एमपी में मनरेगा घोटाला, मौके पर सन्नाटा, कागजों पर काम कर रहे सैकड़ों मजदूर
समझें क्या है पूरा मामला...
- शिवपुरी जिले में बिना काम किए ही मजदूरों की फर्जी ऑनलाइन हाजिरी लगाई जा रही है।
- रिकवरी से बचने के लिए अधिकारी और सरपंच-सचिव क्लोन ऐप के जरिए हाजिरी भर रहे हैं।
- 30% या उससे कम वाले कामों में सरपंच-सचिवों से पैसों की वसूली की तैयारी है।
- इस वसूली से बचने के लिए ही सैकड़ों फर्जी मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई गई।
- 30 जून के बाद मनरेगा योजना के काम बंद होने जा रही है।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के कोलारस क्षेत्र से एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां मनरेगा पोर्टल में सेंध लगाकर क्लोन ऐप के जरिए मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है।
चौंकाने वाली बात यह है कि जब जमीनी हकीकत देखी गई, तो मौके पर कोई काम ही नहीं चल रहा था। वहां पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ था।
दरअसल 30 जून से मनरेगा योजना के तहत चल रहे काम बंद होने जा रहे हैं। इससे पहले सरकार उन कामों की समीक्षा कर रही है जिनमें प्रगति बहुत कम हुई है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिन कामों में 30% या उससे कम काम हुआ है, वहां के सरपंच और सचिव से राशि की वसूली की जाएगी। इसी वसूली और कार्रवाई से बचने के लिए सरपंच-सचिवों ने फर्जीवाड़ा शुरू कर दिया है। ताकि कागजों पर काम को पूरा दिखाया जा सके।
क्लोन ऐप से हो रहा था खेल?
नियम के अनुसार मनरेगा के काम वाली जगह पर जाकर ही मजदूरों की फोटो के साथ ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करनी होती है। वहीं यहां आईडी-पासवर्ड का गलत इस्तेमाल हो रहा था।
साइट की लोकेशन के जरिए दूसरी जगह बैठकर ही क्लोन ऐप से फर्जी हाजिरी डाली जा रही है। इसमें मजदूरों की बिना फोटो के ही हाजिरी लग रही है।
इन 3 ग्राम पंचायतों में सामने आया फर्जीवाड़ा
कोलारस जनपद की तीन ग्राम पंचायतों में अधूरे कामों के बीच फर्जी हाजिरी का यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
ग्राम पंचायत गणेशखेड़ा (पिपरोदा)
यहां के रंध नाले पर 18 लाख 13 हजार रुपए की लागत से स्वीकृत तालाब का काम अधूरा पड़ा है। इस पर अब तक एक लाख 72 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं।
बची हुई राशि निकालने के लिए 3 से 8 जून तक लगातार रोजाना 180 फर्जी मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी लगाई गई। यहां कुल 108 मस्टर में 1080 फर्जी हाजिरी भरी गई। साथ ही दो लाख 81 हजार रुपए की मजदूरी राशि निकालने की जुगत की गई।
ग्राम पंचायत सेसईखुर्द (टुंड्यावद रास्ता)
यहां लल्लीराम के खेत के पास 17 लाख 64 हजार रुपए की पाइप पुलिया मंजूर है। इस पर तीन लाख 83 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं।
अब शेष राशि निकालने के लिए 3 से 7 जून तक रोजाना 121 से 131 मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई गई। इस पंचायत में कुल 197 मस्टर में 643 हाजिरी दिखाकर एक लाख रुपये का खेल रचा गया।
ग्राम पंचायत गोरा टीला (हीरापुर)
यहां नौ लाख 85 हजार रुपए का बंध और पांच लाख 24 हजार रुपए का एलबीएस (LBS) कार्य मंजूर हुआ था। इनमें क्रमशः दो लाख 95 हजार और एक लाख 18 हजार रुपए खर्च भी हो चुके हैं।
मौके पर पूरी तरह सन्नाटा होने के बावजूद दोनों कामों में 3 से 8 जून तक हर दिन 101 से 111 फर्जी मजदूरों की हाजिरी भरी गई। यहां कुल 71 मस्टर में 655 हाजिरी के जरिए एक लाख 70 हजार रुपए की हेराफेरी की तैयारी थी।
वहीं अगर तीनों पंचायतों को मिला दिया जाए, तो कुल 376 मस्टर (मजदूरों का आधिकारिक रिकॉर्ड रजिस्टर) के जरिए दो हजार 378 फर्जी हाजिरी लगाई गईं। कुल छह लाख 18 हजार रुपए की मजदूरी राशि निकालने का प्रयास किया गया।
अधिकारियों का क्या कहना है?
मनरेगा योजना के जिला पंचायत के नोडल अधिकारी विशाल सिंह तोमर ने बताया कि संबंधित सरपंच-सचिव से 30% से कम प्रगति वाले कामों में राशि की वसूली की जाएगी। मनरेगा पोर्टल पर हर दिन बदलाव हो रहे हैं। भोपाल स्तर से फोटो प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं।
1 जुलाई 2026 से लागू होगी नई योजना
बता दें कि फिलहाल मनरेगा योजना के कामों को लेकर सरकार गंभीर है। इसकी लगातार समीक्षा चल रही है। एक जुलाई 2026 से देश में विकसित भारत जी राम जी योजना लागू होने जा रहे है।
यही वजह है कि पुराने अधूरे कामों को ठिकाने लगाने और सरकारी रिकवरी से बचने के लिए अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस तरह के शार्टकट और फर्जी तरीके अपना रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने साफ कर दिया है कि फर्जी हाजिरी के आधार पर किसी भी तरह का भुगतान नहीं किया जाएगा।
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