बैतूल के वाटर मैन मोहन नागर पद्मश्री से सम्मानित, जानिए उनकी प्रेरक कहानी

Pawan Modiya | Jun 23, 2026, 19:36 IST
मोहन नागर को पद्मश्री
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मोहन नागर को पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है। उन्हें जल संरक्षण और पर्यावरण क्षेत्र में काम के लिए यह सम्मान मिला है। उन्हें बैतूल का वाटर मैन भी कहा जाता है।

    समझें क्या है पूरा मामला

    • मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मोहन नागर को पद्मश्री मिला है।
    • यह सम्मान उन्हें सामाजिक कार्य क्षेत्र में दिया गया है।
    • राष्ट्रपति भवन में 23 जून 2026 को सम्मान समारोह हुआ।
    • मोहन नागर को बैतूल का वाटर मैन भी कहा जाता है।
    • उन्होंने जल संरक्षण के लिए हजारों संरचनाएं बनवाई हैं।

    मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मोहन नागर को इस साल पद्मश्री सम्मान मिला है। यह सम्मान देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में शामिल है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 23 जून 2026 को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान दिया।



    पढ़ाई के बाद नौकरी के बजाय चुना यह रास्ता

    मोहन नागर का जन्म 23 फरवरी 1968 को हुआ था। उनके पिता का नाम भंवरलाल नागर और माता का नाम गुलाब देवी नागर है। बचपन से ही उनका मन समाज सेवा में लगता था। उन्होंने उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए (Master of Arts) किया। इस पढ़ाई ने उन्हें समाज और प्रशासन को समझने में मदद की।



    पढ़ाई के बाद मोहन नागर ने नौकरी का रास्ता नहीं चुना। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा में लगा दिया। वे बैतूल की भारत भारती शिक्षण संस्था से जुड़े रहे। इस संस्था के जरिए उन्होंने शिक्षा और सामाजिक मूल्यों को बढ़ाने का काम किया। वे मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष भी हैं। यह परिषद सरकार से जुड़ी एक संस्था है। इसका काम लोगों को विकास कार्यों से जोड़ना है।



    जल संरक्षण के काम ने दिलाई अलग पहचान

    सामाजिक कार्यकर्ता मोहन नागर की सबसे बड़ी पहचान जल संरक्षण के काम से जुड़ी है। इसी वजह से लोग उन्हें बैतूल का वाटर मैन कहते हैं। मध्य भारत में अक्सर पानी की कमी होती है। बारिश कम होने और जंगल कटने से यह समस्या बढ़ती जा रही है। मोहन नागर ने इसका हल गांव वालों के साथ मिलकर निकाला। उन्होंने लोगों को जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम किए।



    उनकी मुहिम से अब तक करीब 75 हजार जल संरचनाएं बन चुकी हैं। इनमें चेक डैम, तालाब और रिचार्ज पिट शामिल हैं। यह संरचनाएं बारिश का पानी रोकती हैं। इससे जमीन के नीचे का पानी भी बढ़ता है। गर्मी के मौसम में भी लोगों को पानी मिल पाता है। इन कामों से कई गांवों की तस्वीर बदल गई है।



    ताप्ती के किनारे लगाए हजारों पौधे, माचना नदी को जिंदा किया

    मोहन नागर ने ताप्ती नदी के किनारे पौधरोपण का भी बड़ा काम किया है। इसे ताप्ती उपवन नाम दिया गया है। इसके तहत हजारों पेड़ लगाए गए हैं। इससे मिट्टी में पानी रोकने की ताकत बढ़ी है। आसपास के इलाकों में हरियाली भी बढ़ी है। इससे वहां के जीव-जंतुओं को भी फायदा मिला है।



    उनकी पहल पर गंगावतरण अभियान और बोरी बंधान जैसे कार्यक्रम भी चलाए गए। इसके अलावा माचना नदी को फिर से जिंदा करने का काम भी हुआ। इन अभियानों ने नदियों और तालाबों को नया जीवन दिया। आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में इनका सबसे ज्यादा असर दिखा है। वहां पानी सीधे खेती और सेहत से जुड़ा है।



    पद्मश्री के अलावा भी मिल चुके कई सम्मान

    मोहन नागर पहले भी कई सम्मान पा चुके हैं। उन्हें 2019 में राष्ट्रीय जल प्रहरी सम्मान मिला था। 2020 में जल शक्ति मंत्रालय ने उन्हें वाटर हीरो के रूप में पहचान दी। मध्य प्रदेश सरकार ने गौ संरक्षण के काम के लिए उन्हें गोपाल सम्मान दिया। भूजल संरक्षण के लिए उन्हें भाऊराव देवरस राष्ट्रीय सम्मान भी मिला। इसके अलावा उनकी कविता संग्रह चातुर्मास के लिए दुष्यंत कुमार साहित्य अकादमी सम्मान भी मिला है।



    अब उनके इन्हीं वर्षों के काम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। पद्मश्री भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। यह सम्मान कला, विज्ञान, समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में दिया जाता है। मोहन नागर को यह सम्मान सामाजिक कार्य के क्षेत्र में मिला है। उनकी कहानी बताती है कि एक व्यक्ति की मेहनत से भी बड़ा बदलाव आ सकता है।



    मध्य प्रदेश के कई जिलों में पानी की स्थिति सुधरी

    उनके काम से मध्य प्रदेश के कई जिलों में पानी की स्थिति सुधरी है। हजारों किसानों और ग्रामीणों को इसका सीधा फायदा मिला है। यह सम्मान उन सभी लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो जमीनी स्तर पर समाज और पर्यावरण के लिए काम करते हैं। मोहन नागर की यह यात्रा एक छोटे शहर के समाजसेवी से राष्ट्रीय सम्मान तक पहुंचने की मिसाल है।



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