विधायक प्रीतम लोधी के प्रदर्शन में बवाल: समर्थकों ने युवक को पीटा, लगे भाजपा सरकार मुर्दाबाद के नारे
एसपी कार्यालय पर ज्ञापन
प्रदर्शनकारी दतिया में एसपी कार्यालय पहुंचे थे। यहां उन्होंने एसपी मयूर खंडेलवाल को ओबीसी महासभा की ओर से ज्ञापन सौंपा। संगठन ने मांग की कि मामले में नामजद आरोपियों को जिले के सरकारी निर्माण कार्यों से हटाया जाए। साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए, ताकि आगे उन्हें सरकारी ठेके न मिल सकें।
संगठन का दावा है कि ज्ञापन में पांच लोगों के नाम दिए गए हैं। ये लोग जिले में कई सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े हैं। इनमें दो स्कूलों, एसपी कार्यालय और इंदरगढ़ थाने के निर्माण कार्य शामिल बताए गए हैं। संगठन ने इन लोगों से जुड़े निर्माण कार्यों के ठेके रद्द करने की मांग भी की है।
वायरल वीडियो में क्या दिखा
वीडियो में एक युवक माइक लेकर नारे लगाता दिखता है। वह प्रीतम लोधी को चंबल टाइगर बताकर उनके समर्थन में नारे लगाता है। फिर वह दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के खिलाफ भी नारेबाजी करने लगता है।
इसी दौरान भीड़ में मौजूद एक अन्य समर्थक आगे आया। उसने युवक के हाथ से माइक छीन लिया। इसके बाद दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
माइक छिनने के बाद युवक ने भाजपा सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए। यह वीडियो अब चर्चा में है।
यह भी साफ नहीं है कि युवक को किसी ने मारा या नहीं। रिपोर्ट में सिर्फ धक्का-मुक्की और झूमाझटकी का जिक्र है। किसी चोट या शिकायत की जानकारी सामने नहीं आई है।
15 सितंबर की घटना
यह प्रदर्शन 15 सितंबर की घटना से जुड़ा है। दतिया में प्रभारी सहायक यंत्री भूपेंद्र कुमार राजपूत के साथ घटना हुई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक मामला लूट और हत्या के प्रयास का था। वहीं दूसरी रिपोर्ट इसे मारपीट बता रही है। यानी घटना के स्वरूप पर दोनों रिपोर्टों में फर्क है। एफआईआर में कौन सी धाराएं हैं, यह स्पष्ट नहीं है।
इस घटना को आधार बनाकर ही गुरुवार को प्रदर्शन हुआ था। विधायक प्रीतम लोधी का कहना है कि दोषियों पर कार्रवाई हो।
उपयंत्री को हटाने की मांग
ज्ञापन में एक और मांग है। संगठन ने मध्यप्रदेश पुलिस आवास ग्वालियर क्रमांक-1 के एक उपयंत्री (जूनियर इंजीनियर) पर कार्रवाई मांगी है। उन्हें सेवा से पृथक करने की मांग की गई है।
कलेक्टर को भी ज्ञापन
ओबीसी महासभा के प्रदेश प्रभारी जितेंद्र लोधी ने कलेक्टर के नाम भी ज्ञापन दिया है। इसमें मामले की जांच की मांग की गई है। संगठन चाहता है कि आरोपियों की भूमिका जांचकर नियमानुसार कार्रवाई हो।
यानी एसपी और कलेक्टर, दोनों के पास मांगें पहुंच चुकी हैं। अब सबकी नजर प्रशासन के जवाब पर है।
अब आगे क्या होगा
सबसे पहले पुलिस की कार्रवाई साफ होनी चाहिए। 15 सितंबर के मामले में अब तक क्या हुआ, यह बताया जाना जरूरी है। पांचों नामों की स्थिति भी साफ होनी चाहिए।
दूसरी बात वीडियो की जांच है। क्या माइक को लेकर हुई खींचतान पर कोई शिकायत दर्ज होगी? क्या भाजपा या विधायक की ओर से कोई बयान आएगा? ये सवाल अभी बाकी हैं।
मान लीजिए ज्ञापन में लिखे सभी नाम एफआईआर में हों। तब ब्लैकलिस्ट की मांग का आधार मजबूत होगा। यदि नहीं हों, तो यह मांग सिर्फ संगठन की राय रहेगी। इसलिए तथ्य सामने आने तक किसी को दोषी कहना ठीक नहीं।
यह मामला विधायक प्रीतम लोधी के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसमें एक सरकारी इंजीनियर पर हमला भी है। साथ ही ठेकेदारों और राजनीति का सवाल भी जुड़ा है। जांच ही सच बताएगी।