महू-खंडवा लाइन के लिए कटेंगे 1.40 लाख पेड़, केंद्र सरकार से मंजूरी मिली
केंद्र सरकार ने महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना के लिए पेड़ कटाई को अंतिम मंजूरी दी है। इंदौर और खरगोन जिलों में करीब 1.40 लाख पेड़ काटे जाएंगे। यह कटाई मॉनसून बीतने के बाद अक्टूबर से शुरू होगी। रेलवे को हरित गलियारा प्रबंधन योजना लागू करनी होगी। इस प्रोजेक्ट से इंदौर और मुंबई के बीच दूरी कम होगी।
इंदौर, मध्यप्रदेश की महू-खंडवा रेल लाइन अब बड़ी लाइन में बदलेगी। यह लाइन अंग्रेजों के जमाने की छोटी लाइन है। रेलवे इसे गेज परिवर्तन के जरिए आधुनिक बना रहा है। इसके लिए घने जंगलों से होकर गुजरने वाला रास्ता तैयार करना जरूरी है।
इसी वजह से केंद्र सरकार ने बड़ी संख्या में पेड़ काटने की मंजूरी दी है। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। कटाई मॉनसून के बाद शुरू होगी, ताकि बारिश के मौसम में नुकसान न हो।
कितने पेड़ कटेंगे
डीएफओ लाल सुधाकर सिंह के मुताबिक कुल 1.40 लाख पेड़ काटे जाएंगे। इनमें से करीब 1.24 लाख पेड़ अकेले इंदौर जिले में हैं। बाकी पेड़ खरगोन जिले के वन क्षेत्र से काटे जाएंगे।
सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार से अंतिम अनुमति मिल चुकी है। अब सिर्फ मॉनसून खत्म होने का इंतजार है। कटाई का काम अक्टूबर महीने से शुरू होगा।
रेलवे और वन विभाग साथ करेंगे काम
जहां भी रेलवे का निर्माण कार्य शुरू होगा, वहीं क्रमबद्ध तरीके से पेड़ काटे जाएंगे। इसके लिए रेलवे और वन विभाग मिलकर योजना बना रहे हैं। दोनों विभाग तालमेल से काम करेंगे, ताकि प्रोजेक्ट में देरी न हो।
वन विभाग ने एक शर्त भी रखी है। भारतीय रेलवे को हरित गलियारा प्रबंधन योजना लागू करनी होगी। इसका मकसद पर्यावरण को होने वाला नुकसान कम करना है।
खाली जमीन पर लगेंगे पौधे
इस शर्त के तहत रेलवे को पटरियों के किनारे पौधे लगाने होंगे। इसमें स्थानीय प्रजातियों के पौधे शामिल होंगे। साथ ही परियोजना क्षेत्र के आसपास खाली जमीन पर भी पौधारोपण होगा।
रेलवे को वर्षा जल संचयन के ढांचे भी बनाने होंगे। इसके अलावा प्रोजेक्ट में ऊर्जा दक्षता के उपाय अपनाना भी जरूरी होगा। इस पूरी योजना का खर्च रेलवे उठाएगा। वन विभाग इसकी निगरानी करेगा।
डीएफओ ने कहा कि इससे वन्यजीवों के लिए बेहतर माहौल बनेगा। वन विभाग ने पेड़ कटाई से मिट्टी और नमी पर पड़ने वाले असर को कम करने की योजना भी बनाई है।
कितना वन क्षेत्र होगा प्रभावित
महू-सनावद खंड में कुल 450 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। इसमें इंदौर जिले का 404 हेक्टेयर और खरगोन जिले का 46 हेक्टेयर शामिल है।
नुकसान की भरपाई के लिए दोगुने क्षेत्र में पौधे लगाए जाएंगे। इंदौर में पौधारोपण के लिए जमीन सीमित है। इसलिए धार और झाबुआ जिलों में 916 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधे रोपे जाएंगे। हर हेक्टेयर में 1,000 पौधे लगाए जाएंगे।
नई रेल लाइन की लंबाई
इस प्रोजेक्ट के तहत 156 किलोमीटर लंबी बड़ी लाइन बिछाई जा रही है। आजादी से पहले बनी छोटी लाइन सिर्फ 118 किलोमीटर लंबी थी। यह लाइन रियासत काल में बिछाई गई थी।
2030 तक पूरा होगा काम
अधिकारियों के मुताबिक गेज परिवर्तन का काम 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस नई लाइन से इंदौर और मुंबई के बीच दूरी कम हो जाएगी। इंदौर को मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मानी जाती है।
इस प्रोजेक्ट से पश्चिमी मध्यप्रदेश का दक्षिण भारत से संपर्क भी मजबूत होगा। इससे व्यापार और आवागमन दोनों आसान होंगे।
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पेड़ कटाई को मंजूरी