नई योजना से पहले बड़ा संकट! 60 दिन बंद रहेगा मनरेगा, 40% बोझ अब मध्य प्रदेश पर
एक जुलाई से मनरेगा की जगह लागू होने जा रही वीबीजीराम-जी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना को लेकर मध्य प्रदेश में कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदेश में अभी तक नई योजना का गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है और न ही संचालन के नियम सामने आए हैं। इसके बावजूद योजना लागू करने की तैयारी चल रही है।
नई व्यवस्था के तहत कृषि सीजन के दौरान 60 दिन मनरेगा के नए काम बंद रहेंगे, जबकि मजदूरी के खर्च में पहली बार राज्य सरकार को 40 प्रतिशत हिस्सेदारी भी वहन करनी होगी। ऐसे में रोजगार और वित्तीय बोझ, दोनों को लेकर नई चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है।
मुख्य बातें-
- 1 जुलाई से वीबीजीराम-जी(VBGRAM-G) लागू करने की तैयारी।
- मध्य प्रदेश में अभी तक गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं।
- योजना संचालन के नियम भी अंतिम रूप में नहीं।
- कृषि सीजन में 60 दिन मनरेगा के नए काम बंद रहेंगे।
- इन 60 दिनों में मनरेगा मजदूरों को रोजगार नहीं मिलेगा।
- मजदूरी का 40% खर्च अब मध्य प्रदेश सरकार उठाएगी।
- पहले मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी।
- जिलों को नई योजना के लिए एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश।
गजट नहीं, नियम नहीं...फिर भी लागू करने की तैयारी
प्रदेश में नई योजना लागू होने से पहले सबसे बड़ा सवाल इसकी प्रशासनिक तैयारी को लेकर है। अभी तक न तो गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ है और न ही संचालन संबंधी विस्तृत नियम सामने आए हैं। इसके बावजूद एक जुलाई से योजना लागू करने की तैयारी चल रही है। इससे शुरुआती दौर में कई स्तरों पर भ्रम और कामकाज प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
सबसे बड़ा बदलाव: 60 दिन नहीं मिलेगा मनरेगा में रोजगार
नई व्यवस्था के तहत राज्य सरकार कृषि के व्यस्त सीजन को नोटिफाई करेगी। इसी अवधि में मनरेगा के नए कार्य शुरू नहीं होंगे। यानी बुआई, कटाई और खेती से जुड़े प्रमुख दिनों में मनरेगा मजदूरों को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। सरकार का तर्क है कि इस दौरान खेतों में श्रमिकों की जरूरत अधिक रहती है, लेकिन इससे मनरेगा पर निर्भर परिवारों की आय प्रभावित हो सकती है।
अब मजदूरी का 40% खर्च,उठाएगा मध्य प्रदेश
नई योजना का दूसरा बड़ा बदलाव वित्तीय व्यवस्था में है। अब तक मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन नई व्यवस्था में मजदूरी का 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार को देना होगा। इससे मध्य प्रदेश के बजट पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ने की संभावना है।
125 दिन रोजगार, लेकिन शर्तों के साथ
नई योजना में रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गई है। हालांकि, इसके साथ 60 दिन का ड्राई पीरियड भी जोड़ा गया है, जिसमें मनरेगा के तहत नए कार्य नहीं होंगे। ऐसे में कागज पर रोजगार के दिन बढ़ने के बावजूद पूरे वर्ष लगातार काम मिलने पर सवाल बने हुए हैं।
नई व्यवस्था के लिए प्रशासनिक तैयारी तेज
सरकार ने सभी जिलों को नई योजना के अनुरूप एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। वहीं मनरेगा के ऐसे कार्य, जो नई योजना में शामिल नहीं हैं, उन्हें 30 जून तक पूरा करने पर जोर दिया गया है ताकि बाद में अतिरिक्त वित्तीय बोझ राज्य सरकार पर न आए।
नए जॉब कार्ड और पंचायतों का वर्गीकरण
नई योजना के तहत मजदूरों के नए जॉब कार्ड बनाए जाएंगे। तब तक पुराने कार्ड मान्य रहेंगे। साथ ही पंचायतों का श्रेणीवार वर्गीकरण किया जाएगा, जिसके आधार पर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय होगी।
बड़ा सवाल
नई योजना का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार बढ़ाना बताया जा रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश में बिना गजट नोटिफिकेशन और स्पष्ट नियमों के शुरुआत, कृषि सीजन में 60 दिन काम बंद रहने तथा राज्य पर बढ़ने वाले 40 प्रतिशत वित्तीय बोझ को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इन चुनौतियों का समाधान किस तरह करती है।
उक्त मामले में मनरेगा आयुक्त अवि प्रसाद से उनका पक्ष जानने के लिए मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से भी सवाल भेजे गए, हालांकि खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
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