नितिन गडकरी के RTO वाले सवाल पर मंत्री उदय प्रताप सिंह क्यों रहे मौन, कार्रवाई का हिसाब कहां?
नितिन गडकरी भोपाल में बोले थे कि कई RTO अधिकारी 'गांधीवादी' हैं। पांच दिन बाद बुधवार को वल्लभ भवन में सवाल हुआ। परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह से पूछा गया कि विभाग ने क्या किया। रिपोर्टर के प्रत्यक्ष विवरण के मुताबिक जांच या कार्रवाई की स्पष्ट संख्या नहीं मिली।बुधवार को वल्लभ भवन में परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से इस मुद्दे पर सवाल हुआ। पत्रकार वार्ता में जांच और कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।
Nitin Gadkari वाली टिप्पणी अब जवाबदेही का सवाल बन गई है। गडकरी ने RTO भ्रष्टाचार पर मंच से सवाल उठाया था। अब सवाल बयान से आगे निकलकर विभागीय कार्रवाई पर टिक गया है। अब तक के विवरण में विभाग की कार्रवाई का स्पष्ट ब्यौरा नहीं है।
भोपाल में क्या बोले थे नितिन गडकरी ?
कार्यक्रम 25 सितंबर को भोपाल में हुआ था। मौका मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा (Sugam Parivahan Seva) के शुभारंभ का था। उन्होंने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO – Regional Transport Office) पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि कई RTO अधिकारी 'गांधीवादी' हैं। उनके मुताबिक गांधी की तस्वीर वाले नोट देखकर वे जल्दी ठप्पा लगा देते हैं। मंच पर परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह मौजूद थे। गडकरी ने उनसे विभाग में भ्रष्टाचार का पता कराने का आग्रह किया।
डिजिटल व्यवस्था और मानवीय दखल
गडकरी ने केवल भ्रष्टाचार की बात नहीं की। उन्होंने बताया कि परिवहन संबंधी 17 सेवाएं डिजिटल की गई हैं। जोर था कि नागरिकों को RTO कार्यालय जाने की जरूरत न रहे। सोचिए एक बार। जब सेवाएं ऑनलाइन हों, तो दफ्तर के चक्कर कितने घटेंगे? यानी उनके वक्तव्य में सुधार और मानवीय दखल घटाने की बात भी थी।
प्रेसवार्ता में क्या बोले उदय प्रताप सिंह
बुधवार को वल्लभ भवन में पत्रकार वार्ता हुई। परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से गडकरी की टिप्पणी पर सवाल पूछा गया। पूछा गया कि भ्रष्टाचार का पता लगाने की बात पर सरकार ने क्या किया।
रिपोर्टर के प्रत्यक्ष विवरण के मुताबिक मंत्री ने कोई स्पष्ट संख्या नहीं बताई। जांच, निरीक्षण या अधिकारियों पर कार्रवाई का कोई ब्यौरा नहीं मिला। इसके बाद वे बातचीत समाप्त करके वहां से चले गए।
मीडिया ने मंत्री से सीधे सवाल पूछे
प्रेसवार्ता में मीडिया ने मंत्री से सीधे सवाल पूछे हैं। क्या विशेष जांच का आदेश निकला? कितने RTO कार्यालयों का निरीक्षण हुआ? कितने फिटनेस सेंटर (वाहन की फिटनेस जांचने वाले केंद्र) जांचे गए? कितनी शिकायतों की जांच हुई? कितने अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई? अगर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो विभाग इसका कारण क्या बताता है? रिपोर्टर के विवरण में इन सवालों के जवाब दर्ज नहीं हैं।
सौरभ शर्मा केस और परिवहन विभाग
अब जरा पीछे चलते हैं। परिवहन विभाग की जवाबदेही पहले भी चर्चा में रही है। मध्य प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक उत्तर में यह दर्ज है। सौरभ शर्मा परिवहन आरक्षक (कांस्टेबल) के पद पर पदस्थ रहा।
वह कई परिवहन कार्यालयों और चेक-पोस्ट पर तैनात रहा। उसी रिकॉर्ड के मुताबिक 2024 में चेक-पोस्ट पर 55,31,044 वाहनों के दस्तावेज जांचे गए। 1,14,669 वाहनों में कमी मिली और चालानी कार्रवाई हुई। यानी औसतन हर 48 वाहन में से करीब एक में कमी मिली।
सौरभ शर्मा मामले को RTO से सीधे न मिलाएं
सौरभ शर्मा के मामले को मौजूदा RTO अधिकारियों से सीधे मिलाना उचित नहीं है। उस मामले की कानूनी प्रक्रिया अलग है। लेकिन विभाग के इतिहास से एक संस्थागत सवाल जरूर उठता है। विवादों के बाद विभाग ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए स्थायी बदलाव क्या किए?
मध्य प्रदेश परिवहन विभाग से अपेक्षा
मामला अब गडकरी के एक बयान तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश परिवहन विभाग (Madhya Pradesh transport department) तस्वीर साफ कर सकता है। वह जांच आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट और शिकायतों की संख्या सार्वजनिक कर सकता है। साथ ही फिटनेस सेंटरों की जांच और कार्रवाई का सत्यापित ब्यौरा दे सकता है।
अब तक तीन बातें साफ हैं। पहली, गडकरी ने 25 सितंबर को मंच से सवाल उठाया। दूसरी, बुधवार को मंत्री से जवाब मांगा गया। तीसरी, कार्रवाई की स्पष्ट संख्या सामने नहीं आई। यही पारदर्शिता सबसे ठोस जवाब होगी। गडकरी की सार्वजनिक टिप्पणी के बाद विभाग ने वास्तव में क्या किया? क्या पांच दिन में निरीक्षण, जांच और कार्रवाई का हिसाब सामने आएगा?