एमपी में तबादलों की डेडलाइन बढ़ी, मोहन कैबिनेट में बड़ा फैसला

Amresh Kushwaha | Jun 16, 2026, 14:22 IST
मोहन कैबिनेट
मध्यप्रदेश में तबादलों की समय सीमा आज रात 12 बजे तक बढ़ा दी गई है। मंत्रियों की मांग पर सीएम मोहन ने यह फैसला लिया है। अब मंत्री अपने विभागों के लंबित तबादलों को निपटाने में जुट गए हैं।

Mohan Cabinet: मध्यप्रदेश में तबादलों की डेडलाइन को लेकर मंत्रियों की मांग आखिरकार मान ली गई है। सीएम मोहन यादव ने तबादलों के लिए समय सीमा आज रात 12 बजे (16 जून) तक बढ़ा दी है। यह फैसला मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया है।



इससे पहले तबादलों की आखिरी तारीख सोमवार 15 जून को खत्म हो गई थी। कई मंत्रियों के विभागों में अभी भी कई तबादले लंबित थे। इसलिए कैबिनेट बैठक में मंत्रियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस पर और समय देने की मांग रखी थी।



कई मंत्री चाहते थे कि उन्हें सात दिन का अतिरिक्त समय मिल जाए, ताकि वे अपने-अपने विभागों में तबादलों की प्रक्रिया ठीक से पूरी कर सकें।



वहीं, मुख्यमंत्री ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया। हालांकि, स्थिति को देखते हुए उन्होंने सिर्फ एक दिन की अतिरिक्त मोहलत देने पर सहमति जताई है।



अब साफ है कि तय समयसीमा के भीतर ही तबादलों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, और आज रात 12 बजे के बाद डेट आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।



c71483a7-11b


इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की लागत को मंजूरी

मोहन कैबिनेट ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की बढ़ी हुई लागत को हरी झंडी दे दी है। पहले इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 7 हजार 500 करोड़ रुपए आंकी गई थी। वहीं, अब यह बढ़कर 12 हजार 900 करोड़ रुपए हो गई है। बढ़ी हुई जरूरतों और खर्च को देखते हुए सरकार ने संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।



इसके साथ ही कैबिनेट ने करीब 24 हजार करोड़ रुपए की अलग-अलग विभागीय योजनाओं को भी जारी रखने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं से विकास कार्यों की रफ्तार बनी रहेगी और काम बिना रुकावट आगे बढ़ता रहेगा।



स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति को मिली मंजूरी

मोहन कैबिनेट ने स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। इस नीति का मकसद प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करना है, ताकि अस्पतालों और जांच केंद्रों की व्यवस्था बेहतर हो सके।



इसके तहत परोपकारी, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों को सरकार की तरफ से मदद दी जाएगी। इससे वे अपनी सुविधाओं को बढ़ा सकेंगे, नए और आधुनिक उपकरण खरीद सकेंगे और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध करा सकेंगे।



इस नीति को जमीन पर लागू करने और इसके नियम तय करने के लिए पांच मंत्रियों की एक समिति भी बनाई गई है। यह समिति अपनी सिफारिशें सरकार को देगी, जिसके आधार पर आगे काम होगा।



सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर फैसला

मोहन कैबिनेट ने फैसला लिया है कि रीवा, देवास और गुना जिलों के कुल 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर निजी संचालन में दिया जाएगा। इन केंद्रों में 20 बिस्तर से ज्यादा की सुविधा है, लेकिन डॉक्टर और विशेषज्ञ स्टाफ की कमी की वजह से यह कदम उठाया जा रहा है।



अब इन केंद्रों का संचालन निजी एजेंसियां करेंगी। वे डॉक्टर, स्टाफ और बाकी जरूरी संसाधन खुद लेकर आएंगी। हालांकि अस्पताल की संपत्ति सरकार की ही रहेगी और दवाइयों की व्यवस्था सरकार की तरफ से की जाएगी।



इसके लिए टेंडर प्रक्रिया होगी और सबसे कम लागत वाला प्रस्ताव देने वाले को जिम्मेदारी दी जाएगी। साथ ही इन अस्पतालों में आयुष्मान योजना का लाभ भी मरीजों को मिलता रहेगा।



इसके अलावा सरकार ने यह भी तय किया है कि जो परोपकारी या सामाजिक संस्थाएं मध्यप्रदेश में अस्पताल खोलना चाहेंगी, उन्हें जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। सुपर स्पेशलिटी उपकरणों के लिए क्षेत्रवार कैपिटल ग्रांट देने का भी फैसला हुआ है।



इन सभी नियमों को तय करने के लिए पांच मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है। इसमें राजेंद्र शुक्ल, राकेश सिंह, चेतन्य काश्यप, नरेंद्र शिवाजी पटेल और राधा सिंह शामिल हैं, जो पूरी प्रक्रिया के मापदंड तय करेंगे।



MP News: मोहन कैबिनेट की ये खबरें भी पढ़िए...

मोहन कैबिनेट से 48 लाख परिवारों को मिला बड़ा तोहफा, मुफ्त होगी संपत्तियों की रजिस्ट्री



मोहन कैबिनेट से किसानों को मिली राहत भरी सौगात, 6 जिलों में नए मेडिकल कॉलेज को मिली मंजूरी



मोहन कैबिनेट ने किसानों को दिया बड़ा तोहफा, SC छात्रों को मिलेंगे 10 हजार रुपए, FTRI को मंजूरी



मोहन कैबिनेट बैठक: सिंहस्थ-2028 की तैयारी तेज, किसानों और जल अभियान पर फोकस



Tags:
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
  • मध्यप्रदेश
  • सीएम मोहन यादव
  • Mohan cabinet
  • मोहन कैबिनेट
  • कैबिनेट बैठक