फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट पर नौकरी पाने वाले 47 शिक्षकों का दोबारा होगा मेडिकल टेस्ट

Ratan Kumar Mishra | Jul 03, 2026, 19:00 IST
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मुरैना में 47 शिक्षकों पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से नौकरी पाने का आरोप है। लोक शिक्षण संचनालय ने मुरैना कलेक्टर को सूची भेजी है, इस सूची में शामिल शिक्षकों का अब दोबारा मेडिकल टेस्ट होगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र: मुरैना में 47 शिक्षकों पर फर्जी सर्टिफिकेट से नौकरी पाने का आरोप है।
  • DPI का सख्त आदेश: लोक शिक्षण संचनालय ने कलेक्टर को पत्र लिखकर जांच के आदेश दिए।
  • दोबारा मेडिकल टेस्ट: कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ सभी संदिग्ध शिक्षकों का दोबारा मेडिकल कराएंगे।
  • जेल जाने का डर: कार्रवाई और एफआईआर के डर से शिक्षक अपने दस्तावेज नहीं छुपा रहे।
  • दस्तावेजों की जांच: जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी प्राचार्यों से शिक्षकों के रिकॉर्ड मांगे हैं।

मुरैना जिले में 47 शिक्षकों पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का आरोप लगा है। लोक शिक्षण संचनालय ने इनकी सूची कलेक्टर मुरैना को भेजी है। आरोप है कि इन प्रमाण पत्रों के दम पर सरकारी नौकरी पाई गई। कलेक्टर अब सभी शिक्षकों का दोबारा मेडिकल टेस्ट कराएंगे। मामला सामने आने के बाद कई शिक्षक अपने कागज जमा करने से बच रहे हैं।



शिकायत से शुरू हुआ मामला

यह मामला सबलगढ़ की कृषि उपज मंडी निवासी अनार सिंह की शिकायत से शुरू हुआ। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को पत्र लिखा। पत्र में मुरैना के 47 शिक्षकों के नाम दिए गए। आरोप था कि इन सभी ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी पाई है।



उमंग सिंघार ने 11 अगस्त 2025 को लोक शिक्षण संचनालय (DPI – Directorate of Public Instruction) को पत्र भेजा। उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की। इसके बाद डीपीआई ने 18 मार्च 2026 को कलेक्टर मुरैना को पत्र लिखा। पत्र में सभी संदिग्ध शिक्षकों की जांच के आदेश दिए गए।



जिला शिक्षा कार्यालय की सुस्ती सामने आई

कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO – District Education Officer) को जांच के निर्देश दिए। सभी संदिग्ध शिक्षकों के प्रमाण पत्र मंगवाने को कहा गया। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की। पूछे जाने पर अधिकारियों ने सिर्फ इतना कहा कि प्रमाण पत्र मांगे गए हैं।



दिलचस्प बात यह है कि सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्र पहले से ही उनकी सेवा पुस्तिका में मौजूद हैं। इसके बावजूद अब तक इन्हें एकत्रित नहीं किया गया। सूची सामने आने के बाद संबंधित शिक्षक भी अपने कागज पेश करने से कतरा रहे हैं। कई शिक्षकों को जेल जाने का डर सता रहा है।



सूची में कौन-कौन शामिल

शिकायत में शामिल 47 नामों में ज्यादातर सबलगढ़ ब्लॉक के शासकीय स्कूलों से जुड़े हैं। कई मामलों में पति-पत्नी और भाई-बहन तक एक साथ सूची में हैं। कुछ मामलों में दिव्यांग प्रमाण पत्र के साथ EWS (Economically Weaker Section) प्रमाण पत्र भी फर्जी बताया गया है। एक शिक्षक पर मूल निवासी प्रमाण पत्र फर्जी होने का भी आरोप है।



शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ शिक्षकों की नियुक्ति तिथि और उनके बच्चों की जन्म तिथि में गड़बड़ी है। एक मामले में जनसंख्या नीति उल्लंघन का भी जिक्र है। इन सभी आरोपों की अभी जांच बाकी है। किसी भी शिक्षक पर अब तक दोष सिद्ध नहीं हुआ है, इसलिए इन्हें फिलहाल आरोपित ही माना जाना चाहिए।



अब आगे क्या होगा

कलेक्टर मुरैना ने साफ किया है कि अब सभी शिक्षकों का दोबारा मेडिकल टेस्ट कराया जाएगा। प्रमाण पत्रों की बारीकी से जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट डीपीआई को भेजी जाएगी। अगर आरोप सही पाए गए तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।



फिलहाल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि अधिकारी जानबूझकर मामला दबा रहे थे। कलेक्टर ने अब खुद मामले की निगरानी करने की बात कही है। आने वाले दिनों में इस जांच पर सभी की नजर रहेगी।



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