देश में 17 साल बाद सबसे सूखा मानसून, राजस्थान में 21% तो MP में 6% कम बरसा पानी, CG भी पीछे

Aman Vaishnav | Sept 22, 2026, 08:40 IST
देश में 17 साल बाद सबसे सूखा मानसून
देश में 17 साल बाद मानसून में 15% की सबसे बड़ी कमी दर्ज हुई है। देश के 178 प्रमुख बांधों में पिछले साल के मुकाबले 21% कम पानी बचा है, जिससे बिजली संकट का भी डर है।

मानसून सीजन खत्म होने में अब केवल 9 दिन का समय बचा है। पूरे देश में 1 जून से 21 सितंबर तक 827.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 703.7 मिमी पानी ही बरसा है। यानी देश भर में 123.5 मिमी की भारी कमी दर्ज की गई है।



यह सामान्य से 15% कम है। इससे पहले साल 2009 में 18.3% की कमी देखी गई थी। पूरे सीजन के लिए 868.6 मिमी का कोटा पूरा होना जरूरी होता है, लेकिन अब बचे हुए 9 दिनों में इस 15% के अंतर की भरपाई होना लगभग नामुमकिन लग रहा है।



देश के राज्यों में बारिश की कमी का हाल

देश के 47% जिलों में 20% से ज्यादा बारिश की कमी बनी हुई है।



  • आंध्र प्रदेश: 40% की कमी दर्ज हुई है।
  • पंजाब: 39% की कमी आई है।
  • बिहार: 37% कम बारिश हुई है।
  • कर्नाटक: 31% की गिरावट रही है।
  • केरल: 28% की कमी देखी गई है।
  • हरियाणा: 23% बारिश कम रही है।
  • राजस्थान: 21% की कमी दर्ज की गई है।
  • महाराष्ट्र: 17% कम पानी बरसा है।
  • उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़: दोनों राज्यों में 5-5% की कमी रही है।

मध्य प्रदेश: 55 में से 36 जिलों में पानी की भारी तंगी

मध्य प्रदेश में 21 सितंबर तक 865.8 मिमी पानी गिरा है, जबकि यहां का सामान्य आंकड़ा 922.6 मिमी है। यानी पूरे प्रदेश में बारिश 6% कम दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि 55 में से 36 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा ही नहीं हुआ है।



  • सबसे ज्यादा सूखे जिले: 11 जिलों में कमी 16% से लेकर 49% तक पहुंच गई है। इनमें पश्चिमी मध्य प्रदेश की हालत सबसे ज्यादा खराब है।
  • अलीराजपुर: 49% की कमी
  • नर्मदापुरम: 34% की कमी
  • रतलाम: 33% की कमी
  • झाबुआ: 32% की कमी
  • हरदा: 31% की कमी
  • इंदौर और छिंदवाड़ा: 23% की कमी

भोपाल और पूर्वी जिलों में जमकर बरसे बादल

जहां पश्चिमी मप्र पानी के लिए तरस रहा है, वहीं भोपाल में 928.2 मिमी के मुकाबले 1063.3 मिमी पानी बरसा, जो सामान्य से 12% ज्यादा है। यहां बड़ा तालाब पूरा भर गया और भदभदा व कलियासोत बांध के गेट 5-5 बार खोलने पड़े।



प्रदेश के सबसे ज्यादा बारिश वाले 5 जिले:



  • मऊगंज: 1422.8 मिमी बारिश (सामान्य: 476.7 मिमी)
  • सतना: 1318.7 मिमी बारिश (सामान्य: 399.3 मिमी)
  • निवाड़ी: 1183.7 मिमी बारिश (सामान्य: 420.2 मिमी)
  • शहडोल: 1130.4 मिमी बारिश (सामान्य: 165.5 मिमी)
  • मंडला: 1113.8 मिमी बारिश (सामान्य: 57.7 मिमी)

मप्र के 40 बड़े जलाशयों की मौजूदा स्थिति

प्रदेश के 40 बड़े जलाशयों में से केवल 6 जलाशय ही पूरी तरह भर पाए हैं।



  • 50% से कम भरे: 7 जलाशय
  • 50% से 75% भरे: 3 जलाशय
  • 75% से 90% भरे: 13 जलाशय
  • 90% से 100% भरे: 11 जलाशय
  • 100% या उससे ज्यादा भरे: 6 जलाशय

क्या है अल नीनो और मौसम पर इसका असर?

मौसम विभाग के अनुसार बारिश में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे मुख्य कारण अल नीनो है।



प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय इलाके में जब समुद्री हवाएं कमजोर पड़ने लगती हैं, तो दक्षिण अमेरिकी तट के आसपास का समुद्री पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है।



पानी के इसी तरह गर्म होने की घटना को अल नीनो कहा जाता है। यह पूरी दुनिया की हवाओं और बादलों के चलने के रास्ते को बदल देता है, जिससे भारत समेत कई देशों में मानसून कमजोर पड़ जाता है और सूखा पड़ता है।



राजस्थान से मानसून की वापसी

19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है। पंजाब, आधा हरियाणा और राजस्थान के कई इलाकों से मानसून विदा हो चुका है।



अगले 24 से 48 घंटों में दिल्ली, बाकी हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से भी मानसून पूरी तरह लौट जाएगा।



बंगाल की खाड़ी में एक नया सिस्टम तैयार

बंगाल की खाड़ी में एक नया सिस्टम तैयार हो रहा है, जो डीप डिप्रेशन में बदल रहा है। यह अगले 24 से 36 घंटों में ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा।



इसके असर से अगले 3 से 4 दिनों में देश के पूर्वी, मध्य और दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश में भी 3 दिन बाद इस आखिरी दौर से तेज बारिश होने के आसार हैं, जिससे कमी वाले जिलों को कुछ राहत मिल सकती है।



खेती और बिजली पर असर?

बारिश की इस कमी और सूखे जैसे हालात का सीधा असर हमारी खेती-किसानी और बिजली आपूर्ति पर पड़ने वाला है...



खरीफ फसल को तगड़ा नुकसान

  • अगस्त तक खरीफ फसलों की बुवाई पहले ही 1.7% कम चल रही थी। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए (ICRA) के मुताबिक, इसका कुल रकबा 2% तक घट सकता है।
  • ज्यादा तापमान, अल नीनो और कम पानी की वजह से खेतों की मिट्टी में नमी कम हो गई है।
  • जानकारों का अनुमान है कि देश में चावल का उत्पादन 1 करोड़ टन घटकर 14.4 करोड़ टन रह सकता है, जो पिछले साल के मुकाबले 6.5% कम होगा।

रबी की बुवाई पर संकट

  • अक्टूबर के महीने से गेहूं और चना जैसी रबी फसलों की बुवाई शुरू हो जाएगी।
  • शुरुआत में खेतों की सिंचाई के लिए पानी की बहुत जरूरत होती है, लेकिन उत्तर और दक्षिण भारत के जलाशयों में पानी काफी घट गया है। इससे फसलों पर भारी दबाव रहेगा।

बांध खाली होने से बिजली का दोहरा संकट

  • देश के 178 बड़े जलाशयों में इस वक्त सिर्फ 131.17 अरब क्यूबिक मीटर पानी बचा है, जो पिछले साल से पूरे 21% कम है।
  • इससे दोहरी परेशानी होगी: पहली पानी कम होने से हाइड्रो पावर प्लांट से बिजली का उत्पादन घट जाएगा। दूसरी गर्मी और सूखे की वजह से खेतों व घरों में बिजली की मांग और ज्यादा बढ़ जाएगी।

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