लाडली बहना को पैसा, हमें नहीं? मानदेय के लिए शिवराज के बंगले पर बैठीं रसोइया बहनें, सीएम हाउस की ओर किया कूच
भोपाल में शनिवार को हजारों महिलाओं ने मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच किया। इन महिलाओं का मध्यान्ह भोजन और सांझा चूल्हा योजना का मानदेय चार महीने से अटका है।
मानदेय यानी काम के बदले मिलने वाली तय मासिक रकम। इसी रकम के लिए ये रसोइया महिलाएं प्रदेश के अलग-अलग जिलों से भोपाल पहुंचीं थी।
भोपाल में क्यों जुटीं महिलाएं?
महिलाएं पहले मुख्यमंत्री निवास की ओर चलीं। इसके बाद वे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बंगले के सामने पहुंचीं। वहां वे घंटों बैठी रहीं।
सोचिए एक बार। जो महिलाएं स्कूल के लिए खाना पकाती हैं, वही रकम के लिए बैठी थीं।
लाडली बहना को पैसा, हमें नहीं?
महिलाओं का आरोप सीधा है। उनका कहना है कि लाडली बहना योजना में बिना काम पैसा मिल रहा है। काम करने वालों को मानदेय नहीं मिल रहा।
सवाल भी सीधा है। काम करने वाली बहनों का मेहनताना चार महीने क्यों रुका?
और मांग सिर्फ मानदेय की नहीं थी।
16 सूत्रीय मांगों का लिखा पत्र
भोपाल में शनिवार को हजारों रसोइया बहनों ने मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच किया। मध्यान्ह भोजन और सांझा चूल्हा योजना का मानदेय चार महीने से नहीं मिला। महिलाएं शिवराज सिंह चौहान के बंगले के सामने घंटों बैठी रहीं। प्रदेश अध्यक्ष सरिता बघेल ने मुख्यमंत्री को 16 मांगों का पत्र लिखा। पत्र में रसोइया बहनों की दिक्कतें गिनाई गई हैं। स्व-सहायता समूह (मिलकर काम करने वाला महिलाओं का समूह) भी इसमें शामिल हैं। अधिकारियों से समाधान का आश्वासन मिलने के बाद महिलाएं लौट गईं।
सांझा चूल्हा की राशि 4 महीने लेट
महासंघ ने पिछली बकाया राशि तुरंत जारी करने को कहा है। सभी जिलों में भुगतान की एक तय तारीख बनाने की मांग भी है।
रसोइया बहनों के लिए मानदेय 3,000 रुपए करने की मांग रखी गई है। अभी यह 500 रुपए है, यानी रोज के करीब 17 रुपए। महासंघ चाहता है कि यह रकम समूह की लागत राशि से न कटे।
अनाज सिर्फ 20-25% क्यों मिला?
पोषण आहार योजना में खाद्यान्न (अनाज) की कमी अहम मुद्दा है। पोर्टल (सरकारी वेबसाइट) पर असली हितग्राहियों की संख्या दर्ज है। हितग्राही यानी योजना का लाभ पाने वाले। उस अनुपात में समूहों को पूरा अनाज नहीं मिल रहा।
कई समूहों को सिर्फ 20 से 25 प्रतिशत अनाज मिल पा रहा है। महासंघ चाहता है कि असली छात्र संख्या पर 100 प्रतिशत अनाज मिले। समूहों को अनाज और राशि का सिर्फ 50 प्रतिशत मिल रहा है। यह समस्या भी उठाई गई है।
फिंगरप्रिंट और रेट पर क्या मांग?
अनाज उठाव समूह के अध्यक्ष और सचिव के फिंगरप्रिंट (अंगुली के निशान) से हो। थर्ड पार्टी (बाहरी पक्ष) के जरिए नहीं। दुकानदारों के फिंगरप्रिंट वाली व्यवस्था खत्म हो।
प्रति हितग्राही नाश्ते के 2.88 रुपए और भोजन के 4.82 रुपए तय हैं। आप खुद सोचिए, आज इतने रुपए में क्या आता है? महासंघ चाहता है कि महंगाई के अनुरूप इन दरों में इजाफा हो।
सेवा अवधि 65 साल करने की मांगी
मांगपत्र में रसोइया बहनों की सेवा अवधि 65 वर्ष करने का प्रस्ताव है। प्रदेश में करीब 2 लाख 32 हजार रसोइया बहनें हैं। महासंघ ने इनकी जून महीने की 15 दिन की लंबित मजदूरी मांगी है।
यह मजदूरी 2023, 2024, 2025 और 2026 के लिए है। जांच के बाद एकमुश्त (एक साथ) भुगतान की मांग है। रसोइया बहनों को कर्मचारियों जैसा दर्जा देने की मांग भी रखी गई है।
बीमा और पेंशन की मांग क्या है?
महासंघ ने 25 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा मांगा है। बीमा यानी इलाज के खर्च की सुरक्षा। पेंशन और सामाजिक सुरक्षा भी चाहिए। यह रसोइया बहनों के साथ समूहों के अध्यक्ष और सचिव के लिए है।
अध्यक्ष और सचिव को 1,000 रुपए मासिक मानदेय देने की मांग भी है।
अब आगे क्या होगा?
प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों ने समाधान का आश्वासन दिया। इसके बाद महिलाएं लौट गईं। लेकिन असली कहानी अभी बाकी है।
अब निगाहें इस पर हैं कि बकाया राशि कब जारी होती है। क्या सरकार 16 सूत्रीय मांगों पर जल्द फैसला लेगी?
- भोपाल में महिलाओं का प्रदर्शन क्यों हुआ?
भोपाल में हजारों महिलाओं ने मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच किया क्योंकि उनका मध्यान्ह भोजन और सांझा चूल्हा योजना का मानदेय चार महीने से अटका हुआ है। - महिलाओं की क्या मुख्य मांगें थीं?
महिलाओं ने 16 सूत्रीय मांगों का पत्र लिखा है, जिसमें मानदेय बढ़ाकर 3000 रुपए करने, बकाया राशि जारी करने, और अनाज की कमी को दूर करने की मांगें शामिल हैं। - सरकार ने प्रदर्शन के बाद क्या आश्वासन दिया?
प्रदर्शन के बाद संबंधित अधिकारियों ने समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन अभी तक बकाया राशि कब जारी होगी, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।