज्ञों के मुताबिक आज बाजार में एक ठीक-ठाक लैपटॉप खरीदने के लिए 40 से 50 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इस बजट में 8GB रैम और 256GB स्टोरेज वाले लैपटॉप मिल जाते हैं। जबकि 16GB रैम और 512GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत 60 हजार रुपए से ज्यादा होती है।
कुछ खास मॉडल 90 से 95 हजार रुपए तक के भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 25 हजार रुपए में मिलने वाले लैपटॉप साधारण होते हैं। इन पर सामान्य काम तो किए जा सकते हैं, लेकिन प्रोग्रामिंग, इंजीनियरिंग की ड्राइंग, डिजाइनिंग और रिसर्च जैसे कामों के लिए ज्यादा क्षमता वाले लैपटॉप की जरूरत पड़ती है।
ऐसे में तकनीकी पढ़ाई करने वाले छात्रों को अपनी जरूरत के हिसाब से 45 से 50 हजार रुपए या इससे भी ज्यादा खर्च करने पड़ सकते हैं।
सरकार का कुल खर्च तो बढ़ा, लेकिन छात्र के हाथ वही 25 हजार
आंकड़े बताते हैं कि हर साल पास होने वाले मेधावी छात्रों की गिनती बढ़ रही है। इससे सरकार की तिजोरी से जाने वाला कुल खर्च भी बढ़ रहा है। वहीं प्रति छात्र मिलने वाली रकम में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
- साल 2026: करीब 1.22 लाख विद्यार्थियों के खातों में 304.98 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए थे।
- साल 2025: कुल 94 हजार 234 विद्यार्थियों को 235.58 करोड़ रुपए बांटे गए थे।
- साल 2023-24: इस सत्र में 89 हजार 710 विद्यार्थियों को 224.27 करोड़ रुपए की सहायता दी गई थी।
खर्च लगातार करोड़ों में बढ़ रहा है, मगर एक बच्चे के हिस्से में वही 25 हजार रुपए आ रहे हैं जो 2009 में तय किए गए थे।