क्या बीजेपी विधायक गौतम टेटवाल ने फर्जी दस्तावेजों से जीता चुनाव?

Aman Vaishnav | Mar 06, 2026, 08:32 IST
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सारंगपुर विधायक गौतम टेटवाल के जाति प्रमाण पत्र पर विवाद गहरा गया है। इंदौर हाईकोर्ट में मंत्री के वकील ने अब नए दस्तावेज पेश किए हैं। याचिकाकर्ता ने उन पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने का आरोप लगाया है।

NEWS IN SHORT

  • बीजेपी विधायक गौतम टेटवाल के वकील ने हाईकोर्ट में हलफनामे के साथ नए दस्तावेज पेश किए हैं।
  • इंदौर हाईकोर्ट के जस्टिस जयकुमार पिल्लई की बेंच इस संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रही है।
  • याचिकाकर्ता कोमलप्रसाद शाक्य का आरोप है कि विधायक ने फर्जी दस्तावेजों से चुनाव जीता है।
  • स्कूल रिकॉर्ड में जाति जीनगर दर्ज है, जबकि नए प्रमाण पत्र में मोची बताया गया है।

News In Detail

मध्य प्रदेश की राजनीति में जाति प्रमाण पत्र का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। इस बार निशाने पर सारंगपुर विधायक गौतम टेटवाल हैं। इंदौर हाईकोर्ट में चल रही इस कानूनी लड़ाई ने अब दूसरी दिशा पकड़ ली है। कोर्ट के सामने पेश किए गए दस्तावेजों ने मामले को और भी ज्यादा उलझा दिया है।



क्या है पूरा मामला?

सारंगपुर विधायक गौतम टेटवाल (राज्यमंत्री) के जाति प्रमाण पत्र विवाद में इंदौर हाईकोर्ट में एक नया मोड़ आया है। मंत्री के वकील ने जज जयकुमार पिल्लई की बेंच के सामने हलफनामे के साथ नए दस्तावेज पेश किए हैं। इस मामले में गुरुवार, 5 मार्च को सुनवाई होनी थी, लेकिन नहीं हुई।



जाति को लेकर चल रहा विवाद

इस मामले में कुछ उलझे हुए तथ्य सामने आए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि मंत्री के स्कूल के दस्तावेज में उनकी जाति जीनगर लिखी हुई है। अब स्कूल के प्राचार्य ने एक और प्रमाण पत्र पेश किया है। इसमें उनकी जाति मोची बताई गई है। इसके अलावा नगर पालिका के दाखिला रिकॉर्ड में भी उनके दादा की जाति मोची होने का दावा किया गया है।



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फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर लड़ा चुनाव

यह विवाद गुना के कोमलप्रसाद शाक्य के जरिए दायर की गई रिट याचिका से जुड़ा हुआ है। शाक्य का आरोप है कि विधायक टेटवाल ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ा है।



याचिकाकर्ता ने अपने आरोपों को सही साबित करने के लिए कई जरूरी दस्तावेज कोर्ट में पेश किए हैं। जैसे कि पिता की सर्विस बुक, परिवार वंशावली और आरटीआई से प्राप्त स्कॉलर पंजी आदि।



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रिकॉर्ड में विधायक की जाति जीनगर

याचिकाकर्ता का कहना है कि 2007 और 2013 में आरटीआई के जरिए रिकॉर्ड मिले हैं। इनमें विधायक की जाति जीनगर और वर्ग पिछड़ा लिखा है।





वहीं बचाव पक्ष ने 2011 का एक प्रमाण पत्र पेश किया है। इसमें जाति मोची लिखी हुई है। याचिकाकर्ता ने इस नए प्रमाण पत्र को संदिग्ध बताते हुए उसकी सत्यता पर सवाल उठाए हैं।



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