कांग्रेस रानी-हाथी बचाती रही, BJP के घोड़े ने ढाई चाल में मात दी

The Sootr | Jun 09, 2026, 21:09 IST
Photograph: (the sootr)
राज्यसभा चुनाव में BJP ने गहरी रिसर्च और कानूनी दांव से कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करवा दिया। यह महज चुनाव नहीं, शतरंज की खतरनाक बाजी थी, जो कांग्रेस को सालों टीस देगी

मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना महज एक तकनीकी चूक नहीं है। यह BJP की उस शतरंजी चाल का नतीजा था जो महीनों पहले से बिसात पर बिछाई जा रही थी।



पहले समझें - खेल क्या था?

मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव था। BJP के पास विधानसभा में पर्याप्त बहुमत था, इसलिए दो सीटें तो उसकी तय थीं। असली मुकाबला तीसरी सीट पर था।



कांग्रेस के पास भी पर्याप्त विधायक थे कि वह तीसरी सीट जीत सके। लेकिन BJP ने तय कर लिया था- तीसरी सीट भी नहीं जाने देनी। यानी जिद है तो जिद है जी…



गहरी रिसर्च, पहले से तैयार जाल

BJP की रणनीति का पहला पड़ाव था- कांग्रेस के हर संभावित उम्मीदवार की पूरी पड़ताल। जितने भी नाम कांग्रेस की तरफ से चर्चा में थे उन सबके वर्तमान और अतीत की बारीक छानबीन BJP पहले ही करवा चुकी थी।



कोर्ट केस, शपथ पत्र, पुराने विवाद, संपत्ति घोषणाएं… हर दस्तावेज BJP की टीम के पास था। मीनाक्षी नटराजन का नाम भी इसी सूची में था। उनके खिलाफ एक न्यायालयीन प्रकरण चल रहा है, जिसमें वे प्रतिवादी थीं, समन मिल चुका था, जवाब दावा दाखिल हो चुका था। यह जानकारी BJP के पास पहले से थी। इसी को उसने तुरुप के पत्ते की तरह उपयोग किया।



महेश केवट बने ढाई चाल का घोड़ा

जब कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन का नाम फाइनल किया, तभी BJP ने अपनी असली चाल चली। महेश केवट का नाम घोषित किया गया। यह नाम महज उम्मीदवारी नहीं था बल्कि यह एक सोची-समझी डिस्ट्रैक्शन थी। केवट के नाम से OBC राजनीति का संदेश भी गया और विपक्ष का ध्यान भटकाने का काम भी हुआ।



साथ ही बेहद शातिर तरीके से यह चर्चा फैलाई गई कि कांग्रेस विधायकों में तोड़फोड़ हो सकती है। बस यही काफी था। कांग्रेस नेतृत्व विधायकों की गिनती में उलझ गया। होटल पॉलिटिक्स शुरू हो गई। असली खतरा कहां से आने वाला है- यह कांग्रेस को दिखा ही नहीं।



रिटर्निंग ऑफिसर के सामने आखिरी चाल

जब सभी की नजरें विधायकों की संख्या पर टिकी थीं, तब BJP ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने असली दांव खेला।


मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र के खिलाफ आपत्ति दर्ज की गई। तथ्य सामने रखे गए। Form 26 में न्यायालयीन प्रकरण का उल्लेख नहीं, जबकि प्रकरण सक्रिय था और उन्हें पूरी जानकारी थी। रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत नामांकन निरस्त कर दिया।



और आज यानी 09 जून 2026 को कांग्रेस की तीसरी सीट की उम्मीद दफन हो गई।



दरअसल, शतरंज में घोड़े की चाल ढाई घर की होती है- न सीधी, न तिरछी। उसका रास्ता अप्रत्याशित होता है। वह उस खाने से हमला करता है, जहां दुश्मन की नजर ही नहीं होती।



BJP ने यही किया। जब कांग्रेस विधायकों की रक्षा में लगी थी- असली वार नामांकन पर हुआ। जब ध्यान महेश केवट पर था और असली हथियार कोर्ट के दस्तावेज़ थे।



कांग्रेस रानी, हाथी और ऊंट बचाती रही उधर घोड़े ने ढाई चाल में बाज़ी पलट दी।

दरअसल मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026 BJP की केवल जीत नहीं है। यह संगठनात्मक तैयारी, कानूनी सतर्कता और राजनीतिक धैर्य का पाठ है। कांग्रेस को समझना होगा कि अब चुनाव सिर्फ वोट गिनने से नहीं जीते जाते, नामांकन दाखिल करने से पहले ही बाजी तय हो सकती है।



लेकिन दूसरी ओर सिर्फ कोर्ट के नोटिस पर ही किसी की उम्मीदवारी निरस्त होने से नई परंपरा शुरू हो गई है। वरिष्ठ एडवोकेट विवेक तन्खा ने भी इस बारे में साफ लिखा है कि यह कोई FIR नहीं है, बल्कि कोर्ट का नोटिस है। ऐसे नोटिस किसी के लिए भी जारी हो सकते हैं, खासतौर पर सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों पर। ऐसे में रिटर्निंग ऑफिसर का यह फैसला कई तरह की दिक्कतें पैदा कर सकता है। बहरहाल, कांग्रेस स्तब्ध है। बीजेपी खेमे में जीत का जश्न मनाया जा रहा है। इस एक दिन की धुरंधर स्टाइल फिल्म का सबक यही है कि, जो घोड़े की ढाई चाल न समझे, वह शतरंज की बिसात पर चित्त होता रहेगा…



FAQ

  1. मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों रद्द हुआ?
    Form 26 में एक सक्रिय न्यायालयीन प्रकरण का उल्लेख न होने के कारण रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत नामांकन निरस्त किया।
  2. महेश केवट कौन हैं और उनकी भूमिका क्या थी?
    महेश केवट BJP के उम्मीदवार थे। उनका नाम OBC राजनीति का संदेश देने और कांग्रेस का ध्यान विधायक तोड़फोड़ की ओर खींचने की डिस्ट्रैक्शन रणनीति के तहत घोषित किया गया।
  3. Form 26 में क्या भरना जरूरी होता है?
    Form 26 उम्मीदवार का शपथ पत्र होता है, जिसमें अपराधिक प्रकरण, संपत्ति और देनदारियों की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है। सक्रिय न्यायालयीन प्रकरण छुपाना नामांकन रद्द करने का आधार बन सकता है।
  4. क्या कोर्ट नोटिस पर उम्मीदवारी रद्द होना सही है?
    वरिष्ठ एडवोकेट विवेक तन्खा सहित कई कानूनी विशेषज्ञों ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कोर्ट नोटिस FIR नहीं है और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय किसी भी व्यक्ति पर ऐसे नोटिस हो सकते हैं।

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